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CM नीतीश के गृह जिले में बना जल योजना का टावर, पानी चढ़ाते ही ध्वस्त, सरकार की हो रही किरकिरी

इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले में ही उनके द्वारा चलायी जा रही योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी। नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड में नल जल योजना के अंतर्गत बनाई गयी पानी की टंकी में जैसे ही पानी भरना शुरू किया गया तभी टावर अचानक टूट कर नीचे गिर गया।

BJP, JDU, NITISH KUMARबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। ( फोटो सोर्स – PTI)

बिहार में नल जल योजना में भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले में ही उनके द्वारा चलायी जा रही योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी। नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड में नल जल योजना के अंतर्गत बनाई गयी पानी की टंकी में जैसे ही पानी भरना शुरू किया गया तभी टावर अचानक टूट कर नीचे गिर गया। नवनिर्मित पानी का टावर गिरने पर नीतीश सरकर की जमकर किरकिरी हो रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पानी टंकी का निर्माण काफी दिनों से हो रहा था। लेकिन इसके टावर में एक भी नट बोल्ट नहीं लगाया गया था सिर्फ इलेक्ट्रिक वेल्डिंग किया गया था। इसकी वजह से जैसे ही टंकी में पानी भरने का काम शुरू हुआ तो टावर धड़ाम से नीचे जा गिरा।  प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इस पानी टावर के निर्माण में करीब 18 लाख तक खर्च किया गया था लेकिन इसके बावजूद यह टिक ना सका।

पिछले साल हुए बिहार विधानसभा के चुनावों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस योजना को विकास कार्यक्रम के तौर पर देख रहे थे। हालाँकि बिहार की विपक्षी पार्टियाँ शुरू से ही इस योजना को भ्रष्टाचार का पर्याय बता रही है। बिहार में विपक्षी दल के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को ट्विटर के जरिए नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा। तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार जनहित के मुद्दों से भागना चाहती है क्योंकि इस भ्रष्ट व निकम्मी सरकार के पास जनता के सवालों का कोई जवाब ही नहीं है।  

आने वाले महीनों में बिहार सरकार अपना बजट पेश करेगी। जिसके लिए एक बजट सत्र भी बुलाया गया है लेकिन उसे अन्य साल की तुलना में काफी छोटा रखा गया है। इसपर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि अगर कोरोना काल में चुनाव कराए जा सकते हैं तो सरकार सदन का संचालन करने से बच क्यों रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि असलियत में सरकार जनता के सवालों से भागना चाहती है। इसके अलावा तेजस्वी ने यह भी पूछा है कि अगर कोरोना में स्कूल खोले जा सकते हैं तो सदन भी जरुर चलने चाहिए। अगर सदन नहीं चलेगी तो विधायक जनता के मुद्दे कहाँ उठाएंगे और नए विधायक कैसे सीखेंगे ?

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