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बिहार पर्चा लीक: नीतीश कुमार ने कहा- एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में ही SIT करती रहेगी जांच

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी नेता जीतनराम मांझी भी पुलिस की कार्रवाई से नाराज हैं।

1987 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार के साथ उनके चार रिश्तेदारों को भी एसआईटी ने हिरासत में लिया है।

बिहार में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच टकराव की नौबत आ गई है। आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन अपने वरीय और कनीय साथी की गिरफ़्तारी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। अब तो आईएएस एसोसिएशन की केंद्रीय इकाई दिल्ली ने भी बिहार आईएएस एसोसिएशन के समर्थन में मोर्चा संभाल लिया है और पुलिस की कथित मनमानी के खिलाफ राज्य और केंद्र सरकारों से फौरन दखल देने की मांग की है। इसके साथ ही बिहार एसएससी घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की बिहार आईएएस एसोसिएशन की मांग का समर्थन किया है। मगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पटना के एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में बना विशेष जांच दल (एसआईटी) पर पूरा भरोसा है। तभी सीबीआई जांच की मांग को उन्होंने खारिज कर दिया। यह पहला मौका है जब कुछ ही दिनों के अंतराल पर बिहार में दो आईएएस अधिकारी गिरफ्तार कर जेल भेजे गए हैं।

मध्य प्रदेश में देश का सबसे बड़ा व्यापम घोटाला हुआ मगर वहां किसी भी आईएएस अफसर के खिलाफ मामला दर्ज नहीं हुआ लेकिन बिहार में पेपर लीक मामले के सिलसिले में न तो कोई जांच कमिटी बनाई गई और न कोई आयोग। आईएएस एसोसिएशन का आरोप है कि जब सुधीर कुमार जांच में सहयोग कर रहे थे तब भी एसआईटी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हैरत की बात यह है कि अबतक किसी भी मंत्री और विधायक को पकड़ना तो दूर पूछताछ तक नहीं की गई जिनके नाम का खुलासा परमेश्वर राम ने किया था। एक आईएएस अफसर कहते हैं कि वे कायदे कानून से बंधे है। दोषी होने पर नौकरी तक जा सकती है। पेंशन रुक सकती है। पदोन्नति रुक सकती है मगर बगैर जांच गिरफ्तार कर शॉर्टकट रास्ता सुधीर कुमार के मामले में अख्तियार किया गया, जो नाइंसाफी है। और यही बात एसोसिएशन भी कह रहा है।

दरअसल, बिहार कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष और प्रधान सचिव सुधीर कुमार और मोहनिया में एसडीओ आईएएस जितेंद्र कुमार गुप्ता की गिरफ़्तारी को लेकर ही आईएएस एसोसिएशन आक्रमक मूड में है। एसोसिएशन अपने साथियों की छवि ईमानदार अफसर की बता रहा है और आरोप लगा रहा है कि उनकी गिरफ्तारी पुलिस ने बगैर गहन जांच किए की है, इसीलिए दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। एसोसिएशन ने इसीलिए सीबीआई जांच की मांग की है और इस वास्ते राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। विपक्ष भी सीबीआई की मांग कर रहा है। एसोसिएशन ने मांग पत्र मुख्यमंत्री को भी दिया है।

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राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी नेता जीतनराम मांझी भी पुलिस की कार्रवाई से नाराज हैं। असल में जब लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे तब सुधीर कुमार पटना के डीएम थे और जब जीतनराम मांझी मुख्यमंत्री बने तो सुधीर कुमार गृह सचिव थे। जब सुशील मोदी वित्त मंत्री थे तब सुधीर कुमार वित्त विभाग में थे। तब इनकी छवि पाक साफ थी। ऐसा इन नेताओं ने कहा है। लोजपा नेता रामविलास पासवान और रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बयान ने भी आईएएस एसोसिएशन का हौसला बढ़ाया है। बिहार में पहला मौका है कि घपलों और घूसखोरी के दाग सीधे आईएएस पर लगे और वो गिरफ्तार किए गए हैं और यह पहला ही अवसर देखने को मिला कि अपने साथियों की तरफदारी में ये आईएएस अफसर बिहार सरकार की मुखालफत करने सड़कों पर उतरे हैं।

