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चारा घोटालाः लालू यादव से जुड़े दुमका कोषागार मामले में सुनवाई टली

सीबीआई की विशेष अदालत चारा घोटाले से जुड़े दुमका कोषागार मामले में आज फैसला सुनाने वाली थी, लेकिन लालू यादव द्वारा दाखिल किए गए एक आवेदन के कारण आज होने वाला फैसला टाल दिया गया। अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई की जाएगी।

लालू प्रसाद यादव (image source- express archive)

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले के चौथे मामले की आज होने वाली सुनवाई टल गई है। सीबीआई की विशेष अदालत चारा घोटाले से जुड़े दुमका कोषागार मामले में आज फैसला सुनाने वाली थी, लेकिन लालू यादव द्वारा दाखिल किए गए एक आवेदन के कारण आज होने वाला फैसला टाल दिया गया। अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई की जाएगी। दुमका कोषागार मामले में लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्र समेत 31 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

क्या है लालू यादव का आवेदनः लालू यादव ने कोर्ट में आवेदन देकर अपील की है कि चारा घोटाला मामले में तत्कालीन महालेखाकार पीके मुखोपाध्याय को भी आरोपी बनाया जाए। लालू यादव का कहना है कि जब वर्ष 1991 से लेकर 1995-96 तक पशुपालन विभाग में अवैध निकासी हुई, तो महालेखाकार ने कैग रिपोर्ट में उसकी चर्चा तक नहीं की। ऐसे में चारा घोटाले को आगे बढ़ाने में महालेखाकार भी जिम्मेदार हैं।

कुल 6 मामलों में हैं लालू यादव आरोपीः लालू यादव चारा घोटाले के कुल 6 मामलों में आरोपी हैं, जिनमें से 3 मामलों में फैसला आ चुका है और लालू यादव को दोषी ठहराया जा चुका है। साल 2013 में पहले मामले में लालू यादव को 5 साल की सजा सुनायी गई थी।  23 दिसंबर, 2017 को दूसरे मामले में साढ़े तीन साल और इसी साल 24 जनवरी को चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के तीसरे मामले में लालू यादव को पांच साल की सजा सुनायी जा चुकी है। आज चौथे मामले में फैसला आना था, लेकिन सुनवाई टाल दी गई है। लालू यादव फिलहाल रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। दुमका कोषागार मामले के बाद लालू यादव को पटना और रांची मामलों में भी सुनवाई का सामना करना है।

क्या है दुमका कोषागार मामलाः दिसंबर 1995 से लेकर जनवरी 1996 तक दुमका कोषागार से 13.13 करोड़ रुपए की अवैध निकासी की गई। इस मामले में लालू यादव, जगन्नाथ मिश्र समेत 31 लोगों को आरोपी बनाया गया है। दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में 11 अप्रैल, 1996 को सीबीआई ने लालू यादव समेत 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। वहीं, मामले में पहली चार्जशीट 11 मई, 2000 को दायर की गई। चार्जशीट में 48 लोगों का नाम था, लेकिन उनमें से 14 लोगों की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।

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