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हिंदू तो नहीं मांगते मंगलवार को छुट्टी- शुक्रवार की छुट्टी पर बोले नीतीश के मंत्री, सीमांचल के स्कूल हो रहे जुमे के दिन बंद

रिपोर्ट्स के अनुसार सीमांचल इलाके के 500 स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी मिल रही है।

हिंदू तो नहीं मांगते मंगलवार को छुट्टी- शुक्रवार की छुट्टी पर बोले नीतीश के मंत्री, सीमांचल के स्कूल हो रहे जुमे के दिन बंद
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

बिहार के सीमांचल के स्कूलों में अब रविवार के बजाय शुक्रवार को छुट्टी होने लगी है। इससे पहले ऐसा ही मामला झारखंड में भी सामने आया था। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं नीतीश सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नीरज सिंह बबलू ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हिंदू तो मंगलवार और गुरुवार को छुट्टी नहीं मांगते हैं।

बिहार के पर्यावरण मंत्री नीरज कुमार सिंह ‘बबलू’ ने इस मामले को लेकर कहा- “देखिए हम समझते हैं कि यह सही नही है। अगर पूरे देश में संडे को छुट्टी होती है तो संडे को ही होना चाहिए। अब धर्म के नाम पर…कभी हमलोग हिंदू धर्म के नाम पर कि मंगलवार को छुट्टी दे दो, गुरुवार को हमारी पूजा होती है छुट्टी दे दो…ये सही नहीं है।”

बीजेपी नेता ने कहा कि सीमांचल वाले इलाके में ऐसी समस्या है। उन्होंने इसके लिए पीएफ और उसके गजवा-ए-हिंद को भी जिम्मेदार ठहराया। साथ ही जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की भी वकालत की।

एचटी की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के सीमांचल क्षेत्र में 500 से अधिक सरकारी स्कूलों में वर्षों से रविवार के बजाय शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश मिल रहा है। इन इलाकों में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। हालांकि इस संबंध में किसी भी तरह का कोई सरकारी निर्देश नहीं है।

बिहार के पूर्वी क्षेत्र, जिसमें किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया के चार जिले शामिल हैं, में 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी 30% से 70% तक है। इन्हीं इलाकों में ऐसे मामले सामने आए हैं। इस तरह के सबसे ज्यादा स्कूल अररिया जिले के जोकीहाट प्रखंड में हैं। जहां 244 सरकारी स्कूलों में से 229 का शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहता है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पूर्णिया में 200 ऐसे सरकारी स्कूल हैं जबकि किशनगंज में 19 हैं। यहां शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में किसी भी सरकारी निर्देश के बारे में अनभिज्ञता जताई है। वहीं शिक्षकों का कहना है कि यह प्रथा लगभग एक दशक पहले स्थानीय मुस्लिम नेताओं के निर्देश पर शुरू हुई थी।

वहीं इस मामले के तूल पकड़ते ही सरकार अब जांच कर कार्रवाई करने की बात कह रही है। शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि इस मामले की जांच के जो भी उचित होगा वो कार्रवाई की जाएगी।

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