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बिहारः कब्रिस्तान की तरह मंदिरों की बाड़बंदी कर सेकुलर छवि को मजबूत करने की कोशिश में नीतीश कुमार, राजद बोली- ये काम नहीं करने वाला

राज्य भर में कुल 18,456 एकड़ भूमि के साथ 2,499 पंजीकृत मंदिर और मठ हैं। अब तक सरकार की तरफ से 205 मंदिरों की घेराबंदी की गई है। वहीं 94 और मंदिरों की बाड़ लगाई जा रही है।

बिहारः कब्रिस्तान की तरह मंदिरों की बाड़बंदी कर सेकुलर छवि को मजबूत करने की कोशिश में नीतीश कुमार, राजद बोली- ये काम नहीं करने वाला
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फोटो सोर्स – पीटीआई)

बिहार में नीतीश कुमार ने हाल ही में सभी सार्वजनिक मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं और उनके ट्रस्टों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। राज्य के कानून मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि इस तरह का पंजीकरण करने के मामले में बिहार पहला राज्य बन गया है। वहीं नीतीश सरकार ने कब्रिस्तान के तर्ज पर मंदिरों और मठों की भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए बाड़बंदी करने का भी फैसला किया है।

RJD ने क्या कहा:

बिहार सरकार के इस फैसले पर राज्य में प्रमुख विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुबोध कुमार मेहता ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “विकास की राजनीति के आगे किसी भी समुदाय का तुष्टिकरण, अब काम नहीं करेगा। रोजगार बहुत कम पैदा किया जा रहा है। 2,400 से अधिक मंदिरों की बाड़बंदी के विचार की जगह यह सूखा राहत देने का समय है। ये चीजें राजनीतिक सुर्खियां बटोर सकती हैं, लेकिन इसे विकास की पहल नहीं कहा जा सकता।”

भाजपा ने की तारीफ:

नीतीश सरकार के इस फैसले पर बिहार भाजपा के प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, “हम बिहार में एनडीए सरकार द्वारा मठों और मंदिरों का सर्वेक्षण और बाड़ लगाने के फैसले की सराहना करते हैं। यह गंभीर विषय है और आज हिंदू धार्मिक परिसरों की रक्षा करने की आवश्यकता है। सुरक्षा न होने के चलते कई ऐतिहासिक, प्राचीन और पारंपरिक धार्मिक केंद्रों पर अतिक्रमण, कब्जा और उसे नुकसान पहुंचाया गया। इनमें से किसी भी साइट पर भूमि विवाद को सुलझाया जाना चाहिए।”

जदयू का पक्ष:

बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद सदस्य और जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हमारी सरकार ने हमेशा सामाजिक एकता और सौहार्द के लिए काम किया है। नवंबर 2005 के बाद से नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तहत कोई बड़ी सांप्रदायिक घटना नहीं हुई है।” उन्होंने कहा कि जिस तरह हमारी सरकार ने पिछले एक दशक में लगभग 8,000 कब्रिस्तानों की घेराबंदी की, उसी तरह हम किसी भी अतिक्रमण या विवाद को रोकने के लिए मंदिरों की भी बाड़बंदी कर रहे हैं।

बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के मुताबिक बिहार के 38 जिलों में से 26 में से अब तक बाड़ लगाने के लिए 355 मंदिरों की पहचान की गई है। परिषद का कहना है कि अधिकतम बाड़ लगाने का अनुरोध गोपालगंज, नालंदा, जहानाबाद, रोहतास, गया और मधेपुरा जैसे जिलों से मिले थे।

बता दें कि बिहार सरकार ने उन सभी पंजीकृत मंदिरों का सर्वेक्षण करने का भी फैसला किया है, जहां बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति देखी जाती है। नीतीश सरकार के इस फैसले पर जदयू के सूत्रों का कहना है कि नीतीश की धर्मनिरपेक्ष साख को बनाए रखते हुए यह कदम जदयू द्वारा भाजपा के हिंदुत्व को जवाब देने का प्रयास है।

बिहार में स्थिति:

राज्य भर में कुल 18,456 एकड़ भूमि के साथ 2,499 पंजीकृत मंदिर और मठ हैं। अब तक सरकार की तरफ से 205 मंदिरों की घेराबंदी की गई है। वहीं 94 और मंदिरों की बाड़ लगाई जा रही है।

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