Bihar NDA Row, clashes may be errupt in Bihar BJP over thease five parliamentary seats, JDU may create tenssion, RLSP, Upendra Kushwaha, Arun Kumar, Nitish Kumar - बिहार में तकरार: जदयू तो छोड़िए, अपनी इन पांच सीटों को लेकर बीजेपी में ही हो सकता है झगड़ा - Jansatta
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बिहार में तकरार: जदयू तो छोड़िए, अपनी इन पांच सीटों को लेकर बीजेपी में ही हो सकता है झगड़ा

लोकसभा चुनाव होने में अब एक साल से भी कम समय रह गया है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अभी से ही गोटियां बिछाने लगे हैं ताकि चुनाव की तैयारी की जा सके।

Author June 5, 2018 9:28 AM
जेडीयू का ऐलान बिहार में नीतीश कुमार होंगे एऩडीए का चेहरा। (image source-PTI)

बिहार एनडीए में भले ही झगड़ा फिलहाल थमता दिख रहा हो लेकिन असलियत में यह झगड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी ने 25 सीटें देने की मांग शुरू कर दी है लेकिन बीजेपी की करीब आधा दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां पार्टी के अंदर ही झगड़ा हो सकता है। इन सीटों पर पार्टी या तो अनुशासनात्मक कार्रवाई कर या फिर सांसदों के परफॉर्मेन्स के आधार पर टिकट काट सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कुछ सांसदों का संसदीय क्षेत्र भी बदला जा सकता है। ऐसे में बीजेपी के अंदरखाने नाराजगी और बढ़ सकती है। उत्तरी बिहार के दरभंगा संसदीय क्षेत्र से मौजूदा सांसद कीर्ति झा आजाद का टिकट कटना तय है। वो पार्टी से पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। खबर है कि इस सीट पर बीजेपी के कई दिग्गज नजरें गड़ाए हुए हैं। यह सीट बीजेपी की पुश्तैनी सीट मानी जाती है। आजाद 2009 से यहां से लगातार सांसद चुने जाते रहे हैं। इस संसदीय क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है।

चौधरी चल नहीं पाएंगे: दरभंगा से सटे झंझारपुर क्षेत्र के सांसद वीरेंद्र कुमार चौधरी का भी टिकट कटना तय है। बीजेपी उनके कामकाज से नाराज है। मूलत: इस सीट पर जनता परिवार का ही कब्जा रहा है। कभी जदयू तो कभी राजद के उम्मीदवार ही यहां से जीतते रहे हैं। 1996 से पहले यहां जनता दल के प्रत्याशी जीतते रहे हैं। नेपाल से सटे इस इलाके में ओबीसी मतदाताओं खासकर यादवों की संख्या अधिक है। एनडीए के अंदर इस सीट पर जेडीयू की नजर है। मौजूदा सांसद चौधरी पहले जनता परिवार के ही नेता रहे हैं लेकिन मोदी लहर में पाला बदलकर बीजेपी में शामिल हो गए थे।

शॉटगन पर भी संकट: पटना साहिब सीट परंपरागत रूप से बीजेपी की सीट रही है। पिछले पांच चुनावों में से चार में बीजेपी की जीत हुई है। मौजूदा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा 2009 से लगातार यहां से जीतते रहे हैं लेकिन पिछले डेढ़ साल से वो जिस तरह से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ हल्ला बोलते रहे हैं और पीएम नरेंद्र मोदी के कामकाज की आलोचना करते रहे हैं, उससे जाहिर है कि बीजेपी उन्हें शायद ही 2019 के रण में उम्मीदवार बनाए। ऐसी सूरत में इस जिताऊ सीट पर बीजेपी में उम्मीदवारी के लिए हंगामा होना तय माना जा रहा है।

