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LJP पर “चाचा का कब्जा”, बोले चिराग- मेरे पास मां हैं; पारस ने कहा- कार्यकारिणी में भाड़े की भीड़ थी

चिराग बोले- कुछ माह पहले पिता को खोया। जिन परिजन से उम्मीद थी, वे भी साथ छोड़ कर चले गए। अब मुझे बिहार की सभी माताओं-बहनों और बुजुर्गों का आशीर्वाद चाहिए। पर सबसे अधिक एक आशीर्वाद (मां का) , जो ढाल की तरह मेरे साथ बना रहा। विपरीत स्थितियों के बाद भी चुनाव में हम डटे रहे।

Edited By अभिषेक गुप्ता पटना/नई दिल्ली | Updated: June 21, 2021 11:33 AM
पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान के बीच LJP के नेतृत्व को लेकर टकराव है। (फोटोः पीटीआई)

लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में तोड़फोड़ कर चाचा पशुपति पारस ने सांसदों और पद भले ही हासिल कर लिए हों, पर भतीजे चिराग पासवान ने हार नहीं मानी है। सियासी से अधिक नाटकीय हो चुकी पार्टी के लिए पारिवारिक जंग के बीच रामविलास के बेटे ने कहा है कि उनके पास मां है।

दरअसल, रविवार (20 जून, 2021) को नई दिल्ली में लोजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें सांसद चिराग ने पिता की जयंती पर पांच जुलाई से बिहार के हाजीपुर से आशीर्वाद यात्रा शुरू करने का ऐलान किया। मीटिंग में चिराग के नेतृत्व पर मुहर लगी और पार्टी के संविधान के खिलाफ काम करने के लिए पारस के खेमे पर निशाना साधा गया। साथ ही पीठ में ‘छुरा’ घोंपने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, “पापा की बनाई इस पार्टी और अपने परिवार को साथ रखने के लिए किए मैंने प्रयास किया, लेकिन असफल रहा। पार्टी मां के समान है और मां के साथ धोखा नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। पार्टी में आस्था रखने वाले लोगों का मैं धन्यवाद देता हूं। एक पुराना पत्र साझा करता हूं।”

कार्यकारिणी के बाद चिराग ने रीना पासवान के पैर छू आशीर्वाद लिया और कहा, “मेरे पास मां है।” उन्होंने पत्रकारों से कहा- कुछ माह पहले पिता को खोया। जिन परिजन से उम्मीद थी, वे भी साथ छोड़ कर चले गए। अब मुझे बिहार की सभी माताओं-बहनों और बुजुर्गों का आशीर्वाद चाहिए। पर सबसे अधिक एक आशीर्वाद (मां का) , जो ढाल की तरह मेरे साथ बना रहा। विपरीत स्थितियों के बाद भी चुनाव में हम डटे रहे। नई ऊंचाइयों को छुआ। महाभारत जैसी लड़ाई आ गई है, जो दुखी करता है। मेरी ढाल, मेरी मां हैं और इन्हीं के आशीर्वाद के साथ मैं इस यात्रा का ऐलान करता हूं।

उधर, पलटवार करते हुए पारस ने चिराग की बैठक को ‘‘भाड़े पर जुटायी गई भीड़’ करार दिया। दावा किया कि इसकी कोई वैधता नहीं है। उन्होंने प्रेस से कहा कि निर्वाचन आयोग इसका फैसला करेगा कि लोजपा में उनके नेतृत्व वाला या चिराग के नेतृत्व वाला समूह असली लोजपा है।

बता दें कि चिराग के नेतृत्व में हुई बैठक में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से रामविलास पासवान के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न का अनुरोध किया गया। चिराग ने कहा है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 90 प्रतिशत से ज्यादा सदस्य बैठक में मौजूद थे। बिहार के लोकप्रिय दलित नेता रामविलास पासवान का पिछले साल निधन हो गया था।

हाजीपुर से यात्रा शुरू करने का फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि रामविलास पासवान कई बार यहां से लोकसभा के लिए चुने गए और अब सदन में इस सीट का प्रतिनिधित्व पारस कर रहे हैं। चिराग पासवान ने कहा कि हाजीपुर उनके पिता की कर्मभूमि थी। यह यात्रा बिहार के प्रत्येक जिले से होकर गुजरेगी और इसके बाद पार्टी की राष्ट्रीय परिषद आयोजित होगी तथा पटना में एक जनसभा की जाएगी। यात्रा करीब दो महीने में संपन्न होगी।

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