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लालू से अलग होने के बाद एक्‍शन मोड में नीतीश, रेत माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

नीतीश कुमार ने दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद ही सूबे में रेत माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की है।
छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने राज्य में रेत माफियाओं के खिलाफ अभियान चला रखा है।

महागठबंधन छोड़ भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महज हड़ताल घंटे में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। नीतीश कुमार ने दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद ही सूबे में रेत माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की है। अबतक करीब 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पकड़े गए सभी आरोपियों के रेत व्यापार से जुड़े होने की बात कही जा रही है। गौरतलब है कि राज्य में सिर्फ रेत से हजारों करोड़ रुपए का व्यापार किया जाता है। मामले में सूत्रों का कहना है कि गैरकानूनी रेत खान भी नीतीश और लालू के मतभेद की मुख्य वजहों मे से एक थी। खबर के अनुसार मामले में पकड़े गए कुछ आरोपियों के लालू की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से जुड़े होने की भी खबरें हैं। हालांकि मीडिया गलियारों में अभी भी सवाल बना हुआ है कि पुलिस रेत माफिया के मुख्य सरदार को कब अपनी गिरफ्त में लेगी। हालांकि अदालत के आदेश के बाद डिप्टी जनरल ऑफ पुलिस शालिन ने रेत माफियाओं के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसमें कुछ आरजेडी नेताओं के साथ, अरुण यादव, राधाचरण और दूसरे लीडर सुभाष यादव के खिलाफ भी कार्रवाई की बात सामने आ रही है। सभी नेता लालू के करीब बताए जाते हैं।

दूसरी तरफ पुलिस ने तीन दिनों की गहन पूछताछ और जांच पड़ताल के बाद पटना हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में पुलिस ने कहा, ‘इलाके जहां 25 से ज्यादा बार रेत माफियाओं ने रेत निकाला उसकी अनुमति खुद सरकार ने दी थी। इस दौरान किसी भी प्रर्यावरण नियम का पालन नहीं किया गया। साल 2015 से 2016 के बीच किसी ने भी खान से रेत निकालने के लिए राज्य पर्यावरण से अनुमति नहीं ली।’ रिपोर्ट में आगे कहा गया कि क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी, माइनिंग अधिकारी, क्षेत्रीय प्रशासन इसमें सहअपराधी बना रहा। सभी ने कथित तौर पर गैरकानूनी रेत निकासी पर अपनी आंखें बंद कर लीं। रेत से भरकर वाहन लगातार प्रशासन की आंख के सामने यहां से जाते रहे। यहां रेत की नापतोल के लिए कोई मशीन भी नहीं लगाई गई थी। इसलिए बताना मुश्किल है कि कितनी मात्रा में रेत निकाला गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि रेत निकासी के दौरान मजदूरों को सुरक्षा किट तक मुहैया नहीं कराई गई थी।

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