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बिहार के शेल्टर होम फिर सवालों के घेरे में, लड़कियां बोलीं- दम घोंटने वाला है माहौल, जेल जैसा लगता है

राजधानी पटना के नजदीक एक एनजीओ की तरफ से संचालित शेल्टर होम से भागीं लड़कियों बाल कल्याण समिति से बातचीत में चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने कहा कि वे महिला गार्ड की निगरानी में रहने की बजाय अपने परिवार के साथ रहना पसंद करेंगी।

Author Updated: February 27, 2019 7:26 AM
प्रतीकात्मक फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस

बिहार के एक और शेल्टर होम में लड़कियों को परेशान करने का मामला सामने आया है। राजधानी पटना के नजदीक एक एनजीओ की तरफ से संचालित शेल्टर होम से भागीं लड़कियों बाल कल्याण समिति से बातचीत में चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने कहा, ‘वहां का माहौल दम घोंटने वाला है। बहुत ज्यादा पाबंदियां हैं।’ NGO से भागी सात में से पांच लड़कियां यूपी और बिहार की हैं। उन्होंने कहा कि वे महिला गार्ड की निगरानी में रहने की बजाय अपने परिवार के साथ रहना पसंद करेंगी। लड़कियों ने कहा, ‘वहां उन्हें मोबाइल फोन तक इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी। हम आम लोगों की तरह जिंदगी जीना चाहते हैं, सबकी तरह दशहरे-होली पर मिठाई खाना और नए कपड़े पहनना चाहते हैं। हमें शेल्टर होम जेल जैसा लगता है।’

टिकट खरीदने तक के नहीं थे पैसेः लड़कियों ने बताया कि शेल्टर होम से भागकर जब वे रेलवे स्टेशन पहुंचीं तो उनके पास टिकट खरीदने के पैसे तक नहीं थे। अगले दिन रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर पैदल चलकर वे गांव पहुंचीं। गांव पहुंची लड़कियों में से एक के पिता ने स्थानीय पुलिस को उनके आने की सूचना दी। देर शाम पुलिस की एक टीम पहुंची और उन्हें वापस ले गई। अगले दिन 24 फरवरी को उन्हें पटना के एक शेल्टर होम में वापस भेज दिया गया और जिला बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। बाद में लड़कियों की मेडिकल जांच के लिए उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) ले जाया गया।

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डीजीपी ने बनाई जांच टीमः इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने बताया कि लड़कियों के शेल्टर होम से गायब हो जाने के बाद एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी। शेल्टर होम से भागी 7 में से 6 लड़कियों को ढूंढ लिया गया। हमारी टीम बची हुई भागी लड़की की तलाश कर रही है। उन्होंने बताया कि शेल्टर होम के आसपास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। डीजीपी ने बताया कि हमारी जांच समाप्त नहीं हुई है। समाज कल्याण विभाग ही अब इस बात पर विचार करेगा कि लड़कियों को कहां रखा जाएगा।

बता दें पिछले साल 30 मई को 34 लड़कियों को मुजफ्फरपुर के एक शेल्टर होम से रेस्क्यू किया गया था। जहां पर आरोप के मुताबिक इन लड़कियों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। यही नहीं उनके खाने-पीने और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा था।

पोक्सो अदालत में दर्ज कराए बयानः मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में प्रताड़ना के खिलाफ सीबीआई ने 32 लड़कियों के बयान पोक्सो अदालत में दर्ज कराए थे। बता दें मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में बिहार सरकार मंत्री मंजू वर्मा के पति ब्रजेश ठाकुर और एक दर्जन से ज्यादा आरोपी शामिल हैं। सीबीआई इस समय 17 शेल्टर होम मामलों की जांच कर रही है। जो टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा सोशल ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दायर किए गए हैं। TISS ने पिछले अप्रैल में बिहार सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। पहला मामला, मुजफ्फरपुर का है, जो पिछले साल मई में दर्ज किया गया था।

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