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16 साल बाद भागलपुर दौरे पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, तब की थी महिला आरक्षण की वकालत, मंदार पर्वत से सटे गुरुधाम से है पुराना लगाव

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को विक्रमशिला महाविहार लाने की कोशिश काफी दिनों से चल रही थी।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी। PTI Photo by Vijay Verma

प्रणब मुखर्जी 16 साल बाद आज (2 अप्रैल) की शाम 4 बजकर 40 मिनट पर भागलपुर आ रहे हैं। भागलपुर से उनका लगाव पुराना रहा है। तब और अब के उनके कार्यक्रम में बड़ा फर्क यह है कि अब वो भारत के राष्ट्रपति हैं। वे 1999 दिसंबर में निखिल बंग साहित्य सम्मेलन के 72वें अधिवेशन की अध्यक्षता करने भागलपुर के नवयुग विद्यालय आए थे। भागलपुर के लोग उन्हें 16 साल बाद फिर से देखने सुनने को उतावले हैं। उस वक्त प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के बड़े नेता और सांसद थे। उनको उसी साल सर्वश्रेष्ठ सांसद पुरस्कार से नवाजा गया था। इत्तफाक से इस संवाददाता ने नवयुग विद्यालय के गार्डन में उनसे अंतरंग बातचीत की थी। वे महिला आरक्षण के पक्षधर रहे हैं। उनकी उस वक्त पूरी कोशिश थी कि महिला आरक्षण बिल सदन में पेश हो और कांग्रेस उसका समर्थन कर पास कराए। मगर ऐसा नहीं हो सका और न ही वाजपेयी सरकार में हो सका। जब कांग्रेस दोबारा सत्ता में लौटी और 2014 अप्रैल तक केंद्र में रही लेकिन महिला आरक्षण बिल संसद से पास ना हुआ। इस दौरान साल 2012 में प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बन गए।

मई 2014 से एनडीए की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में सरकार है। पर महिला आरक्षण बिल पर कोई चर्चा नहीं है। गोमांस, रोमियो दस्ता, जैसे मुद्दे के अलावे नोटबंदी भी काफी चर्चा में रहा। खैर जो हो राजनैतिक दल टिकट बंटवारे में भी महिलाओं को टिकट देने में 33 फीसदी का मापदंड भूल जाते हैं। मसलन, पार्टियां महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी करती हैं। उस वक्त उनसे और मुद्दे पर भी बातचीत हुई थी। उन्होंने बेबाक आधे घंटे बात की थी। इस दौरान बंगाली समुदाय के लोग ऑटोग्राफ और फोटोग्राफ के लिए बीच-बीच में उन्हें घेरते रहे।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को विक्रमशिला महाविहार लाने की कोशिश काफी दिनों से चल रही थी। पहले बतौर सांसद सैयद शाहनवाज हुसैन ने किया, फिर गोड्डा से सांसद निशिकांत दूबे लगे रहे। निशिकांत दूबे विक्रमशिला से सटे गांव भवानीपुर के रहनेवाले हैं। पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति का कार्यक्रम बन कर रद्द हो गया था। उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। आखिर अबकी सफलता मिल ही गई। वो शनिवार शाम को ही रांची पहुंचे हैं। रविवार को देवघर में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शाम 4 बजकर 40 मिनट पर वायु सेना के हेलीकॉप्टर से कहलगांव एनटीपीसी के हैलीपैड पर उतरेंगे। रात्रि विश्राम वहां के मानसरोवर रेस्ट हाउस में होगा। सोमवार को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर विक्रमशिला पहुंचेंगे। वहां म्यूजियम और विक्रमशिला महाविहार का भ्रमण करेंगे। राष्ट्रपति एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 12 बजकर 20 मिनट तक वहां रुकने के बाद वायुसेना के हेलीकॉप्टर से ही बौसी गुरुधाम के लिए प्रस्थान कर जाएंगे।

मंदार पर्वत से सटे गुरुधाम को योग प्रवर्तक श्यामाचरण लाहिड़ी के अनन्य शिष्य आचार्य भूपेन्द्रनाथ सान्याल ने स्थापित किया था। गुरुधाम से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के परिवार का गहरा लगाव रहा है। यहां आधे घंटे तक रुकने का कार्यक्रम प्रशासन को मिला है। विक्रमशिला में बिहार के राज्यपाल और मंत्री भी राष्ट्रपति की अगुवाई करेंगे। प्रशासन ने उनकी हिफाजत का पूरा इंतजाम किया है। डीएम और एसएसपी बताते हैं कि तीन स्तरीय सुरक्षा का बंदोबस्त किया गया है।

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