Bihar Family clash in Lalu Yadav's Party RJD, Tej pratap yadav, Tejashwi Yadav, Bihar Politics -लालू की पार्टी में घमासान? तेजप्रताप बोले- मेरी कोई सुनता नहीं, भाई-भाई को चाहते हैं लड़ाना - Jansatta
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लालू की पार्टी में घमासान? तेजप्रताप बोले- मेरी कोई सुनता नहीं, भाई-भाई को चाहते हैं लड़ाना

तेज प्रताप ने कहा कि तेजस्वी उनके जिगर के टुकड़े हैं और कोई भी शक्ति उन्हें जुदा नहीं कर सकती है। तेज प्रताप ने कहा कि वो अपने भाई को गद्दी पर बैठाकर ही दम लेंगे।

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव (File photo)

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में घमासान की खबर है। पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा है कि पार्टी में उनकी कोई नहीं सुनता है। उन्होंने कहा कि पार्टी में असामाजिक तत्व प्रवेश कर गए हैं जो भाई को भाई से लड़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो पार्टी से ऐसे लोगों को भगा कर ही दम लेंगे, भले ही उन्हें इसके जान क्यों न देना पड़े। जब उनसे पूछा गया कि वे लोग कौन हैं तो उन्होंने किसी का नाम बताने से इनकार कर दिया। तेज प्रताप ने कहा कि पार्टी में सभी लोग ऐसे लोगों का नाम जानते हैं। तेज प्रताप ने कहा कि तेजस्वी उनके जिगर के टुकड़े हैं और कोई भी शक्ति उन्हें जुदा नहीं कर सकती है। तेज प्रताप ने कहा कि वो अपने भाई को गद्दी पर बैठाकर ही दम लेंगे।

न्यूज 18 इंडिया से बात करते हुए तेजप्रताप ने कहा कि वो राजनीति छोड़कर कोई और काम नहीं करेंगे। बता दें कि आज (09 जून) दिन में तेज प्रताप ने एक ट्वीट कर सनसनी फैला दी थी कि वो राजनीतिक संन्यास के पथ पर हैं। उन्होंने लिखा था कि वो चाहते हैं कि भाई को गद्दी पर बैठाकर खुद द्वारका चले जाएं। इस बावत उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण जैसे पांडवों को हस्तिनापुर में राजपाट देकर द्वारका चले गए, उसी तरह वह भी द्वारका चले जाना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी छोड़ने से इनकार किया और कहा कि किसी भी सूरत में भाई-भाई के बीच कोई झगड़ा कराकर कोई भी लाभ नहीं उठा सकेगा।

तेज प्रताप ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता तुरंत सख्त कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि पार्टी में मौजूद ऐसे असामाजिक तत्वों को पार्टी से तुरंत बाहर निकाला जाय नहीं तो उसके खिलाफ वो अपने स्तर पर कदम उठाएंगे। उन्होंने राजेन्द्र पासवान का नाम लेते हुए कहा कि वो दलित चेहरा हैं और उन्हें पार्टी में पद देने के लिए पार्टी नेताओं को कहा था। इस फैसले पर पार्टी अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की सहमति थी। बावजूद इसके उसे लागू करने में देर किया गया। उन्होंने पार्टी में अनुशासन की कमी होने की भी बात कही।

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