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Bihar Elections 2020: नीतीश की पार्टी में गए जुलाई में रिटायर हुए DG सुनील कुमार, गुप्तेश्वर पांडे और एक पूर्व DGP के भी JDU से लड़ने की अटकल

गुप्तेश्वर पांडे चुनाव लड़ने के लिए पहले भी इस्तीफ़ा दे चुके हैं। अब तो इनकी नौकरी भी कुछ महीने ही बची है। बक्सर क्षेत्र की कोई विधानसभा सीट इनकी पसंद बताई जाती है।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता गिरधारी लाल जोशी | Updated: August 29, 2020 8:07 PM
Bihar Elections 2020, JDU, Nitish Kumar, Retired DG Sunil KumarBihar Elections 2020: पहला फोटो- रिटायर डीजी सुनील कुमार। दूसरे में- रिटायर डीजीपी केएस द्विवेदी। तीसरे में- वर्तमान डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे। (फाइल फोटो)

Bihar Elections 2020 से पहले रिटायर डीजी सुनील कुमार ने शनिवार (29 अगस्त) को जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। वह आगामी विस चुनाव में अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं। वे जुलाई में ही डीजी (पुलिस भवन निर्माण) के पद से रिटायर हुए हैं। सुनील कुमार के जदयू में शामिल होने से दलित नेताओं की सूची में एक तेज तर्रार अधिकारी का नाम जुड़ा है।

पूर्व डीजी सुनील कुमार ने कहा, “मेरे पिताजी कांस्टीट्यूएंट असेंबली के सदस्य थे। मेरे भाई अनिल कुमार भी सक्रिय राजनीति में हैं। नौकरी के बाद मैंने भी नीतीश कुमार के कार्य से प्रभावित होकर राजनीति में आने का फैसला लिया। मैं बतौर जदयू कार्यकर्ता पार्टी के लिए काम करूंगा।” सुनील कुमार के गोपालगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना बताई जा रही है। ये इसी क्षेत्र के रहने वाले हैं। फिलहाल गोपालगंज के कांग्रेस से विधायक अनिल कुमार इनके भाई हैं। उनकी इच्छा चुनाव लड़ने की है और उन्हें टिकट मिलने की भी उम्मीद है।

अटकल है कि मौजूदा डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे और उनसे पहले डीजीपी रहे केएस द्विवेदी भी जदयू में शामिल होकर चुनाव लड़ सकते हैं। ये तीनों अधिकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं। हालाँकि पांडे ने इन अटकलों को बेबुनियाद और कोरी कल्पना कहा है। जदयू के नेताओं की सोच है कि तीन डीजी रैंक के अधिकारी पार्टी टिकट पर लड़ते हैं तो जातीय आधार पर भी समीकरण मजबूत होंगे और नौकरशाही ख़ेमे में भी।

गुप्तेश्वर पांडे चुनाव लड़ने के लिए पहले भी इस्तीफ़ा दे चुके हैं। अब तो इनकी नौकरी भी कुछ महीने ही बची है। बक्सर क्षेत्र की कोई विधानसभा सीट इनकी पसंद बताई जाती है। वहीं, केएस द्विवेदी को भागलपुर शहरी क्षेत्र से टिकट की आस है। वह भागलपुर के एसपी रह चुके है। तब वह जनता में लोकप्रिय थे। फिलहाल वह बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष हैं। केएस द्विवेदी कहते हैं कि ऑफर मिला तो विचार किया जा सकता है।

भागलपुर में भाजपा आपसी खींचतान में ही उलझी है। शाहनवाज़  हुसैन और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के अपने-अपने खेमे हैं। लोकसभा चुनाव में यह सीट जदयू के हिस्से भाजपा ने कर दी थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा यहां नहीं जीत पाई थी। क्षेत्र की सभी छहों सीटों पर महागठबंधन ने ही जीत दर्ज की थी। बिहपुर और पीरपैंती से राजद, कहलगांव और भागलपुर कांग्रेस, गोपालपुर और नाथनगर जदयू ने जीती थी। उस वक्त जदयू महागठबंधन का हिस्सा था। अब एनडीए का है।

ऐसे भी भागलपुर सीट से भाजपा के एक दर्जन दावेदार लाइन में खड़े है। अर्जित शारस्वत चौबे कांग्रेस के अजित शर्मा से 2015 में पराजित हो गए थे। भाजपा के विजय साह ने बागी बन जीत में रोड़ा अटका दिया था। अर्जित केंद्रीय मंत्री व बक्सर से सांसद अश्विनी चौबे के बेटे हैं। भाजपा आलाकमान इस दफा भागलपुर सीट को लेकर पेशोपेश में है।

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