बिहार में मामला कुछ भी हो जाति-पाति से अछूता नहीं रह सकता। इस मामले को भी कई लोग इसी नजरिए से देखते हैं। सुधीर कुमार दलित हैं तो जीतेन्द्र गुप्ता बनिया हैं। पुलिस में बैठे अगड़ी जाति के अफसरों ने कुछ ज्यादा अतिरेक में इनपर कार्रवाई कर दी। बिहार सरकार के मुख्य पदों पर बैठे आईएएस भी चुप्पी साधे हैं। जानकार बताते हैं कि बिहार आईएएस एसोसिएशन के ज्ञापन पर संघ के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने दस्तखत करने से मना कर दिया था। राज्यपाल को सौंपे मांग पत्र पर सचिव विवेक कुमार सिंह और कोषाध्यक्ष दीपक कुमार के दस्तखत हैं। मसलन, युवा आईएएस अफसर ने ही सरकार को आँख दिखाने का साहस किया। इस बात में भी दम है कि सुधीर कुमार 1980 बैच के वरीय आईएएस हैं और प्रधान सचिव के पद पर आसीन हैं। इनकी वरीयता के हिसाब से ये भी मुख्य सचिव की कतार में है। शायद उन्हें रोकने के मकसद से भी कार्रवाई की बात कही जा रही है।

हालांकि, तीसरे आईएएस सीके अनिल को भी पेपर लीक मामले में पुलिस वारंट लेकर ढूंढ रही है। उनके पटना और दिल्ली ठिकाने पर छापा मारा गया है। पुलिसिया कार्रवाई से बिहार के तमाम आईएएस अफसर अवाक हैं। अब वे कह रहे हैं कि किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री का मौखिक आदेश नहीं मानेंगे। सवाल यहां उठ रहा है कि क्या अब तक ये मौखिक आदेश पर ही काम कर रहे थे। यदि ऐसा था तो ये अपनी साख पर ही बट्टा लगा रहे हैं। कर्मचारी चयन प्रतियोगिता परीक्षा के पेपर लीक मामले में आयोग के सचिव परमेश्वर राम के बाद अध्य्क्ष सुधीर कुमार को पुलिस ने पकड़ा है। अब इनके कई रिश्तेदार ही नहीं इनके बुजुर्ग पिता जो सालों पहले बिहार सरकार के संयुक्त सचिव पद से रिटायर हुए हैं, उन्हें भी दबोचा जा रहा है।

इसी तरह कैमूर के एसडीओ आईएएस जितेंद्र गुप्ता ने ट्रकों से वसूले जा रहे पुलिस हफ्ता को बंद करा देने से पुलिस ने खार खा ली थी और एफआईआर उनके खिलाफ दर्ज कर जेल भेज दिया था। जीतेन्द्र गुप्ता बताते हैं कि ट्रांसपोर्ट कानून लागू करने के लिए मोटर व्हेकिल कानून है और महकमा है। पुलिस को दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। पुलिस हफ्ता की वजह से बिहार उत्तर प्रदेश सीमा मोहनिया के पास जाम लगवाता है जिससे आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इन दोनों आईएएस अफसर के बचाव में केंद्रीय आईएएस एसोसिएशन जो 4926 आईएएस अधिकारियों का नेतृत्व करता है, उतर चुका है। इसके सचिव संजय भोसरेड्डी ने कहा है कि बिहार में पुलिस कानून सम्मत कार्रवाई करे। पहले गहन जांच करे, फिर किसी तरह का कर्रवाई। जाहिर है बिहार पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। इसी वास्ते निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग दोहराई जा रही है। यह अलग बात है कि इस मुद्दे पर आईपीएस एसोसिएशन अभी चुप है। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि आईपीएस एसोसिएशन आगे क्या करता है।

वीडियो देखिए- बिहार स्टाफ परीक्षा का पर्चा लीक; पुलिस ने आयोग के सचिव को हिरासत में लिया

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