Bihar Gram Panchayat Holding Tax: बिहार सरकार ने राज्य के हाईवे पर व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स वसूलने के फैसले के तुरंत बाद अब ग्रामीण इलाकों में भी राजस्व बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने ग्राम पंचायतों को गांवों में होल्डिंग टैक्स और विभिन्न प्रकार के शुल्क लगाने तथा उनकी वसूली का अधिकार दे दिया है। नए नियमों के तहत पक्के मकानों पर सालाना 100 रुपये, जबकि पेट्रोल पंप, एलपीजी एजेंसियों, ईंट-भट्ठों और सिनेमा हॉल जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 5,000 रुपये वार्षिक शुल्क लिया जाएगा।

बुधवार को बिहार कैबिनेट ने ‘ग्राम पंचायत टैक्स, रेट्स और फीस रूल्स, 2026’ के ड्राफ्ट को मंजूरी दी। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों को ग्रामीण क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स और अन्य निर्धारित शुल्क लगाने एवं वसूलने का औपचारिक अधिकार मिल गया। हालांकि बिहार पंचायत राज एक्ट, 2006 की धारा 27 में पंचायतों को टैक्स लगाने का प्रावधान पहले से मौजूद था, लेकिन इसे लागू करने के लिए पहली बार विस्तृत संचालन व्यवस्था (SOP) तैयार की गई है।

राज्य में 45,000 से अधिक राजस्व गांव हैं और सरकार का अनुमान है कि ग्रामीण टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद करीब 1,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकेगा।

बिहार का वार्षिक आंतरिक राजस्व करीब 60,000 करोड़ रुपये है

फिलहाल बिहार का वार्षिक आंतरिक राजस्व करीब 60,000 करोड़ रुपये है, जबकि राज्य का सालाना बजट लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये का है। बजट का बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार से मिलने वाले टैक्स, विशेष रूप से जीएसटी हिस्सेदारी और अन्य केंद्रीय अनुदानों पर निर्भर करता है। वहीं राज्य पर करीब 4 लाख करोड़ रुपये का सार्वजनिक कर्ज भी है।

बिहार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (कैबिनेट) अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना, ग्राम पंचायतों की अपनी आय (ओएसआर) बढ़ाना और राज्य सरकार पर उनकी वित्तीय निर्भरता को काफी हद तक कम करना है।

नियमों के अनुसार कच्चे मकानों को होल्डिंग टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है। अर्ध-पक्के मकानों पर 50 रुपये सालाना, पक्के मकानों पर 100 रुपये सालाना और प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत बने मकानों पर रियायती दर से 25 रुपये वार्षिक टैक्स देना होगा।

ग्राम पंचायतें सफाई और जलापूर्ति के लिए भी वसूलेंगी टैक्स

सिर्फ आवासीय संपत्तियों तक ही यह व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी। ग्राम पंचायतों को सफाई और जलापूर्ति जैसी सेवाओं के लिए भी शुल्क वसूलने का अधिकार मिलेगा। इन दोनों सेवाओं के लिए 25-25 रुपये सालाना शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से भी निश्चित वार्षिक परिचालन शुल्क लिया जाएगा।

नए नियमों के तहत पेट्रोल पंप, एलपीजी एजेंसियां, ईंट-भट्ठे और सिनेमा हॉल को हर साल 5,000 रुपये का शुल्क देना होगा। इसके अलावा पंचायतों को पेशों, व्यापार, विज्ञापनों, स्थानीय साप्ताहिक बाजारों, बिलबोर्ड, होर्डिंग और ग्रामीण कुटीर उद्योगों पर भी टैक्स लगाने का अधिकार दिया गया है।

सरकार के अनुसार इन नियमों को केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों और स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने संबंधी नीति आयोग के सुधार एजेंडे को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

नियमों में स्पष्ट किया गया है कि इन टैक्स और शुल्कों से प्राप्त होने वाला पूरा राजस्व संबंधित ग्राम पंचायतों के पास ही रहेगा। इस राशि का उपयोग केवल स्थानीय विकास कार्यों, जैसे ग्रामीण सड़कों के निर्माण, जल निकासी व्यवस्था, साफ-सफाई और पेयजल सुविधाओं के विस्तार पर किया जाएगा।

पंचायती राज विभाग के एक अधिकारी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि ग्रामीण टैक्स नियमों को लागू करने की तत्काल वजह राज्य सरकार का सभी विभागों को राजस्व बढ़ाने के उपाय तलाशने का निर्देश था। अधिकारी के मुताबिक ग्रामीण टैक्स का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित था, इसलिए अब इसे मंजूरी दे दी गई।

राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार सरकार ने वर्ष 2028 तक अपने वार्षिक आंतरिक राजस्व को बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

इसी महीने की शुरुआत में बिहार कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (बीसीडब्ल्यूए) और विपक्षी दलों ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने ठेकेदारों के लगभग 50,000 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान और कल्याणकारी योजनाओं के खर्च के लिए सरकार द्वारा हाल ही में आकस्मिक निधि से राशि निकालने के फैसले का हवाला दिया था। हालांकि, सत्तारूढ़ एनडीए ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि यह स्थिति केवल अस्थायी है।

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बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सम्राट चौधरी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि अगर कुशवाहा के बेटे को छुआ तो कतरा-कतरा खून समर्पित रहेगा। सोशल मीडिया पर 16 सेकंड की क्लिप वायरल हो रही है। सम्राट चौधरी के वायरल बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने भी प्रतिक्रिया दी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक