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जदयू में नीतीश खेमे का शरद गुट पर 5 दिन में दूसरा वार, अरुण श्रीवास्तव के बाद सांसद अली अनवर सस्पेंड

19 अगस्त को पार्टी कार्यकारिणी की पटना में बैठक है लेकिन उससे पहले ही नीतीश गुट शरद यादव के करीबियों को पार्टी से किनारा करने में जुट गई है।
राज्य सभा सांसद अली अनवर।

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में चल रही खींचतान का विस्फोटक असर दिखने लगा है। पांच दिनों के अंदर नीतीश खेमे ने शरद यादव गुट पर दूसरा वार किया है। आज (11 अगस्त को) पार्टी ने राज्य सभा सांसद अली अनवर अंसारी को पार्टी के संसदीय दल से सस्पेंड कर दिया है। जदयू महासचिव के सी त्यागी ने इसका एलान किया। त्यागी ने बताया कि अली अनवर ने विपक्षी दलों की बैठक में हिस्सा लेकर पार्टी विरोधी काम किया है। इससे पहले मंगलवार (8 अगस्त) को पार्टी महासचिव पद से अरुण श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया गया था। श्रीवास्तव पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने गुजरात राज्यसभा चुनावों में पार्टी के एक मात्र विधायक छोटू भाई वासवा को पार्टी नेतृत्व के फैसले से अवगत कराने में कोताही बरती थी और पार्टी विरोधी काम किया था।

बता दें कि गुजरात राज्य सभा चुनाव में जदयू के एकमात्र विधायक छोटू भाई वसावा ने पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल को वोट किया था, इसी वजह से पटेल की जीत हो सकी थी। इससे खफा पार्टी नेतृत्व ने पार्टी महासचिव अरुण श्रीवास्तव को यह कहते हुए पद से हटा दिया था कि उन्होंने पार्टी के फैसले से विधायक को सही तरीके से अवगत नहीं कराया।

गौरतलब है कि महागठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाने के नीतीश कुमार के फैसले का सबसे पहले अली अनवर ने ही विरोध किया था। इसके बाद शरद यादव ने भी नीतीश के कदम की आलोचना की थी। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि जदयू में टूट हो सकती है। नीतीश के फैसले से जदयू के कई विधायक और सांसद भी नाराज हैं। 12 सांसदों में से 6 सांसद और करीब 20 विधायकों के नाराजगी की खबर पहले से ही है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक पार्टी के कुछ अन्य पदाधिकारी भी नीतीश कुमार के खिलाफ हैं।

लिहाजा, ऐसी खबरें आ रही थीं कि सभी लोग मिलकर नीतीश का तख्ता पलट करने की योजना पर काम कर रहे हैं। 19 अगस्त को पार्टी कार्यकारिणी की पटना में बैठक है लेकिन उससे पहले ही नीतीश गुट शरद यादव के करीबियों को पार्टी से किनारा करने में जुट गई है। अली अनवर पर निलंबन की कार्रवाई उसी से जोड़कर देखा जा रहा है।  माना जा रहा है कि अगला शिकार शरद यादव हो सकते हैं। शरद यादव इन दिनों बिहार के सात जिलों के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। ऐसा होता है तो जदयू पर वर्चस्व की लड़ाई चुनाव आयोग पहुंच जाएगी। चुनाव आयोग ही तय करेगा कि किस गुट के पास कितनी शक्ति है और किसे पार्टी के चुनाव चिह्न तीर दिया जाए लेकिन जब तक इसका फैसला नहीं हो जाता, तब तक पार्टी का चुनाव चिह्न जब्त किया जा सकता है।

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