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1989 में बड़ा दंगा झेल चुके भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए उधर बनी कंपनी, इधर बूचड़खाना खोलने की तैयारी

भागलपुर अति संवेदनशील माना जाता है। 1989 में भीषणतम दंगा झेल चुका है। यहां कोई भी त्योहार हो प्रशासन की सांसें रुक जाती है।

इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

गिरधारी लाल जोशी

भागलपुर बिहार का इकलौता शहर है जिसे स्मार्ट सिटी घोषित किया गया है। इसके लिए कल (शनिवार को) शाम में बड़े तामझाम के साथ भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी की लॉन्चिंग की गई। इस मौके पर बिहार के नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी भी मौजूद थे। वहां कई तरह की सुविधाओं का सपना और आइना दिखाया गया लेकिन फिलहाल यह शहर गंदगी, जाम, अराजकता, अपराध, भू-माफिया जैसे दर्द झेलने को मजबूर है। इसके अलावे शहर को एक नया दर्द देने की भी तैयारी चल रही है। मसलन, अब भागलपुर स्मार्ट सिटी तो बनेगा लेकिन वहां एक आधुनिक बूचड़खाना भी खुलने जा रहा है जिसे बिहार सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इस बूचड़खाने से 100 मैट्रिक टन मांस रोजाना भैसों को काटकर और उसे प्रोसेस (फ्रीजिंग और पैकिंग) कर दूसरे देशों को निर्यात किया जाएगा। इसके अलावा चमड़ा और हड्डियों का उपयोग कंपनी का बायो प्रोडक्ट होगा। अब यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि अगर वहां भैसें तो कटेंगी तो इसकी आड़ में दूसरे जानवर भी काटे जा सकते हैं। इसके साथ ही दूर-दूर तक बदबू से इलाके के लोग परेशान होंगे, सो अलग। इससे भी ज्यादा खतरा तरह-तरह की अफवाहें फैलने-फैलाने का है। शायद एक बात की जानकारी देना जरूरी है कि केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद भारत मांस कारोवार में अब्बल है।

दरअसल, भागलपुर अति संवेदनशील माना जाता है। 1989 में ये शहर भीषणतम दंगा झेल चुका है। यहां कोई भी त्योहार हो प्रशासन की सांसें रुक जाती है। अलीगंज मोहल्ले में एक छोटा सा बूचड़खाना है जिसे बंद करवाने के वास्ते अक्सर बवाल होता रहता है। बदबू और सड़ांध से इलाके के लोग परेशान हैं। ऊपर से एक और बूचड़खाना खोलने की चर्चा ने अभी से ही लोगों के कान खड़े कर दिए हैं। जानकार बताते हैं कि आधुनिक बूचड़खाना खोलने की योजना जोयस इंटरनेशनल फूड्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की है। इसके तीन निदेशक हैं जिनमें लि जोनिया नाम की महिला हांगकांग की रहने वाली है। दो लोग भारतीय हैं। इस बूचड़खाने की लागत करीब 70 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके लिए गोराडीह ब्लॉक के विनयकपुर पिथना में तकरीबन 10 एकड़ जमीन कंपनी ने खरीद ली है।और जमीन खरीदने की जुगत जारी है।

Indore, Madhya Pradesh, Smart city, bjp government, shivraj singh chauhan किसी भी स्मार्ट सिटी में चमकती सड़कें और पर्यावरण के अनुकूल विकास अपेक्षित है। (Express Photo)

एक दिलचस्प बात यह भी कि बिहार सरकार ने इस मीट प्रोसेसिंग प्लांट के लिए करीब 29 एकड़ जमीन पर लगने वाला स्टाम्प ड्यूटी एवम् निबंधन शुल्क माफ कर दिया है। इकाई के निवेश प्रस्ताव पर स्टेट इंडस्ट्रियल प्रमोशन बोर्ड (एसआईपीबी) की सहमति पहले ही ले ली गई है। इतना ही नहीं इस प्रोजेक्ट को 5 करोड़ रुपए बतौर सब्सिडी भी बिहार सरकार देगी। ऐसा 2011 में बनी औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत बिहार सरकार ने किया है। 14 जुलाई 2015 को उद्योग विभाग के प्रधान सचिव त्रिपुरारी शरण के दस्तखत से बाकायदा इसका पत्र निदेशक खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय को जारी किया गया है जिसकी कॉपी भागलपुर के जिला पदाधिकारी को भी भेजी गई है।

कंपनी ने जमीन खरीदने में स्टाम्प ड्यूटी की छूट का पूरा फायदा लिया है। यह जानकारी निबंधन कार्यालय के सूत्रों से मिली है। कंपनी बिहार और दूसरे राज्यों मे अपने दलाल और एजेंटों के जरिए भैसों की खरीद करेगी। उधर, गौराडिह ब्लॉक भी विस्तारित भागलपुर नगर निगम का इलाका बनने की प्रस्तावना में है। स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद भागलपुर शहर के आसपास के के 111 गांवों को जोड़कर शहर को विकसित करने की वृहत योजना है। इस क्रम में भागलपुर नगर निगम का दायरा बढ़ेगा और यहां 51 वार्ड की  जगह अब 75 वार्ड होंगे।

भागलपुर के स्मार्ट सिटी बनने की घोषणा के बाद लोगों को लगा था कि इस शहर में साफ-सफाई, कचड़ा प्रबंधन, जल-मल निकासी, परिवहन व्यवस्था अच्छी होगी, सड़कें चौड़ी और जामरहित होंगी, पर्यावरण के हिसाब से शहर सुंदर और आकर्षक बनेगा, हरियाली फैलेगी और अन्य सुविधाएं मिलेंगी लेकिन मीट प्रोसेसिंग प्लांट बनने की बात से लोगों को अचरज हो रहा है। अब अंदर ही अंदर इस प्लांट की खिलाफत शुरू हो गयी है। कहीं ऐसा न हो कि लोग लामबंद होकर कोई बड़ा आंदोलन खड़ा कर दें, जो जिला प्रशासन के लिए सिरदर्द बन जायगा। मिसाल के तौर पर भागलपुर-बांका सीमा पर बना शिवशंकर केमिकल इंडस्ट्रीज कारखाना है। यह कारखाना 1985 के आसपास बना था जो देशी शराब बनाने का केमिकल (स्प्रिट) बनाता था। इस कंपनी के खिलाफ लगातार आंदोलन चलता रहा है। फैक्ट्री का कचरा बहाने से गंगा नदी में मछलियां मरीं और खेतों की फसलें जली। आखिरकार प्रदूषण और दूसरे कारणों से बिहार सरकार ने कारखाने को बंद करने का फरमान जारी किया। कई सालों से यह कारखाना बंद है और बैंकों के कर्ज फंसे पड़े है। अब तो खैर बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हो चुकी है। लिहाजा, फैक्ट्री को तो दीमक ही चाट लेगी। बहरहाल, एक बात तो पक्की है कि बिहार सरकार से इतनी बड़ी छूट हासिल कर लेने का मतलब है कि पर्दे के पीछे कोई न कोई बड़ा खिलाड़ी है।

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