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भागलपुर नगर निगम में पार्षद पतियों की ‘दबंगई’, परेशान हैं नगर निगम कर्मचारी

भागलपुर नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी इन दिनों खासे परेशान हैं। परेशानी का कारण महिला पार्षदों के पति हैं। हाल ही में नगर आयुक्त आईएएस श्याम बिहारी मीणा से भी बदतमीजी का आरोप भी पार्षद पति पर लगा था।

भागलपुर नगर निगम। (फाइल फोटो)

भागलपुर नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी इन दिनों खासे परेशान हैं। परेशानी का कारण महिला पार्षदों के पति हैं। पार्षद पतियों को न तो अधिकारी पसंद करते हैं और न ही कर्मचारी। क्योंकि पत्नी की पार्षदी की हनक में ये रोज नगर निगम में चक्कर काटते हैं। आए दिन पार्षद पतियों के कारण निगम परिसर में मारपीट, बदसलूकी और धक्का-मुक्की की घटनाएं होती रहती हैं। पार्षद पतियों की दीदा-दिलेरी का आलम यह है कि हाल ही में नगर आयुक्त आईएएस श्याम बिहारी मीणा से भी बदतमीजी का आरोप पार्षद पति पर लगा था। जिसमें मामला पुलिस और बाद में कोर्ट तक भी पहुंचा था। इस मामले को 25 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी भी निगम में सब ठीक नहीं बताया जा रहा है।

बता दें कि भागलपुर नगर निगम में कुल 51 वार्ड हैं। मई 2017 में निगम के चुनाव हुए थे। इस चुनाव में 35 महिलाओं ने वार्ड पार्षद का चुनाव जीता था। महापौर की सीट भी महिला कोटे की थी। महापौर का चुनाव सीमा साह ने जीता था। सीमा साह के पति आनंदी साह उर्फ टुनटुन साह जिला परिषद के अध्यक्ष हैं। आनंदी साह पर नगर निगम में दखल देने के आरोप अक्सर लगाए जाते हैं। बीते कुछ दिनों में महापौर और नगर आयुक्त के मतभेद बढ़ गए हैं। महापौर ने पत्रकारों से बातचीत में कई बार कहा है कि, नगर आयुक्त उनका फोन रिसीव नहीं करते हैं।

बीते दिनों नगर निगम में पार्षद पति और निगम कर्मचारियों के बीच मारपीट के बाद बवाल मच गया था। निगम कर्मचारियों ने वार्ड 40 की पार्षद संध्या गुप्ता के पति विनय गुप्ता, पार्षद संजय सिंहा और प्रमोद लाल के खिलाफ नामजद एफआईआर करवाई थी। इसके बाद महापौर सीमा साह के पति और जिला परिषद अध्यक्ष टुनटुन साह ने नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा और कर्मचारियों के विरुद्ध योजना में कमीशन मांगने जैसे आरोपों की तहरीर दी थी। वहीं कर्मचारियों का आरोप है कि पार्षद पति उनके ऊपर फर्जी दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल नगर निगम के कामों में महिला पार्षदों से ज्यादा रुचि उनके पतियों को है। कई महिला पार्षदों के पति तो उनके साथ बतौर सहयोगी सदन की बैठकों में भी शामिल होते रहे हैं।

कुछ कर्मचारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा आईएएस अधिकारी हैं। वह सारा काम तेज गति और पारदर्शिता के साथ चाहते हैं। उनका यही इरादा पार्षद पतियों को खटक रहा है। इसी वजह से बीते 4 अप्रैल को नगर निगम में हंगामा हुआ था। इस मामले में दफ्तर के सुपरिटेंडेंट मनोज कृष्ण सहाय ने थाना आदमपुर में मामला दर्ज करवाया था। इस केस के गवाहों में नगर आयुक्त समेत 25 अधिकारी शामिल हैं। इस मामले में आरोपियों की जमानत नहीं हुई है। लेकिन पुलिस ने अभी किसी को गिरफ्तार तक नहीं किया है।

संजय सिन्हा और प्रमोद साह खुद को बेकसूर बताते हैं। वहीं पार्षद संध्या गुप्ता अपने पति के बचाव में कहती हैं कि वार्ड के लोगों की पेयजल की समस्या का निदान करवाने गए थे। लोगों ने फंसा दिया है। इस मामले में सही-गलत का फैसला अदालत को करना है। लेकिन नाराज कर्मचारियों ने नगर निगम में पांच दिन तक हड़ताल रखी थी। आयुक्त राजेश कुमार के बीच-बचाव के बाद सुलह हुई और कर्मचारी काम पर लौट गए। कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष राजेश कुमार का कहना है कि भविष्य में ऐसी बदसलूकी हुई तो प्रतिक्रिया और बड़ी होगी। लेकिन इस झगड़े का खामियाजा सबसे ज्यादा शहर की जनता को भोगना पड़ रहा है। इस झगड़े के कारण टूटी सड़कों, ध्वस्त नालों और सड़कों पर बहते पानी की समस्याएं कहीं नेपथ्य में चली गई हैं।

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