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बिहार: मानवता फिर शर्मसार, लाश को कंधे पर लादकर लेकर गए रिश्‍तेदार

ललिता सिंह ने कहा कि आरोपो से इनकार करते हुए कहा कि उस वक्त अस्पताल में कोई चालक मौजूद नहीं था जिस वजह से एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई जा सकी।

Author March 9, 2017 1:08 PM
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक रिश्तेदार को एंबुलेंस नहीं मिलने पर महिला के शव को कंधे पर ले जना पड़ा। (Image Source: ANI)

बिहार में मुजफ्फरपुर जिले के एक सरकारी अस्पताल में कथित तौर पर एंबुलेंस देने से इनकार करने के बाद एक महिला के रिश्तेदारों को उसका शव कंधे पर लादकर घर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस मामले ने कालाहांडी और वैशाली की घटनाओं की यादों को ताजा कर दिया है। सिविल सर्जन ललिता सिंह ने बताया कि यहां के शिवपुरी इलाके के रहने वाले और श्रमिक सुरेश मंडल की पत्नी को 18 फरवरी को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत खराब होने पर उन्हें कल रात आईसीयू में ले जाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई।

उन्होंने कहा कि महिला के परिवार के सदस्यों के पास निजी ऐंबुलेंस लेने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे तो उन्होंने अस्पताल प्रशासन से अनुरोध किया कि शव को घर ले जाने के लिए उन्हें एक ऐंबुलेंस दी जाए। सिंह ने कहा कि अस्पताल उन्हें एंबुलेंस मुहैया नहीं करा सका और उनके परिवार के सदस्यों को एक किलोमीटर की दूरी तक उनका शव अपने कंधों पर लादकर ले जाना पड़ा।

ललिता सिंह ने कहा कि आरोपो से इनकार करते हुए कहा कि उस वक्त अस्पताल में कोई चालक मौजूद नहीं था जिस वजह से एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई जा सकी। उन्होंने कहा, ‘मैं इस दुखद घटना से आहत हूं। इस मामले में जो भी दोषी होगा उसे सजा दी जाएगी।’

गौरतलब है कि ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ओड़िशा के कालाहांडी जिले में रहने वाले आदिवासी दाना मांझी को भी अपनी पत्नी के शव को कंधे पर लेकर जाना पड़ा था। उनकी 42 वर्षीय पत्नी को टीबी था और उनको इलाज के लिए भवानीपटना के जिला अस्पताल लाया गया था जहां उनकी मृत्यु हो गई थी। दाना मांझी को मृत पत्नी को ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली थी, जिसके बाद दाना ने पत्नी के शव को चटाई और चादर में लपेटा और कंधे पर लेकर 12 साल की बेटी के साथ गांव की ओर चल पड़ा। पत्नी को कंधे पर ले जाते मांझी की तस्वीर और वीडियो मीडिया में आने के बाद इस मामले पर काफी विवाद हुआ। घटना की खबर मिलने के बाद बहरीन के प्रधानमंत्री भी दुखी हो गए थे। उन्होंने तब ही मांझी को वित्तीय सहायता देने का ऐलान कर दिया था।

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