बिहार की सियासत में एक बार फिर गहमागहमी दिख सकती है क्योंकि सरकार की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री और लालू यादव की पत्नी रबड़ी देवी को सरकार की ओर से फिर से एक नोटिस दिया गया है, जिसके मुताबिक उन्हें अपना सरकारी आवास खाली करना होगा।
यह आवास अब डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री को आवंटित कर दिया गया है। इससे पहले ही राबड़ी देवी को नोटिस जारी किया जा चुका है।
पत्र में क्या लिखा गया?
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बिहार सरकार की ओर से भवन निर्माण विभाग ने नोटिस में कहा है कि विभाग ने 25 नंबर 2025 को बिहार विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को आवास संख्या-39 हार्डिंग रोड पटना आविंटित किया गया है। लेकिन पूर्व सीएम और एमएलसी राबड़ी देवी की ओर से अभी आवास संख्या-10, सर्कुलर रोड, पटना खाली नहीं किया गया है।
पत्र के मुताबिक, सरकार ने अब यह आवास 27 मई 2026 को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नन्दकुशोर राम को आवंटित किया गया है। ऐसे में इसे आवास को तत्काल रिक्त करें और अपने आवंटित आवास में शिफ्ट हों।
विभाग के संयुक्त सचिव सह संपदा पदाधिकारी ने राबड़ी देवी के आप्त सचिव को पत्र लिखकर इस आवास को खाली करने का नोटिस दिया है। नंद किशोर सम्राट सरकार के दलित मंत्री हैं, इन्हें डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग सौंपा गया है। वहीं, राबड़ी देवी अभी विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष पद पर हैं।
पहले भी जारी किया गया है नोटिस
इससे पहले भी 25 नवंबर को विभाग ने आवास खाली करने का नोटिस जारी किया था। परंतु राबड़ी देवी ने अबतक आवास खाली नहीं किया। जानकारी दे दें कि राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी एवं परिवार के अन्य सदस्य दो दशक से इस आवास में रह रहे हैं। लालू परिवार ने सरकार और विभाग पर जबरन परेशान करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने तो यह भी कह दिया था कि आवास खाली नहीं किया जाएगा।
ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि सम्राट चौधरी की सरकार लालू परिवार से यह बंगला खाली करवा पाती है या नहीं।
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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जिनमें उन्होंने लैंड फॉर जॉब घोटाले मामले की सुनवाई में अपना बचाव पक्ष तैयार करने के लिए 1,600 से अधिक अप्रमाणित दस्तावेजों की मांग की थी। अदालत ने कहा कि ये याचिकाएं मुकदमे को शुरू से ही जटिल बनाने के उद्देश्य से दायर की गई थीं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
