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भागलपुर: मूर्ति विसर्जन के दौरान युवक ने की ऐसी चूक, घायल हो गए दो दर्जन लोग, मची भगदड़ और अफरातफरी

विसर्जन जुलूस में सड़कों पर रुक-रुक कर साथ चल रहे अखाड़े के कलाबाजी का प्रदर्शन करने वाले पारंपरिक हथियारों के करतब भी दिखा रहे थे।

सभी घायलों को जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में दाखिल कराया गया है। सभी की हालत ठीक बताई गई है।

शनिवार (21 अक्टूबर) की रात से शुरू हुआ काली प्रतिमाओं का विसर्जन रविवार (22 अक्टूबर) देर शाम तक चलता रहा। इस दौरान भागलपुर के एसएम कॉलेज सड़क पर तलवारबाजी का करतब दिखा रहे युवक की चूक से करीब दो दर्जन लोग जख्मी हो गए। नतीजन वहां भगदड़ और अफरातफरी मच गई। हालांकि, पुलिस की चौकसी से माहौल फौरन काबू में कर लिया गया। विसर्जन जुलूस में आगे-पीछे के सवाल पर छिटपुट झड़पें भी हुई। मिलाजुला कर शांतिपूर्ण तरीके से कतारबद्ध हो विसर्जन जुलूस काफिला गंगा घाट की ओर बढ़ता रहा और सिलसिलेवार मूर्तियां गंगा में प्रवाहित होती रहीं। सभी घायलों को जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहां सभी की हालत ठीक बताई गई है।

चार रोज हुई बारिश की वजह से मौसम खुशनुमा जरूर हुआ। मगर इतवार की सुबह से मौसम गर्म हो गया। साथ ही शहर की बिजली विसर्जन की वजह से शनिवार रात 9 बजे से ही काट दी गई। नतीजतन गर्मी का एहसास बिजली सप्लाई कंपनी ने और करा दिया। मुहर्रम के दौरान ऊंचे ताजिए और जर्जर तार टूट कर गिर जाने से ज़िले में छह जनों की झुलस कर मौत हो गई थी। इसी वजह से प्रशासन ने बिजली आपूर्ति बंद रखने का खास ध्यान रखा है। मूर्ति विसर्जन में जिला प्रशासन ने खास व्यवस्था की थी। सौहार्दपूर्ण माहौल कायम रखने और जुलूस में किसी तरह की गड़बड़ी न हो इसके लिए प्रशासन ने शांति समिति से सहयोग करने को कहा था। काली पूजा समिति के प्रकाश चंद्र गुप्ता करतब दिखाने के दौरान हुई घटना से दुखी है। यों डीएम आदेश तितमारे और एसएसपी मनोज कुमार खुद भी जुलूस का मुआयना करते दिखे।

शांतिपूर्ण तरीके से कतारबद्ध हो विसर्जन जुलूस काफिला गंगा घाट की ओर बढ़ता रहा और सिलसिलेवार मूर्तियां गंगा में प्रवाहित होती रहीं। (फोटो- गिरधारी लाल जोशी)विसर्जन जुलूस में सड़कों पर रुक-रुक कर साथ चल रहे अखाड़े के कलाबाजी का प्रदर्शन करने वाले पारंपरिक हथियारों के करतब भी दिखा रहे थे। तो कोई फिल्मी धुन पर डांस करता नजर आया। फूहड़ गाने तो नहीं बज रहे थे। मगर धार्मिक नारे लोग लगा रहे थे मसलन “एक ही नाम एक ही नारा जयश्री राम।” “गो हत्या बंद करो।” कुछ लोग यह कहते भी दिखे, “हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा।” भागलपुर संवेदनशील जिला होने की वजह से हुड़दंगियों पर नजर रखने के वास्ते हरेक प्रतिमाओं के साथ मजिस्ट्रेट और पुलिस बल के जवान चल रहे थे और चौकस थे। चौक चौराहों पर रैफ के जवान अपने वज्र वाहन के साथ मुस्तैद थे।

भागलपुर में प्रतिमा विसर्जन का एक अलग अंदाज है। कुछ प्रतिमाओं को छोड़कर करीब 80 प्रतिमाओं का जमावड़ा स्टेशन चौक पर लगता है। फिर वहां से कतारबद्ध हो शहर के मुख्य रास्तों से गुजरते हुए गंगा घाट बाजे गाजे के साथ पहुंचते हैं और बारी-बारी से मूतियों को प्रवाहित करते हैं। बिहार राज्य प्रदूषण बोर्ड ने बाकायदा सेमिनार कर मूतियों के गंगा नदी में प्रवाहित करने की मनाही की अपील की थी। ऐसा गंगा नदी को प्रदूषित होने से रोकना ही बोर्ड का मकसद था। मगर किसी ने एक नहीं सुनी।

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