बिहार में जल्द ही विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होने हैं। एनडीए की कोशिश 10 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज करने की है। इस चुनाव में वंशवादी राजनीति की झलक साफ दिखाई देगी।
इस चुनाव के जरिये पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, आरएलएम प्रमुख तथा राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना तय है। विधान परिषद के चुनाव के लिए 18 जून को वोटिंग होगी।
इसके अलावा एलजेपी (रामविलास) प्रमुख और कैबिनेट मंत्री चिराग पासवान को अपने भतीजे सीमांत मृणाल, बहनोई वेद प्रकाश पांडे और पूर्व एमएलसी हुलाश पांडे में से किसी एक का चुनाव करना है।
मांझी के बेटे भी जा सकते हैं विधान परिषद
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (एस) प्रमुख और कैबिनेट मंत्री जीतन राम मांझी भी अपने बेटे प्रवीण कुमार सुमन को एमएलसी पद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके बड़े बेटे संतोष कुमार सुमन एमएलसी और मंत्री हैं। जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी इमामगंज से विधायक हैं।
आरजेडी इस दुविधा में फंसी हुई है कि वह आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के बेटे तेज प्रताप यादव और उनकी बेटी रोहिणी आचार्य में से किसे उम्मीदवार बनाए। पार्टी के निवर्तमान एमएलसी सुनील सिंह भी इस दौड़ में शामिल हैं।
जनशक्ति जनता पार्टी के प्रमुख तेज प्रताप यादव को अगर चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाता है तो उन्हें आरजेडी में वापस लौटना होगा। रोहिणी आचार्य तेजस्वी यादव से नाराज थीं, उन्हें ‘समझौते’ के तहत विधान परिषद सीट की पेशकश की जा सकती है।
25 विधायकों का समर्थन जरूरी
मौजूदा संख्या बल के अनुसार, एनडीए नौ सीटें जीत सकता है जबकि प्रमुख विपक्षी दल आरजेडी को एक सीट से ही संतोष करना पड़ सकता है। चुनाव जीतने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।
एनडीए के सहयोगी दल- एलजेपी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (एस) और आरएलएम को एक-एक सीट मिल सकती है लेकिन ऐसा तब होगा जब भाजपा और जेडीयू दोनों तीन-तीन उम्मीदवार उतारने पर सहमत हों।
सरकारी आवास खाली करने से पूर्व सीएम राबड़ी देवी का इनकार
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने साफ कहा कि वह पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को खाली नहीं करेंगी। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
