बिहार में क्रीमी-लेयर नियमों को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सख्त कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा कि बिहार के अधिकारी यह तय करते समय कि आवेदक के माता-पिता क्रीमी लेयर में आते हैं या नहीं, उनकी सैलरी या खेती से होने वाली इनकम को नहीं गिन सकते। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब राज्य में जाति आरक्षण एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

1 सितंबर को सभी जिलाधिकारियों को लिखे एक पत्र में GAD के अंडर सेक्रेटरी दिवाकर मणि ने कहा कि अधिकारियों को क्रीमी लेयर के लिए 8 लाख रुपये की सालाना इनकम की लिमिट तय करते समय माता-पिता की सैलरी और खेती से होने वाली इनकम को नहीं गिनना चाहिए। यह सफाई बिहार सरकार को मिली शिकायतों के बाद आई है। पत्र में कहा गया है कि 8 लाख रुपये की लिमिट सिर्फ़ दूसरे सोर्स से होने वाली इनकम पर लागू होती है, जैसे प्राइवेट बिज़नेस, किराया, प्रोफेशनल सर्विस या कैपिटल इन्वेस्टमेंट।

सरकार ने क्या कहा?

पत्र में कहा गया है, “नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट जारी करने के लिए सालाना इनकम तय करते समय आवेदक के माता-पिता की सैलरी और खेती से होने वाली इनकम को शामिल न करने/न जोड़ने के संबंध में केंद्र सरकार के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।” यह पत्र डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) में शामिल केंद्र की 1994 की क्रीमी लेयर गाइडलाइंस का ज़िक्र करते हुए दिया गया है।

क्रीमी लेयर या नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट के गलत तय होने की शिकायतों को मानते हुए GAD के अंडर सेक्रेटरी ने जिलाधिकारियों को बताया कि NCL सर्टिफिकेट जारी करने के लिए जाति, रहने की जगह और इनकम की जानकारी ज़रूरी है, लेकिन आवेदक को पहले हर एक के लिए अलग-अलग सर्टिफिकेट लेने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “इसके बजाय, नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट सीधे जारी किए जाने चाहिए। NCL सर्टिफिकेट में भी इन डिटेल्स का ज़िक्र होता है और इसे जाति और रहने की जगह के सर्टिफिकेट के तौर पर भी पहचाना जा सकता है।”

प्रशासन की सफाई ऐसे समय में आई है जब बिहार में कोटा में कोटा पर बहस के बीच पिछड़े वर्ग के कोटे तक पहुंच के सवालों ने फिर से अहमियत हासिल कर ली है। नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) सर्टिफिकेट पिछड़े वर्ग (BC) और बहुत पिछड़े वर्ग (EBC) को जारी किए जाते हैं। बिहार जाति आधारित सर्वे, 2022-23 के मुताबिक, राज्य में मुसलमानों समेत 36.01 प्रतिशत EBC और 27.12 प्रतिशत OBC हैं। लेकिन क्रीमी-लेयर आबादी के लिए कोई आधिकारिक नंबर नहीं है। वे लोग जिन्हें NCL स्टेटस से बाहर रखा गया है क्योंकि उनकी सालाना इनकम 8 लाख रुपये से ज़्यादा है।

कोटा को लेकर छिड़ी बहस

हाल ही में बिहार के नेता विपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने अनुसूचित जाति के नेताओं LJP (RV) के चिराग पासवान और HAM (S) के जीतन राम मांझी को अपना कोटा छोड़ने और नॉन-रिजर्व्ड सीटों से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। पिछले हफ़्ते तेजस्वी का यह बयान दलितों के सब-कैटेगराइजेशन को लेकर चिराग पासवान और जीतनराम मांझी के बीच हुई बहस के बीच आया। जहां चिराग इसके खिलाफ हैं, वहीं मांझी इसका सपोर्ट करते हैं।

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संतोष सुमन ने तर्क दिया है कि आरक्षण की समीक्षा करने का मतलब इसे खत्म करना नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि इसका फायदा सबसे कमजोर और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों तक पहुंचे, जिन्हें पीछे छोड़ दिया गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बड़े बेटे संतोष सुमन ने पत्रकारों से कहा, “हम SC/ST सब-कैटेगराइज़ेशन के फेवर में हैं। हम बस SC/ST कोटा के रिव्यू की मांग कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि कोटा का फायदा हमारे बीच सबसे कमज़ोर लोगों तक पहुंचे। हम जो कह रहे हैं, वह सुप्रीम कोर्ट के पहले ही कही गई बात से मैच करता है।” पढ़ें पूरी खबर।