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शिक्षा मंत्री पोखरियाल ने भागलपुर के ‘वैभव’ को किया सम्मानित

2003 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस विकास वैभव ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान एनआईए में कई मामले सुलझाए। इनमें से एक बिहार के बोध गया मंदिर में आतंकी हमले की साजिश का खुलासा भी है।

शिक्षा मंत्री पोखरियाल और भागलपुर के डीआईजी विकास वैभव

गिरधारी लाल जोशी

भागलपुर के डीआईजी विकास वैभव को शनिवार (2 नवंबर ) को आईआईटी कानपुर के सभागार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने प्रतिष्ठित सत्येंद्र कुमार दुबे मेमोरियल पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। यह अवार्ड आईआईटी कानपुर ने 2005 में शुरू किया था। सबसे पहले दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इससे नवाजा गया था। केजरीवाल आईआईटी खड़गपुर और वैभव कानपुर आईआईटी के छात्र रहे है। यह पुरस्कार हरेक साल किसी आईआईटियन को दिया जाता है। इसके चयन बोर्ड में देश के तीन आईआईटी के निदेशक बैठते है।

अरविंद केजरीवाल को यह पुरस्कार जनता के लिए किए गए सरकारी कामों में बरती गई पारदर्शिता के लिए दिया गया था। वहीं, विकास वैभव को अपने कर्तव्य के दौरान मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने के लिए चुना गया है। ऐसा आईआईटी कानपुर के निदेशक अभय करनदिकर ने ट्वीट कर बताया । दो नवंबर को आईआईटी कानपुर ने अपनी स्थापना की हीरक जयंती मनाई है। इसी मौके पर पुरस्कार दिया गया।

2003 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस विकास वैभव ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान एनआईए में कई मामले सुलझाए। इनमें से एक बिहार के बोध गया मंदिर में आतंकी हमले की साजिश का खुलासा भी है। आतंकी गतिविधि में शरीक आशिक भटकल को नेपाल सीमा से गिरफ्तार करने में भी इन्हें कामयाबी मिली। प्रतिनियुक्ति से 2017 में लौटने के बाद से ये भागलपुर के डीआईजी पद पर तैनात है।

डीआईजी वैभव कहते है कि पुलिस का मतलब बंदूक और लाठी धारण करना ही नहीं है। बल्कि मानवीय मूल्यों और उससे जुड़ी जानकारियों की रक्षा करना भी है। पुलिस जनता का विश्वास जीत लेती है तो उसको हथियार उठाने की जरूरत ही नहीं होगी। पुरस्कार ग्रहण कर उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार अपने कर्तव्यनिष्ठ बने रहने का अहसास तो कराएगा ही, जिम्मेदारियों का बोध भी कराएगा। इस पुरस्कार के लिए मेरा चयन गौरव और सौभाग्य की बात है।

ध्यान रहे कि यह पुरस्कार आईआईटी कानपुर ने अपने पूर्ववर्ती छात्र इंजीनियर सत्येंद्र कुमार दुबे की याद में 2005 में शुरू किया था। जिनकी हत्या 27 नवंबर 2003 को बिहार के गया में कर दी गई थी। उस वक्त ये भारतीय इंजीनियरिंग सर्विस के अधिकारी थे। और एनएचआईए के झारखंड कोडरमा में चल रहे स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय सड़क निर्माण योजना के निदेशक थे। इस योजना में भ्र्ष्टाचार की शिकायत के लिए तब के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को पत्र इन्होंने लिखा था। भ्रष्टाचारियों को यह नागवार गुजरा और इनकी जान ही ले ली।

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