चंपारण में रार ज्यादा:  सूत्रों के मुताबिक वाल्मीकि नगर और पश्चिमी चंपारण के मौजूदा सांसदों को भी बदलने की खबर है। वाल्मीकि नगर से फिलहाल सतीश चंद्र दुबे और पश्चिमी चंपारण से संजय जायसवाल सांसद हैं। पार्टी इन दोनों सांसदों के काम से खुश नहीं है। चंपारण इलाके की तीनों सीटों का नाम परिसीमन के बाद साल 2008 में बदल चुका है। उधर, जेडीयू वाल्मीकि नगर सीट पर नजर गड़ाए हुई है। वहां से पहले भी जेडीयू के वैद्यनाथ महतो चुनाव जीत चुके हैं। इस इलाके में ओबीसी वोटरों की अच्छी तादाद है। जेडीयू फिल्म निर्माता प्रकाश झा के लिए पश्चिमी चंपारण की सीट भी बीजेपी से मांग रही है। अगर ऐसा होता है तो संजय जायसवाल विधान परिषद में जा सकते हैं। चंपारण में ब्राह्मण वोटरों की संख्या भी अच्छी है।

लेनिनग्राद में भी है झगड़ा: उधर, बेगूसराय के मौजूदा सांसद भोला सिंह का भी टिकट काटे जाने की आशंका है। बेगूसराय से पहली बार बीजेपी की जीत हुई है। बिहार का लेनिनग्राद कहलाने वाले इस संसदीय इलाके में भूमिहार वोटरों की संख्या अधिक है। शायद यही वजह है कि अधिकांश बार भूमिहार चेहरे की जीत होती रही है। जेडीयू की नजर भी इस सीट पर है। राज्य सरकार में मंत्री राजीव रंजन सिंह यहां से 2004 में जेडीयू के सांसद रह चुके हैं। पार्टी ने 2009 में मोनाजिर हसन को उम्मीदवार बनाया था, वो भी चुनाव जीते थे। चर्चा यह भी है कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को बेगूसराय से लड़ाया जा सकता है।

रालोसपा को चाहिए अपना शेयर: एनडीए के दूसरे सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के तीन सांसद हैं। खुद पार्टी अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा काराकाट से सांसद हैं। उनके अलावा सीतामढ़ी से रामकुमार शर्मा और जहानाबाद से अरुण कुमार पार्टी के सांसद हैं। अरुण कुमार और उपेंद्र कुशवाहा में झगड़ा चल रहा है। कुमार ने पार्टी पर दावेदारी ठोकी है। इधर, रामकुमार शर्मा के कामकाज से न तो पार्टी और न ही एनडीए खुश है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा पुरानी तीनों सीटों पर अपना पसंदीदा उम्मीदवार चाहते हैं, जबकि अरुण कुमार जहानाबाद से ही बीजेपी के उम्मीदवार बनना चाहते हैं। इस सीट को लेकर बीजेपी और रालोसपा में झगड़ा है। उधर, सीतामढ़ी सीट से भी बीजेपी अपना उम्मीदवार खड़ा करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने वहां चहलकदमी तेज कर दी है। हालांकि, जेडीयू खुद इस सीट पर अपना उम्मीदवार चाहती है। यह इलाका यादव, मुस्लिम और ओबीसी बहुल है और लंबे समय से यहां से राजद और जदयू उम्मीदवार ही जीतते रहे हैं।

बता दें कि लोकसभा चुनाव होने में अब एक साल से भी कम समय रह गया है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अभी से ही गोटियां बिछाने लगे हैं ताकि चुनाव की तैयारी की जा सके। इसी सिलसिले में लंबी लकीर खींचते हुए जेडीयू ने रविवार (03 जून) को न सिर्फ 25 सीटों की मांग की बल्कि खुद को गठबंधन में बड़ा भाई बताकर अपनी आगामी भूमिका का इजहार कर दिया है। बीजेपी की ओर से उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी दिल मिलने की बात कहकर फिलहाल मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की है।

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