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कोरोना काल में बिहार चुनाव की दस्तक के बीच सियासी घमासान

वाकई लोकतंत्र की खुली लूट बिहार में देखी जा सकती है। वैसे यह लूट नई नहीं है। यह तो आपको याद ही होगा कि 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू महागठबंधन का अहम हिस्सा थी।

गुरुवार को पटना की सड़कों पर राजद नेता व बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने साइकिल रैली निकाली है। पेट्रोल-डीजल के कीमतों में इजाफे का विरोध जताया है। तेल की कीमतें बढ़ने से मंहगाई बढ़ेगी।

बिहार चुनाव के नजदीक आते ही हरेक दल एक दूसरे को घेरने का सियासी खेल शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर भी कांग्रेस-राजद एनडीए पर हमला बोल रही है। तो एनडीए 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी राज में लगाया आपातकाल को लेकर हमला कर रही है। इत्तफाक से कल 25 जून था। मसलन कोरोना के बीच सियासत गर्म है।

गुरुवार को पटना की सड़कों पर राजद नेता व बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने साइकिल रैली निकाली है। पेट्रोल-डीजल के कीमतों में इजाफे का विरोध जताया है। तेल की कीमतें बढ़ने से मंहगाई बढ़ेगी। महामारी से जूझ रही जनता को अब मंहगाई की मार भी झेलनी पड़ेगी। तेजस्वी कहते है कि यह जनता के साथ क्रूर मजाक है। डीजल का दाम पेट्रोल से ज्यादा यह इतिहास में पहली दफा हुआ है।

इधर कांग्रेस ने ट्यूट कर कहा है कि जब कच्चे तेल के दाम उच्च स्तर पर थे, तब कांग्रेस सरकार कम कीमत पर जनता को पेट्रोल-डीजल मुहैया करवा रही थी। आज कच्चे तेल के दाम न्यूनतम स्तर पर है, फिर भी भाजपा सरकार लगातार पेट्रोल -डीजल की कीमतें बढाकर जनता को ठगने का काम कर रही है। साथ में एक तुलनात्मक चार्ट भी दिया है। जो 2014 यूपीए और 2020 एनडीए सरकार में तेल के दामों का फर्क बता रहा है। पेट्रोल 2014 में 71 रुपए 41 पैसे और अभी 79 रुपए 76 पैसे , डीजल पहले 55 रुपए 49 पैसे और अब 79 रुपए 88 पैसे दर्शाया है। हालांकि यह चार्ट दो रोज पुराना है। दामों में और इजाफा हो गया है।

वही कोई डा. अरविंद मायाराम ने ट्यूट कर लिखा है कि पेट्रोल 80 रुपए, ठंडी वियर 80 रुपए बोतल। मर्जी आपकी झूम लो या घूम लो। यह संदेश सरकार पर व्यंग है या मजाक। पता नहीं । इसका फैसला पाठक करें।

लेकिन यह सच है कि कोरोना काल में अवसर ढूंढने की जिंदा मिसाल जरूर है। सियासत का अपना पैमाना है। लोग सरकार गिरा रहे है बना रहे है। बिहार में राजद के पांच एमएलसी तोड़ वाहवाही लूटी जा रही है। राबड़ी देवी की नेता विपक्ष की विधान परिषद में कुर्सी खतरे में बताई जा रही है। बिहार के भजपा नेता व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे राजद की इस टूट को ट्रेलर बता रहे है। कहते है फ़िल्म अभी बाकी है।

वाकई लोकतंत्र की खुली लूट बिहार में देखी जा सकती है। वैसे यह लूट नई नहीं है। यह तो आपको याद ही होगा कि 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू महागठबंधन का अहम हिस्सा थी। जनता ने भारी बहुमत देकर महागठबंधन को जिताया। यह मत भाजपा के खिलाफ था। राजद के सबसे ज्यादा विधायक होने के बावजूद लालू प्रसाद ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। यह उनकी उदारता-मजबूरी जो कहे। मगर ऐसा हुआ।

पर नीतीश कुमार ने ” कैसा सिला दिया मेरे प्यार का- ।” और भाजपा से मिल अपनी सरकार बना ली। यह बात तेजस्वी भी कई दफा दोहरा चुके है। और सर्वविदित है। कहते है युद्ध और राजनीति में सब जायज है। भाजपा लगातार राजद पर पारिवारिक व राजनैतिक हमले करने से नहीं चूक रही है। नीतीश कुमार पर राजद ने कोरोना काल के 84 दिनों तक घरबंदी का आरोप लगाया है।

लेकिन नीतीश कुमार की सरकार ने कोरोना की रोकथाम व बचाव के लिए कुछ काम भी बढ़िया किए है। जिसकी तारीफ भी हो रही है। एक तो पल्स पोलियो की तर्ज पर घर घर स्क्रीनिंग और दूसरा दूसरे राज्यों से अपने घर लौटे श्रमिकों के लिए प्रखंडों में बनाए क्वारंटाइन सेंटर। इन दो इंतजामों से संक्रमण पर काफी काबू पाया जा सका। ऐसा जानकर और सरकार के स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी बताते है।

इधर तेजस्वी यादव ने पार्षदों की टूट पर कहा कि यह चुनावी मौसम है। राजनैतिक दलों में आना-जाना लगा रहता है। जाने वाले पार्षदों को उन्होंने शुभकामनाएं भी दी है। जाहिर है कोरोना का भय खत्म। और चुनावी सियासत का खेल शुरू।

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