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LJP में चाचा vs भतीजा! बोले पारस- पार्टी तोड़ी नहीं, बचाई है…JDU में नहीं जाऊंगा, पर अकेला कर रहा हूं महसूस

उन्होंने माना कि एनडीए से अलग होने की वजह से पार्टी कमजोर हुई। साथ ही जेडीयू में जाने की बात को अफवाह बताया। कहा कि वहां नहीं जाएंगे। हालांकि, नीतीश अच्छे नेता हैं। वह विकासपुरुष हैं।

LJP सांसद पशुपति पारस के पास है करोड़ो रुपए की संपत्ति (Photo-ANI)

लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में फूट के बाद पार्टी सांसद और बागियों के नेता बने पशुपति कुमार पारस ने कहा है कि वह दल में अकेला महसूस कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी तोड़ी नहीं बल्कि उसे बचाने का काम किया है। दल में कुछ असामाजिक तत्व घुस आए, जिन्होंने अंदर सेंध लगाई। हालांकि, चिराग से अनबन के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें भतीजे से कोई दिक्कत नहीं है।

दिवंगत रामविलास पासवान के छोटे भाई पारस सोमवार सुबह मीडिया के सामने आए और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बोले, “हम तीनों भाई में अटूट प्यार था। आपस में बहुत बनती थी। पर दोनों छोड़कर चले गए। मैं अकेला रह गया। काफी अकेला महसूस कर रहा हूं। पार्टी की बागडोर जिनके हाथ में गई…गलत फैसलों की वजह से बिहार में लोजपा हाशिये पर आ गई। पार्टी के 99% कार्यकर्ता, सांसद, विधायक और समर्थक सभी की इच्छा थी कि हम 2014 में NDA गठबंधन का हिस्सा बनें और इस बार के विधानसभा चुनाव में भी हिस्सा बने रहें।

उन्होंने आगे बताया, “रामविलास की मौत के बाद पार्टी बिखर रही थी। आज पार्टी के अस्तित्व को बचाने का सवाल है। हमारी पार्टी में छह सांसद हैं। यह पांच सांसदों की इच्छा थी कि दल को बचाया जाए। ऐसे में मैंने पार्टी तोड़ी नहीं, बल्कि उसे बचाया। चिराग पासवान मेरे भतीजे हैं और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी। मुझे उनसे कोई आपत्ति नहीं है।”

हाजीपुर से लोकसभा सांसद ने दावा किया, “लोजपा बिखर रही थी। कुछ असामाजिक तत्वों ने हमारी पार्टी में सेंध लगाई। उन्होंने 99% कार्यकर्ताओं के भावना की अनदेखी करके गठबंधन को तोड़ दिया।” बकौल पारस, “चिराग के साथ रहने में कोई दिक्कत या परेशानी नहीं है। हमें उनसे कोई शिकवा-शिकायत नहीं है। पर मैं एनडीए के साथ था, हूं और रहूंगा।”

उन्होंने जेडीयू में जाने की बात को अफवाह बताया। कहा कि वहां नहीं जाएंगे। हालांकि, नीतीश अच्छे नेता हैं। वह विकासपुरुष हैं। बता दें कि पारस साल 2019 में पहली बार सांसद बने थे। वह दो बार बिहार विस के सदस्य रह चुके हैं।

दरअसल, लोजपा में दरार के संकेत मिलने के बाद माना जा रहा है कि पांच सांसदों ने चिराग को संसद के निचले सदन में पार्टी के नेता के पद से हटाने और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस को इस पद पर चुनने के लिए हाथ मिलाया है। सूत्रों ने समाचार एजेंसी “पीटीआई-भाषा” को बताया कि सांसदों के समूह ने लोकसभा अध्यक्ष को अपना यह निर्णय बता दिया है। हालांकि, चिराग या असंतुष्ट खेमे की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ।

असंतुष्ट सांसदों में प्रिंस राज, चंदन सिंह, वीना देवी और महबूब अली कैसर हैं, जो चिराग के काम करने के तरीके से नाखुश हैं। साल 2020 में पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद कार्यभार संभालने वाले चिराग अब पार्टी में अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं।

करीबी सूत्रों ने जनता दल (यूनाइटेड) को इस बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पार्टी लंबे समय से लोजपा अध्यक्ष को अलग-थलग करने की कोशिश कर रही थी क्योंकि 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ जाने के चिराग के फैसले से सत्ताधारी पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा था। सूत्रों ने बताया कि नाराज लोजपा सांसदों का समूह भविष्य में जद (यू) का समर्थन कर सकता है। 

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