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बिहार: अब निगरानी कोर्ट में होगी भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व वीसी मेवालाल चौधरी से जुड़े केस की सुनवाई

लोक अभियोजक सत्यनारायण प्रसाद साह बताते हैं कि नियम के मुताबिक भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई निगरानी कोर्ट ही करता है। अब पुलिस को उनकी सम्पति कुर्की जब्ती के लिए वारंट निगरानी अदालत में आवेदन देकर मांगना होगा।

बीएयू के पूर्व वीसी मेवालाल चौधरी कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे

बिहार के सबौर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. मेवालाल चौधरी के मामले की सुनवाई अब निगरानी कोर्ट करेगा। भागलपुर जिला जज ने उनके मुकदमे से जुड़ी फाइल को विशेष दूत से पटना भेज दिया है, अब इस मामले की सुनवाई पटना में होगी। मेवालाल चौधरी बिहार कृषि विश्वविद्यालय में नियु्क्ति में घोटाले का आरोप है। पुलिस ने अपनी जांच के दौरान 161 जूनियर टीचर और वैज्ञानिक बहाली में धांधली के साथ पैसों के लेनदेन के सबूत भी पाए हैं। मेवालाल चौधरी जेडीयू के विधायक हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। फिलहाल मेवालाल चौधरी फरार हैं और पुलिस उनकी गिरफ़्तारी के लिए कई जगहों पर लगातार दबिश दे रही है।

इससे पहले भागलपुर की अदालत ने मेवालाल चौधरी की अग्रिम जमानत की अर्जी रद्द कर दी थी। और 11 मार्च को पुलिस के आवेदन पर अदालत ने गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था। एसएसपी मनोज कुमार के मुताबिक उनकी गिरफ़्तारी के लिए विशेष दल गठित किया है। उनके पटना, तारापुर, मुंगेर ठिकानो पर छापे मारे गए। लेकिन कहीं उनका सुराग नहीं मिला। इसके बाद अदालत से उनकी जायदाद कुर्क करने के लिए पुलिस ने कुर्की जब्ती वारंट दरखास्त देकर मांगा था। पुलिस का कहना है कि क्षेत्रीय पास्पोर्ट दफ्तर को मेवालाल चौधरी का पासपोर्ट जब्त करने के लिए लिखा गया है। ताकि वे विदेश न भाग सके। उनकी गिरफ़्तारी के लिए दबिश भी बढ़ाई गई है। और उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। लोक अभियोजक सत्यनारायण प्रसाद साह बताते हैं कि नियम के मुताबिक भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई निगरानी कोर्ट ही करता है। अब पुलिस को उनकी सम्पति कुर्की जब्ती के लिए वारंट निगरानी अदालत में आवेदन देकर मांगना होगा।

इधर मेवालाल चौधरी के वकील जवाहर प्रसाद साह और ममता कुमारी ने अपनी दलील में उन्हें बीमार बताया। और कुर्की वारंट जारी करने का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘मेवालाल चौधरी जनप्रतिनिधि है। उन्हें बदनाम करने की साजिश रची गई है।’ इनकी दलील सुनने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने केस की फाइल ही जिला जज को लौटा दी। और जिला जज ने केस पटना निगरानी कोर्ट में अगली सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया।

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