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बिहार: चुपके से बढ़ा दिए गए बिजली के दाम, जब मई का बिल आया तो चौंके लोग

बिजली कंपनी को आम लोगों की न फिक्र है और न परवाह। शहर में 40 फीसदी ट्रांसफॉर्मर या तो खराब है या जले पड़े हैं।

भागलपुर समेत बिहार के कई जिलों में बिजली आपूर्ति के लिए निजी कंपनी से सरकार का एकरारनामा है। (File Photo)

बिहार में बिजली के दाम कब बढ़े किसी को पता नहीं। बीते तीन- चार महीने से राजनैतिक उठा-पठक की तरफ लोगों का ध्यान बांट चुपके से लोगों की जेब पर डाका डाल लिया। महागठबंधन पर लगातार हमला कर रही भाजपा भी इस मुद्दे पर एकदम चुप है। अप्रैल से बिजली के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी गई है। मई महीने का जून में आया बिजली बिल देख उपभोगताओं की आंखें फटी की फटी रह गई। सभी गुस्से में है।

भागलपुर समेत बिहार के कई जिले बिजली आपूर्ति के लिए निजी कंपनी से सरकार का एकरारनामा है। बिजली आपूर्ति की अनियमितता की बात करना तो बेकार है। भागलपुर के कमिश्नर अजय कुमार चौधरी और डीएम आदेश तितमारे ने कई दफा बिजली कंपनी को सुधार के वास्ते लिखा पढ़ी ही नहीं की बल्कि एकरारनामा खत्म करने की धमकी तक दी। बाबजूद इसके कोई फर्क नहीं पड़ता है। 9 जुलाई से श्रावणी मेला शुरू हो रहा है। लाखों कांवड़िए यहां के सुल्तानगंज की गंगा नदी से जलभर बाबाधाम पैदल जाते है। उनकी सुविधा के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने के बाबत लिखा है। फिलहाल तो कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।

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ऊपर से कोढ़ में खाज का काम बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर किया है। नई दरों के मुताबिक, 1 से 100 यूनिट – 5 रुपए 75 पैसे, 101 से 200 यूनिट 6 रुपए 50 पैसे, 201 से 300 यूनिट 7 रुपए 25 पैसे और इससे ऊपर प्रति यूनिट 8 रुपए है। बिजली दफ्तर के बाबू बताते हैं कि एक रुपए 48 पैसे की दर से सरकार की सब्सिडी है। वरना प्रति यूनिट साढ़े 9 रुपए दर होती। यह रेट घरेलू उपभोगताओं के लिए है। कामर्शियल या कारखानों के लिए बिजली की दर इससे कहीं ज्यादा है।

मई महीने का बेतहाशा बिल देख उपभोगताओं का माथा ठनका, तो बिजली दफ्तर की दौड़ शुरू हुई। जिसका बिल बीते महीने 1500 रुपए था उनका अचानक 4000 से भी अधिक आया। सिरदर्द होना बाजिव है। दफ्तर में बैठे बाबू को समझाने में दर्द। इस संवाददाता के बीच-बचाव करने पर बताया गया कि बढ़ोतरी अप्रैल से लागू है। मई के बिल में अप्रैल की बढ़ोतरी रकम भी जोड़ी गई है। अनूप बुधिया, संजीव शर्मा, रतन भालोटिया सरीखे सभी बिजली दरों में मनमानी बढ़ोतरी से परेशान हैं।

बिजली कंपनी को आम लोगों की न फिक्र है और न परवाह। शहर में 40 फीसदी ट्रांसफॉर्मर या तो खराब है या जले पड़े है। उमस भरी गर्मी में लोग जहां-तहां सड़क जाम कर बिजली के लिए आंदोलन करते दिख जाएंगे। यह आए रोज की और पूरे बिहार की दुखभरी कहानी है। जहां-तहां नंगे तार लटके पड़े हैं। जिस वजह से करंट लग मरने की रोजाना खबर मिलती है। गांवों में टोंटा फंसा बिजली चुरा लेने का खुले आम नजारा आप आसानी से देख सकते हैं।

बिजली उपभोगता संघ के प्रकाश चंद गुप्ता बताते हैं कि बिजली कंपनी के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की तैयारी चल रही है। वे बिजली की बढ़ोतरी के खिलाफ हैं। सियासत के खेल में आम नागरिकों को चूना लगाया जा रहा है। जिसे हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तमाम राजनैतिक दल आपसी ताना देने और आरोपों की बौछार करने में लगे हैं। सरकार को शराब बंदी, दहेज बंदी वोट-बटोरू नारे से फुर्सत नहीं है। बिजली की दरों में बढ़ोतरी, रेल किराए में इजाफा, नोटबंदी की मार, बैंकों में जमा- निकासी पर शुल्क, जीएसटी के डंडे की मार आमजन सहने को मजबूर है। खैर जो हो, बहरहाल बिजली दरों की बढ़ोतरी को लेकर उपभोगताओं में भारी गुस्सा है।

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