हरियाणा के नूंह जिले के पास तावडू रोड पर एक 16 वर्षीय किशोर मिला था, जिसका बायाँ हाथ कोहनी के नीचे से कटा हुआ था और उसका काफी खून बह रहा था। आरोप है कि उसके मालिक ने उसे वहीं छोड़ दिया था। अब उस लड़के को मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपये मिलने वाले हैं।
हाल ही में, हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए किशोर को यह राहत दी और कहा, “पीड़ित बच्चे को न केवल शारीरिक चोट लगी है बल्कि उसे मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी है।”
विकलांगता के साथ जी रहा किशोर
बिहार के किशनगंज जिले में अपने गांव में 16 वर्षीय किशोर अब अपनी विकलांगता के साथ जिंदगी जी रही है और परिवार की दो-तीन बकरियों व एक गाय की देखभाल में मदद कर रहा है।
16 वर्षीय का यह लड़का छह भाई-बहनों में से एक है, जिनकी उम्र 15 से 26 साल के बीच है। उनके 48 वर्षीय के पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। पिता परेशान हैं कि मुआवजे की रकम से बमुश्किल ही आर्टिफिशियल लिम्ब (कृत्रिम अंग) का खर्च निकल पाएगा। उन्होंने फोन पर कहा, “हमें असल में इतनी रकम चाहिए जिससे हम एक भैंस खरीद सकें और हमारी नियमित कमाई हो सके।”
उन्हें यह भी नहीं पता कि 16 वर्षीय किशोर के लिए नकली हाथ कैसे मंगवाया जाए। पिता ने कहा, “पटना के एक अनाथालय के अधिकारी ने हमें बताया कि इसे बाहर से मंगवाना होगा।” हालांकि उन्हें यह जानकार अच्छा लगा कि उस नकली अंग से किशोर करीब 10 किलो वजन उठा सकेगा।
मई 2025 में घर से निकला था किशोर
किशोर मई 2025 की शुरुआत में 10 अन्य लोगों के साथ हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में सड़क बनाने के काम के लिए घर से निकला था। पिता ने कहा कि हर साल सिर्फ उनके गांव से ही 200 से 300 लोग काम के तलाश में उत्तर भारत जाते हैं।
16 साल के किशोर के लिए, घर से इतनी दूर जाने का यह पहला मौका था। एक कॉन्ट्रैक्टर ने उसे 2000 रुपये एडवांस देने की पेशकश की और वह परिवार को बिना बताए ही उसके साथ चला गया; क्योंकि वह कुछ पैसे कमाना चाहता था और उसे यह भी डर था कि शायद घरवाले उसे जाने न दें।
किशोर ने कहा, “एक दिन कंस्ट्रक्शन साइट पर मेरे शरीर पर गर्म तारकोल गिर गया। मैंने अपनी माँ को नहीं बताया क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि वह परेशान हों।” लड़के ने आगे कहा कि परिवार कुछ गड़बड़ी का एहसास हो गया था। इसलिए, एक महीने से भी कम समय में, उसके पिता और बड़े भाई उसे लेने कांगड़ा पहुँच गए।
कैसे पहुंचा हरियाणा?
