Bihar Politics: बिहार की राज्यसभा सीटों पर हुए चुनावों में एनडीए ने 5 सीटें जीती हैं। इसमें से एक जीत बिहार के सीएम नीतीश कुमार की भी है। बीजेपी उम्मीद कर रही है कि नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा के समापन के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देंगे। बीजेपी की उम्मीद से विपरीत जेडीयू नेता अभी समय ले रहे हैं।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार जेडीयू इस अवधि का लाभ उठाते हुए रणनीतिक दांव-पेच खेल रही है और नीतीश के उत्तराधिकारी का चुनाव करते समय उसे पूरी तरह से विश्वास में लेने पर जोर दे रही है। पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य प्रदेश या राजस्थान जैसी रणनीति नहीं अपनाना चाहती, जिसमें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने अपेक्षाकृत कम जाने-माने नेताओं को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका दिया था।
क्या कहती हैं नियमों की पेंचीदगियां
अहम बात यह है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और प्रभारी विनोद तावड़े राज्य के नेताओं से पटना में मिल रहे हैं और उनके मन की बातें जान रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 101(2) के तहत गठित समवर्ती सदस्यता निषेध नियम (1950) के अनुसार, किसी व्यक्ति को भारत के राजपत्र या राज्य के राजपत्र में अपनी चुनाव घोषणा प्रकाशित होने के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल में अपनी सीट से इस्तीफा देना होगा। ऐसा न करने पर उनकी राज्यसभा सीट रिक्त हो जाती है।
कब इस्तीफा देंगे नीतीश कुमार?
राज्य मंत्री श्रवण कुमार ने पत्रकारों से कहा कि कुमार 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने स्पष्ट किया कि 14 दिन का नियम लागू है और इसका पालन किया जाएगा। अनुमान है कि नीतीश कुमार 13 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं।
बीजेपी के एक दर्जन संभावित नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी उन्हीं की पसंद का होना चाहिए। जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “नए मुख्यमंत्री को नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाना होगा और उनकी राजनीति के तौर-तरीकों का पालन करना होगा। हम सरकार के सामाजिक गठबंधन को बिगड़ने नहीं देना चाहते। हम ऐसा नेता भी चाहते हैं जो निशांत कुमार का विश्वास जीत सके, जो अब राज्य की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हैं।”
जेडीयू नेता ने बीजेपी को दिया संदेश
जेडीयू के एक नेता ने कहा, “बिहार मध्य प्रदेश या राजस्थान नहीं है, जहां बीजेपी ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों के चयन से सबको चौंका दिया था। बिहार में समाजवादी विचारधारा की गहरी जड़ें हैं। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे एनडीए सहयोगियों को पूरी तरह से विश्वास में लेना चाहिए। बीजेपी को यह नहीं भूलना चाहिए कि हम (जेडी-यू) 85 विधायकों की पार्टी हैं, जो भाजपा के 89 विधायकों से सिर्फ चार कम हैं।”
कमजोर नहीं हुई है JDU
जेडीयू सूत्रों ने संकेत दिया कि यदि पार्टी को गठबंधन सहयोगी की भूमिका निभाने के लिए कहा जाता है, तो वह वर्तमान मंत्रिस्तरीय वितरण को पलटने पर जोर देगी और अध्यक्ष पद पर दावा करेगी। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से जेडीयू कमजोर हो जाएगी। वास्तव में वह बिहार में अधिक समय बिताएंगे। इसके अलावा, हमारे कार्यकर्ताओं के बीच निशांत कुमार की बढ़ती लोकप्रियता एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है।
इस पर बीजेपी की तरफ से कहा गया, “हम व्यक्तिगत नेताओं के बयानों पर टिप्पणी नहीं कर सकते। हमारा केंद्रीय नेतृत्व अंतिम निर्णय लेगा। विनोद तावड़े फिलहाल बातचीत के लिए यहां मौजूद हैं। हमें उम्मीद है कि एनडीए के सभी सहयोगियों की आपसी सहमति से सत्ता का हस्तांतरण सुचारू रूप से होगा।”
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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री को लेकर बड़ा बयान दिया है। चिराग ने कहा कि मैं कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करता हूं। मेरे पास केंद्र में प्रधानमंत्री द्वारा दी गई जिम्मेदारी है और उसे निभाना मेरी प्राथमिकता है। पढ़िए पूरी खबर…
