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फिनिशिंग होने आए अवैध हथियारों की खेप बरामद, एक हफ्ते में 117 पिस्तौल, 70 मैगजीन के साथ 5 तस्कर भी दबोचे

देसी हथियारों को विदेशी लुक और चमक देने में मुंगेर के कारीगर माहिर हैं। मुंगेर का वरदे गांव तो इस काम को अंजाम देने के लिए अरसे से जाना जाता है। यहां घर-घर कारीगर हैं।
देसी हथियारों को विदेशी चमक देने में मुंगेर के कारीगर माहिर हैं। मुंगेर का वरदे गांव तो इस काम को अंजाम देने के लिए अरसे से जाना जाता है।

मुंगेर में बने हथियारों का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। पुलिस ने हावड़ा-जमालपुर एक्सप्रेस ट्रेन से 32 अर्द्धनिर्मित पिस्तौल बरामद की है। इसके साथ ही दो तस्करों को भी दबोचा है। एसपी आशीष भारती के मुताबिक हथियार की खेप बरियारपुर स्टेशन पर उतार ई-रिक्शा से मुंगेर लाया जा रहा था। सूचना मिलते ही बरियारपुर और जमालपुर पुलिस को सतर्क किया गया। इन तस्करों के तार भाया बंगाल-दिल्ली-उत्तर प्रदेश तक जुड़े हैं। एसपी के मुताबिक इस सिलसिले में गिरफ्तार तस्कर मोहम्मद अफरोज पश्चिम बंगाल के हुगली का रहने वाला है। दूसरा मो. जुबैद मुंगेर के हजरतगंज मोहल्ले का वाशिंदा है। ये दोनों बंगाल से अर्द्धनिर्मित हथियारों को फिनिसिंग कराने मुंगेर लाए थे। पुलिस ने ई-रिक्शा को भी जब्त कर लिया है। गिरफ्तार तस्करों से गहन पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भी दो तस्करों को दबोच कर 35 देसी पिस्तौल और 70 मैगजीन बरामद किया है। गिरफ्तार किए गए मो. मुनव्वर और शाहिद अनवर बिहार के मुंगेर के ही रहने वाले हैं। जाहिर है इन तस्करों के तार दिल्ली और देश के दूसरे शहरों से जुड़े हैं। बीते सोमवार (24 जुलाई) को भी साहेबगंज-जमालपुर सवारी गाड़ी से रेलवे पुलिस ने 50 अर्द्धनिर्मित पिस्तौल बरामद किए थे। भागलपुर रेलवे थाना के एसएचओ सुधीर कुमार सिंह के मुताबिक ट्रेन में दिनेश मंडल शराब के नशे में टुन्न था। पुलिस ने इसी वजह से उसके बैग की तलाशी ली तो उसमें हथियारों की बड़ा खेप निकली। उसके बैग में 8 पाउच देसी शराब भी थे। उसे शिवनारायणपुर स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। यह अपने को भागलपुर नाथनगर के दुगच्छी गांव का रहने वाला बता रहा है मगर पुलिस उससे कुछ ख़ास राज नहीं उगलवा पाई।

बता दें कि देसी हथियारों को विदेशी लुक और चमक देने में मुंगेर के कारीगर माहिर हैं। मुंगेर का वरदे गांव तो इस काम को अंजाम देने के लिए अरसे से जाना जाता है। यहां घर-घर कारीगर हैं। हाल के कुछ महीनों में चार सौ से ज्यादा अर्द्धनिर्मित देसी पिस्तौलें पुलिस ने छापेमारी कर बरामद की हैं। जानकार बताते हैं कि बिहार सरकार के गृह विभाग ने हथियारों की तस्करी रोकने के लिए एसटीएफ तैनात कर रखा है, बावजूद इसके हथियारों की तस्करी का धंधा जोरों पर जारी है। इसके अलावे आस-पड़ोस के जिलों में नक्सली भी यहां का हथियार खपाने में आगे हैं।

दरअसल, पश्चिम बंगाल के वर्दवान, मुर्शीदबाद और आसनसोल से अर्द्धनिर्मित पिस्तौलें विदेशी लुक और चमक देने के लिए कई सालों से मुंगेर लाए जाते रहे हैं। मुंगेर में फिनिशिंग पाकर उन हथियारों को खरीददार हाथों-हाथ खरीद लेता है। जानकार बताते हैं कि इन हथियारों की मांग असम, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बंगाल में ज्यादा है। चुनावों के दौरान इसका बाजार और जोर पकड़ लेता है। मुंगेर में अवैध बंदूक कारखानों की छापेमारी की वजह से कारीगरों ने अपना ठिकाना बदल लिया है और दूसरे राज्यों में बनाने के बाद उसकी फिनिशिंग कराने मुंगेर लाते हैं।

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