Harivansh, JDU, Bihar CM Nitish Kumar, Central Politics, Delhi Politics, Union Council of Ministers, JDU Quota - हरिवंश की जीत के बाद अब मोदी सरकार में अपना मंत्री बनवाएंगे नीतीश कुमार? - Jansatta
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हरिवंश की जीत के बाद अब मोदी सरकार में अपना मंत्री बनवाएंगे नीतीश कुमार?

फिलहाल मोदी मंत्रिमंडल में बिहार से कुल आठ मंत्री शामिल हैं। इनमें लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, राधा मोहन सिंह, गिरिराज सिंह, राज कुमार सिंह, राम कृपाल यादव, अश्विनी चौबे और रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-पीटीआई)

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राज्यसभा सांसद हरिवंश को उप सभापति बनाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी का कद केंद्रीय राजनीति में बढ़ गया है। माना जा रहा है कि नीतीश को खुश करने के लिए और लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर पिछले महीने उपजे गतिरोध को दूर करने के लिए ही बीजेपी ने हरिवंश को राज्यसभा का उप सभापति बनाया है। इसके अलावा आगामी लोकसभा चुनावों में और चुनावों के बाद संकटमोचक की भूमिका में भी नीतीश को उतारने के लिए बीजेपी ने ये चाल चली है क्योंकि नीतीश के कहने पर ही नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और के चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति के सांसदों ने एनडीए उम्मीदवार को वोट दिया। ऐसे में अब कयास इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि नीतीश की पार्टी जेडीयू को आनेवाले समय में और लाभ दिया जा सकता है। इनमें केंद्र सरकार में मंत्री पद भी शामिल है।

बिहार को संदेश: नीतीश को केंद्रीय राजनीति में तवज्जो देकर बीजेपी ने साफ संकेत दिया है कि एनडीए एकजुट है और बिहार में किसी तरह की टूट की आशंका नहीं है। इसके साथ ही यह संदेश भी देने की कोशिश की गई है कि सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी और जेडीयू में किसी तरह का मतभेद नहीं है। बता दें कि पिछले दिनों जेडीयू के नेताओं ने लोकसभा चुनावों में 25 सीटें मांगी थी और नीतीश कुमार को राज्य में चुनावी चेहरा बनाने की भी मांग की थी। इसके बाद दोनों दलों के बीच रिश्तों में तल्खी आ गई थी। बाद में अमित शाह और नीतीश कुमार  की मुलाकात में मतभेदों को दूर करने की कोशिशें हुईं।

मंत्री परिषद विस्तार का स्कोप: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में प्रधानमंत्री समेत कुल 76 मंत्री हैं। इनमें से कई मंत्रियों के पास दो से ज्यादा मंत्रालयों का प्रभार है। संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक मंत्रियों की अधिकतम संख्या 81 हो सकती है। यानी अभी भी कुल पांच मंत्रियों का कोटा खाली है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि लोकसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय दलों का हित साधने और चुनावी रणनीति के तहत मोदी मंत्री परिषद का विस्तार किया जा सकता है। पिछले साल सितंबर में मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था। उस वक्त भी अटकलें लगाईं गई थीं कि जेडीयू कोटे से दो मंत्री बनाए जाएंगे लेकिन ऐन वक्त पर ऐसा नहीं हो सका।

कौन-कौन हो सकता है चेहरा: अब बदले राजनीतिक हालात में जब बीजेपी पहले के मुकाबले थोड़ी कमजोर हुई है तो उसने सहयोगी दलों को तवज्जो देना शुरू कर दिया है। बिहार में महागठबंधन की काट के लिए नीतीश कुमार को साथ रखना बीजेपी की मजबूरी है। ऐसे में उन्हें मनमाफिक सीटें देने के अलावा केंद्र में भी नीतीश और उनकी पार्टी का कद बढ़ाना शामिल हो सकता है। बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिका गृह कांड में इस्तीफा देने वाली समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के जातीय कार्ड के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि अगर केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ और जेडीयू को मौका मिला तो कुशवाहा समाज से एक मंत्री हो सकता है। बता दें कि पिछले साल भी पूर्णिया से जेडीयू सांसद संतोष कुशवाहा का नाम मंत्री के लिए जोर-शोर से उछला था। इनके अलावा राज्यसभा में पार्टी के नेता आरसीपी सिंह भी मंत्री के दावेदार हो सकते हैं। उन्हें भी नीतीश का करीबी समझा जाता है।

बता दें कि फिलहाल मोदी मंत्रिमंडल में बिहार से कुल आठ मंत्री शामिल हैं। इनमें लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, राधा मोहन सिंह, गिरिराज सिंह, राज कुमार सिंह, राम कृपाल यादव, अश्विनी चौबे और रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा हैं।

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