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आप विधायक जितेंद्र सिंह तोमर पहुंचे पटना हाईकोर्ट, एलएलबी डिग्री रद्द करने के खिलाफ दी याचिका

आप विधायक जितेंद्र सिंह तोमर की कथित एलएलबी की डिग्री के सिलसिले में दायर मुकदमे में अग्रिम जमानत की सुनवाई 8 अगस्त को होगी

जितेंद्र सिंह तोमर को फर्जी डिग्री के मामले में मजिस्ट्रेट की एक अदालत ने चार दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया था। (फाइल फ़ोटो पीटीआई)

दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री और आप विधायक जितेंद्र सिंह तोमर की कथित एलएलबी की डिग्री के सिलसिले में दायर मुकदमे में अग्रिम जमानत की सुनवाई 8 अगस्त को होगी। भागलपुर कोर्ट के चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमुद रंजन सिंह के इजलास में तोमर के वकील कामेश्वर पांडे ने अर्जी दाखिल की है। मालूम रहे कि थाना तातारपुर में बीती 22 जुलाई को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मोहन मिश्र ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इससे पहले बीते हफ्ते तोमर ने डिग्री रद्द करने के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। जिसपर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की पीठ ने विश्वविद्यालय से चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। विश्वविद्यालय का कानूनी विभाग जवाब तैयार कर रहा है। जानकार बताते हैं कि पटना हाईकोर्ट को तय वक्त पर विश्वविद्यालय अपना जवाब दाखिल कर देगा।

अग्रिम जमानत की अर्जी यहां के कोर्ट में दायर कर बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि तोमर की डिग्री रद्द करने से पहले उनकी बात भी विश्वविद्यालय को सुननी चाहिए थी। यों जिन बातों का जिक्र विश्वविद्यालय की लिखवाई एफआईआर में है उन्हीं आरोपों के तहत दिल्ली की साकेत अदालत में भी मामला चल रहा है। जिसमें जितेंद्र सिंह तोमर समेत विश्वविद्यालय के 18 अधिकारी और कर्मचारी भी नामजद हैं। वहां तोमर जमानत पर हैं। एक जैसे आरोप में दो जगह मुकदमा नहीं किया जा सकता है। वैसे 22 जुलाई को भागलपुर में की गई प्राथमिकी रद्द करने के वास्ते तोमर की तरफ से पटना उच्च न्यायालय में क्रिमिनल रिट दायर की गई है।

वरीय लोक अभियोजक सत्य नारायण प्रसाद ने तोमर की अग्रिम जमानत का कड़े शब्दों में विरोध किया और अदालत को बताया कि तोमर ने फर्जी कागजात के आधार पर मुंगेर के वीएनएस इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में दाखिला लिया था। यह बताना जरूरी है कि तोमर की एलएलबी डिग्री रद्द करने का फैसला सीनेट ने 20 मार्च को ही ले लिया था। यों दिल्ली पुलिस भी सीनेट की बैठक के तुरंत बाद आरोप पत्र दिल्ली के साकेत कोर्ट में दायर कर चुकी है।

दिल्ली पुलिस टीम के मुताबिक दायर आरोप पत्र हजारों पन्ने में है। मोटी चार्जशीट होने की वजह बताते हैं कि तोमर ने इंटर से लेकर कानून की डिग्री हासिल करने के तमाम रिकार्ड और विश्वविद्यालयों के 1994 से 1998 सत्र के टेबुलेशन रजिस्टर, अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद का स्नातक विज्ञान का और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी का माइग्रेशन रिकार्ड रजिस्टर बगैरह जैसे जरुरी कागजात आरोप पत्र के साथ लगाए गए हैं। तोमर ने ये सभी डिग्री फर्जी तरीके से हासिल कर मुंगेर की लीगल स्टडीज में दाखिला लेते वक्त प्रस्तुत किया था। जांच में भी सभी फर्जी साबित हुई है। ऐसा पुलिस टीम ने बताया है । इतना ही नहीं उन्हें गिरफ्तार कर जब फैजाबाद और मुंगेर ले जाकर यह पूछा गया कि किस कमरे में बैठ कर उन्होंने इम्तिहान दिया था तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं था। और वे बगले झाँकने लगे थे।

भागलपुर विश्वविद्यालय की लिखवाई एफआईआर संख्या 153 / 17 में भी मोटामोटी इन्हीं सब बातों का जिक्र है। इसी वजह से भारतीय दंड विधान की दफा 419, 420, 467, 468, 471, और 120 बी में मामला दर्ज हुआ। ये धाराएं फरेब, धोखाधड़ी, साजिश जैसी संगीन अपराध की है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के आरोपी कर्मचारी और अधिकारी दिल्ली के साकेत कोर्ट में पेश हो चुके हैं और जमानत पर हैं। इस तथकथित एलएलबी की डिग्री की वजह से आप विधायक जितेंद्र सिंह तोमर को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और जेल जाना पड़ा था। अब इन्हें कानूनी दांव पेंच में अदालत के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

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