ताज़ा खबर
 

Bihar Elections 2020 में बड़ा मायने रखता है मुस्लिम वोट, NDA और गठबंधन पर बीते चुनावों में ऐसा डाल चुका है असर

15 जिलों की 78 सीटों में 63 सामान्य और 13 आरक्षित सीट हैं। इन 78 सीटों पर 2015 में जेडीयू ने 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं आरजेडी और बीजेपी के खाते में 20-20 सीटें आई थी और कांग्रेस ने 11 पर जीत दर्ज की थी।

third phase voting, Tejashwi Yadav, nitish kumar, jdu, rjd, bjp, bihar electionBihar Elections 2020: तीसरा चरण में मुस्लिम वोटों का अनुपात बहुत अधिक है। (file)

बिहार विधानसभा चुनाव में दो चरण के मतदान हो चुके हैं। राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों में से 71 सीटों पर पहले चरण में मतदान किए गए थे। वहीं दूसरे चरण में 94 सीटों पर 3 नवंबर को वोटिंग हुई थी। अब शेष बची 78 सीटों पर शनिवार को तीसरे चरण में मतदान किए जा रहे है। इस चरण में मुस्लिम वोटों का अनुपात बहुत अधिक है। ऐसे में चुनाव का तीसरा चरण दोनों पक्षों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

इस आखिरी चरण में मतदान करने वाले लोगों में मुस्लिम वोटरों की आबादी बहुत ज्यादा है। इस चरण में 17 % वोट मुसलमानों के हैं। मतलब राज्य के लगभग आधे मुस्लिम इस चरण में मतदान करेंगे। इस चरण में किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया जैसे सभी मुस्लिम बहुल जिले आते हैं। जहां हर चौथा वोटर मुस्लिम है। आरजेडी इस बार कांग्रेस और वाम दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है जो अपने पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक के फिर से एकत्रित करने की उम्मीद कर रही है, जबकि एनडीए द्वारा की गई पहलों के आधार पर इसमें और सेंध लगाए जाने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण के लिए उठाए गए कदम, अल्पसंख्यक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, भागलपुर दंगा मामलों को फिर से खोलना और सभी कब्रगाहों की फेंसिंग वोटबैंक की फिजा को बदल सकता है। 15 जिलों की 78 सीटों में 63 सामान्य और 13 आरक्षित सीट हैं। इन 78 सीटों पर 2015 में जेडीयू ने 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं आरजेडी और बीजेपी के खाते में 20-20 सीटें आई थी और कांग्रेस ने 11 पर जीत दर्ज की थी।

लेकिन इस चुनाव में ये आंकड़े बादल सकते हैं क्योंकि इस बार नीतीश के सामने आरजेडी और कांग्रेस के अलावा चिराग पासवान भी हैं। यह चुनाव जेडीयू के लिए 2015 के मुतबले ज्यादा कठिन होगा। बात जब मुस्लिम वोटों की हो तो ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन को कैसे पीछे छोड़ा जा सकता है।

मुस्लिम राजनीति के चतुर खिलाड़ी असदुद्दीन ओवैसी का अपना खेल बने या ना बने लेकिन तमाम धुरंधरों का खेल बिगाड़ने के लिए वो भी बिहार के चुनावी महासमर में उतर चुके हैं। तीसरे चरण के वोट युद्ध में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी शामिल है और वो इस इलाके की मुस्लिम बहुल आबादी पर डोरे डाल रही है। इसको लेकर कांग्रेस ने ओवैसी को बीजेपी की बी-टीम भी कहा है।

लालू प्रसाद यादव आज भी मुसलमानों में सबसे लोकप्रिय नेता हैं और अगर मुस्लिम वोट आरजेडी के खाते में गया तो महागठबंधन की सरकार बनने में मदद होगी। मुस्लिम बहुल इलाकों में जहां महागठबंधन वोटों के जुगाड़ में है, वहां ओवैसी की पार्टी मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर चुकी है. सीमांचल क्षेत्र की 14 सीटों पर एआईएमआईएम ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 UP: गर्व की बात है CM ने गिरफ्तार कराया, पुलिस को मैंने जूते की नोंक पर रखा है…जेल से छूटने पर भीड़ में बोले SP जिलाध्यक्ष, VIDEO वायरल
2 बीजेपी नेताओं के कहने पर मनोहर लाल खट्टर ने राम रहीम को गुपचुप दी पैरोल, 300 जवानों के घेरे में पहुँचाया रोहतक से गुरुग्राम- अख़बार का दावा
3 दिल्ली में एक दिन में COVID-19 के 7000 से ज्यादा केस, 64 मौतें, सरकारी अस्पतालों में भी ICU बेड्स की कमी
यह पढ़ा क्या?
X