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नीतीश कुमार ने लालू यादव समेत तमाम विपक्ष को दिया एक और झटका, जीएसटी पर मोदी सरकार का न्योता माना

नीतीश 30 जून को आधी रात में बुलाए गए संसद के विशेत्र कार्यक्रम में शामिल होंगे।
लालू प्रसाद यादव (बाएं) के साथ बिहार के सीएम नीतीश कुमार। (Photo: PTI)

बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने आज (29 जून को) महागठबंधन के सहयोगी राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव समेत कांग्रेस को फिर झटका दिया है। नीतीश कुमार ने जीएसटी पर बुलाए गए संसद के विशेष कार्यक्रम में शामिल होने का मोदी सरकार का निमंत्रण कबूल कर लिया है। नीतीश कल (30 जून को) आधी रात में बुलाए गए संसद के स्पेशल प्रोग्राम में शामिल होंगे। इससे पहले कांग्रेस और राजद ने ने इस कार्यक्रम के बहिष्कार की घोषणा की थी। हालांकि, पहले से ही यह माना जा रहा था कि नीतीश इस कार्यक्रम में शामिल होंगे क्योंकि नीतीश कुमार जीएसटी को लेकर बीजेपी की तरह ही उत्साहित हैं। उन्होंने बिहार में एक जुलाई से इसे लागू करने का एलान कर रखा है।

बता दें कि हाल के दिनों में बीजेपी के साथ नीतीश कुमार की नजदीकियां बढ़ी हैं। नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति उम्मीदवार के मसले पर भी महागठबंधन और विपक्ष की राय से अलग हटकर एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन का एलान किया है। जबकि लालू यादव ने विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार का समर्थन किया है। मीरा कुमार को बिहार की बेटी बताकर लालू यादव ने नीतीश कुमार से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी लेकिन नीतीश कुमार ने दावत-ए-इफ्तार में लालू के घर पहुंचकर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया था।

इसके बाद से दोनों दलों के बीच तनातनी की खबरें आने लगीं। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के एक ट्वीट ने भी खलबली मचा दी थी जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार के बारे में दो विचाराधारा पर चलने की बात कही थी। जेडीयू ने इस पर कड़ा एतराज जताया था। हालांकि, लालू यादव ने बीच-बचाव करते हुए महगठबंधन की एकता को फिर से अटूट करार दिया। लेकिन कांग्रेस और जेडीयू के बीच तनातनी बरकरार है। कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने नीतीश कुमार के रुख की आलोचना की है।

इस बीच बीजेपी नेताओं के अलावा एनडीए के सहयोगी दल लोजपा के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी नीतीश कुमार को ना केवल एनडीए में शामिल होने का न्योता दिया बल्कि यहां तक कह डाला कि इस कदम से बिहार और नीतीश दोनों का भला होगा। बता दें कि 2013 से पहले नीतीश कुमार की पार्टी एनडीए का ही हिस्सा थी लेकिन नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाए जाने से खफा नीतीश ने एनडीए से और बीजेपी से अपना नाता तोड़ लिया था।

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  1. आलोक रंजन
    Jun 29, 2017 at 8:16 pm
    नीतीश और भाजपा दोनो ही अवसरवादी है ये महागठबंधन की परिभाषा जानते ही नही है इसलिए नीतीश जी महागठबंधन को झठका कैसे दे सकते हे
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