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जेडीयू मंत्री ने भी बिहार के लिए मांगा विशेष दर्जा, लालू बोले- चुप क्यों हैं नीतीश कुमार?

नीतीश कुमार की पार्टी ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए मार्च 2013 में दिल्ली के रामलीला मैदान में अधिकार रैली आयोजित की थी।

एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान बिहार सीएम नीतीश कुमार और लालू यादव। (Source: PTI)

विशेष राज्य के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश से लेकर बिहार तक राजनीति गर्म है। एनडीए से अलग होने के मुद्दे पर जहां टीडीपी आपात बैठक कर रही है, वहीं बिहार सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से मांग की है कि बिहार को भी विशेष राज्य का दर्जा दिया जाय। उन्होंने कहा कि जल्द ही सीएम नीतीश पीएम मोदी के सामने यह मांग दोहराएंगे। इधर, राजद के कई बड़े नेताओं ने एक साथ नीतीश और मोदी सरकार पर हमला बोला है। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि आखिरकार नीतीश कुमार अपने बॉस से क्यों डर रहे हैं? क्यों नहीं उनसे बात करके बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलवा रहे हैं। राजद पर पलटवार करते हुए जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा है कि राजद ने 2004 में क्यों नहीं विशेष राज्य का दर्जा दिलवाया था जब दोनों जगह उसकी रकार थी।

लालू ने ट्वीट किया, केंद्र और बिहार में एनडीए की सरकारें है फिर भी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों नही मिल रहा? उन्होंने लिखा, “बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नीतीश नहीं दिलाना चाहते या फिर बीजेपी नहीं चाहती? छुपन-छुपाई छोड़ बिहार की जनता को स्पष्ट बताओ? किस वजह और किसकी वजह से विशेष राज्य का दर्जा नही मिल रहा?” दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, “नीतीश को अपना डर और स्वार्थ छोड़ रीढ़ की हड्डी सीधी रखनी चाहिए। नीतीश बिहार की जनता को बताये PM मोदी ने विशेष पैकेज के नाम पर 1 लाख 65 हज़ार करोड़ की बिहार की बोली लगाई थी उसमें से कितनी चवन्नी मिली? धेला नहीं मिला धेला.. हिम्मत है तो बताओ? कितना मिला? कब तक गुमराह करोगे?” बता दें कि पिछले साल ही जेडीयू ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग छोड़ दी थी और बीजेपी से हाथ मिला लिया था।

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विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट किया, “क्या नीतीश कुमार बिहार के लिए विशेष दर्जे की माँग को लेकर पहले की तरह अब धरने पर बैठेंगे? अब केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकारें रहने के बावजूद धरने पर नहीं बैठेंगे तो मतलब उनका पहले का धरना विशुद्ध नौटंकी था? नौटंकी इतनी भारी थी कि दिल्ली में अधिकार रैली करने चले गए थे।” राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने भी बयान जारी कर कहा है कि नीतीश जी के लिए भी एक समय बिहार के विशेष राज्य का मुद्दा बहुत अहम था। इतना कि विरोध में रहते हुए उन्होंने मनमोहन सिंह से कहा था कि अगर उनकी सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे देती है तो वे उनकी सरकार का समर्थन को तैयार हैं लेकिन आज वह मुद्दा उनकी याद से उतर चुका है।

गौरतलब है कि नीतीश कुमार की पार्टी ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए मार्च 2013 में दिल्ली के रामलीला मैदान में अधिकार रैली आयोजित कर ना केवल शक्ति प्रदर्शन किया था बल्कि केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार को चेतावनी भी दी थी कि विशेष दर्जे की मांग से समझौता नहीं करेंगे। 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले नीतीश ने यह भी कहा था कि जो भी पार्टी या गठबंधन बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देगा जेडीयू उसके साथ रहेगी। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान ही नरेंद्र मोदी ने पूर्णिया की चुनावी रैली में कहा था कि अगर उनकी केंद्र में सरकार बनती है तो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, विशेष आर्थिक पैकेज और राज्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। तब नीतीश ने मोदी का साथ नहीं दिया था क्योंकि कुछ दिनों पहले ही उन्होंने एनडीए से गठबंधन तोड़ा था।

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