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क्या हैं बिहार में दो डिप्टी सीएम के मायने? डिबेट में एंकर ने पूछा सवाल तो भाजपा नेता जफर इस्लाम ने दिया यह जवाब

भाजपा अभी तक राज्य में सुशील कुमार मोदी या गिरिराज सिंह जैसे लोगों के नाम से जानी जाती है। ऐसे में दो नए चेहरों को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने का साफ संदेश है भाजपा भविष्य की राजनीति की तरफ देख रही है।

bihar govt, nitish kumar, CM Nitish, bjp, bjp deputy CM सैयद जफर इस्लाम भाजपा के राज्यसभा सांसद और पार्टी प्रवक्ता भी हैं। (फाइल फोटो)

बिहार में नई सरकार में दो डिप्टी सीएम होंगे। भाजपा की तरफ से तारकिशोर प्रसाद और रेणू यादव का नाम इस पद के लिए आगे बढ़ाया गया है। राज्य में भाजपा के दो उप मुख्यमंत्री होने के क्या मायने हैं? क्या भाजपा यूपी के मॉडल पर ही बिहार में बढ़ रही है?

इस सवाल के जवाब में भाजपा के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता जफर इस्लाम ने दो टूक जवाब दिया। सैयद जफर इस्लाम ने कहा कि भाजपा की बेंच स्ट्रेंथ बहुत लंबी है। उन्होंने कहा कि भाजपा में क्षमता वाले लोग बहुत हैं, पार्टी की तरफ से सबको अवसर दिया जाता है। सुशील कुमार मोदी को हटाने के सवाल पर पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि किसे कौन सा पद मिलेगा यह पार्टी की संसदीय बोर्ड में तय होता है। इस संबंध में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करता है।

उन्होंने आगे कहा कि मजबूत सरकार के लिए नए लोगों को मौका मिलता है तो यह अच्छी बात है। इस संबंध में राजनीतिक विश्लेषक आशुतोष का कहना है कि यह उत्तर प्रदेश के मॉडल जैसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा की तरफ से यह भविष्य की राजनीति को देखते हुए तय किया गया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी राज्य में नई लीडरशिप सामने लाना चाहती है। अभी तक राज्य में भाजपा सुशील कुमार मोदी या गिरिराज सिंह जैसे लोगों के नाम से जानी जाती है। ऐसे में दो नए चेहरों को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने का साफ संदेश है भाजपा भविष्य की राजनीति की तरफ देख रही है।

आशुतोष ने आगे कहा कि चूंकि भाजपा के पास अधिक विधायक हैं, ऐसे में पार्टी नीतीश कुमार को पूरी तरह से स्वतंत्र प्रभार दे देगी, ऐसा नहीं है। इस तरह दो डिप्टी सीएम होने की वजह से नीतीश कुमार को दोनों नेताओं से सलाह मशविरा करना होगा। इतना ही नहीं उन्हें साथ लेकर भी चलना पड़ेगा।

आशुतोष ने कहा कि इससे पहले सुशील कुमार मोदी और नीतीश कुमार, राम लक्ष्मण की भूमिका में अधिक रहते थे। पिछले 15 सालों में कभी दोनों के बीच किसी तरह के मतभेद की खबरें सामने नहीं आईं। यह कामयाबी नीतीश कुमार के साथ ही सुशील कुमार मोदी की भी थी। लेकिन भाजपा अब स्वतंत्र रूप से खुद को आगे बढ़ाना चाहती है। इसलिए दो उपमुख्यमंत्री का कदम उस बात का भी प्रमाण है।

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