27 मई 2025 को वे तीनों दिल्ली से मालदा जाने वाली फरक्का एक्सप्रेस के जनरल कोच में सवार हुए। शाम को जब ट्रेन हरियाणा के बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहुँची, तो वे खाना लेने के लिए नीचे उतरे और वह किशोर पीछे छूट गया।
अंधेरा होने पर डरे हुए 16 साल के लड़के के पास अनिल कुमार नाम का एक स्थानीय व्यक्ति आया और मदद की करने की बात कही। हालांकि मदद के नाम पर अनिल उसे अपनी डेयरी ले गया और काम पर लगा दिया। आरोप है कि विरोध करने पर उसने लड़के की पिटाई भी की और उसे परिवार से बात नहीं करने दिया।
चारा काटने वाली मशीन से कटा हाथ
दो महीने बाद 27 जुलाई की शाम को जब 16 साल का लड़का चारा काट रहा था, तो उसका बायां हाथ चारा काटने वाली मशीन में फंस गया और कोहनी के नीचे से कई छोटे-छोटे टुकड़ों में कट गया। किशोर ने बताया कि घटना के बाद वह अपने हाथ को ढूंढ रहा था। हालांकि वह उसे नहीं मिला।”
अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि अनिल ने किशोर को घर पर ही कुछ दवाएं दीं। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी सुधीर राजपाल ने लिखा, “पुलिस के डर से उसने उसे हसनपुर के पास रसूलपुर और बरोली गांवों के बीच छोड़ दिया, उसे 10,000 रुपये दिए और बाद में और पैसे देने का वादा किया।”
स्कूल टीचर ने की मदद
किशोर ने कहा कि अपनी डेयरी में दो महीने के काम के बदले अनिल ने उसे बस यही पैसे दिए थे। किशोर ने कहा, “मैं कटे हुए हाथ के साथ एक दिन और दो रात सड़कों पर घूमता रहा। एक रेहड़ी वाले ने मुझे खाना दिया। सुबह एक स्कूल टीचर ने मुझे देखा।”
रेवाड़ी के रहने वाले अरविंद ने पुलिस को बताया कि उन्होंने 29 जुलाई की सुबह 8 बजे उस 16 साल के लड़के को देखा, जिसने सिर्फ अंडरगारमेंट्स पहने हुए थे। जब अनिल की बांधी हुई पट्टी से खून रिसने लगा, तो किशोर ने अपनी शर्ट फाड़कर पट्टी की तरह इस्तेमाल की।
वह टीचर उसे नूंह के सदर पुलिस स्टेशन ले गए। टीचर ने पुलिस को बताया कि जब उन्होंने 16 साल के लड़के से पूछा कि वह कहाँ जा रहा है, तो उसने बस इतना कहा, “बिहार”।
PGIMS रोहतक हुआ इलाज
इसके बाद पुलिस किशोर को अस्पताल ले गई और दो असफल सर्जरी के बाद PGIMS रोहतक में किशोर के घाव का इलाज किया जा सका।
इस बीच, परिवार किशोर को सरगर्मी से ढूंढ रहा था और हरियाणा में कई जगहों पर पोस्टर लगा रहा था। इसके बाद उन्हें अपने बच्चे का पता तब चला जब वह नूंह पुलिस स्टेशन पहुंचे और पुलिस को बिहार में अपने गांव का नाम बताया। उसका सबसे बड़ा भाई जो परिवार में सबसे अधिक पढ़ा-लिखा था, वह उस समय धान की रोपाई के मौसम के कारण कैथल में था। भाई ने याद करते हुए कहा, “मुझे घर से फोन आया कि मैं तुरंत नूंह पुलिस स्टेशन पहुँचूँ।” वह भाई की हालत देखकर हैरान रह गया था। इसके बाद अनिल को खोजने में चार महीने और लग गए।
किशोर नहीं बता सका पता
16 साल का लड़का पुलिस को बस इतना ही बता पाया कि उसे ‘अनिल डेयरी’ में रखा गया था और उसने अनिल के बच्चों के नाम बताए। IPS अधिकारी नितिका गहलोत ने बताया कि उन्होंने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, पलवल और फरीदाबाद के 250 से अधिक गांवों में तलाशी ली। तीन स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीमें लगाई गई थीं; अधिकारी गांवों में जाते थे और उस लड़के को वीडियो कॉल करके पूछते थे कि क्या वह किसी चीज को पहचान सकता है।
एक गांव के सरपंच से मिली जानकारी उन्हें यूपी के ग्रेटर नोएडा ले गई। आखिरकार 30 दिसंबर 2025 को अनिल को गिरफ्तार कर लिया गया। तब से उसकी जमानत की अर्जियां तीन बार खारिज हो चुकी हैं, जिनमें हाई कोर्ट का फैसला भी शामिल है।
सिर्फ 5वीं क्लास तक पढ़े इस 16 साल के लड़के के पास काम के सीमित विकल्प हैं, लेकिन उसने कहा, “अब वह काम के लिए कहीं और नहीं जाना चाहता”। उसके पिता और एक छोटा भाई धान की रोपाई के अगले सीजन के लिए फिर से हरियाणा गए हैं। आगे कहा कि अगर उसे मदद मिले, तो शायद वह कपड़ों या किराने की दुकान खोल लेगा।
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