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Bihar Elections 2020: अंग्रेजों की धमकी से तब टस से मस न हुए थे भोला दास, जेल सिपाही से बन गए MLA; पढ़ें किस्सा

आज़ादी से पहले भागलपुर की सेंट्रल जेल में एक सिपाही के तौर पर काम करने वाले भोला दास आज़ादी के बाद विधायक बन गए थे। 1951-52 में प्रथम विधानसभा चुनाव हुए। इन चुनाव में भोला दास को अमरपुर से अनुसूचित जाति वर्ग से विधायक बनाया गया।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 14, 2020 11:50 AM
bhola das,. MLAआजादी की लड़ाई के दौरान भागलपुर सेंट्रल जेल क्रांतिकारियों का केंद्र बना हुआ था। (social media)

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है। बिहार के चुनाव हमेशा दिलचस्प होते हैं और चुनावों के दौरान नए किस्से सुनने को मिलते हैं। ऐसा ही एक किस्सा भोला दास का है। आज़ादी से पहले भागलपुर की सेंट्रल जेल में एक सिपाही के तौर पर काम करने वाले भोला दास आज़ादी के बाद विधायक बन गए थे।

आजादी की लड़ाई के दौरान भागलपुर सेंट्रल जेल क्रांतिकारियों का केंद्र बना हुआ था। इसी जेल में भोला दास एक सिपाही के रूप में काम करते थे। वर्ष 1943 के आसपास इस जेल में हजारों क्रांतिकारी बंद थे। तभी जेल के अंदर एक आंदोलन शुरू हो गया। अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते हुए क्रांतिकारियों ने जेल के दरवाजे तोड़ना शुरू कर दिये। क्रांतिकारियों ने जेल के सभी दरवाजे तोड़ दिये गये लेकिन अंतिम गेट का ताला नहीं तोड़ पाये। जिसके बाद सूचना मिलने पर तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी मौके पर पहुँच गए।

क्रांतिकारियों की इस हरकत से नाराज़ अंग्रेज अधिकारियों ने जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों पर हमला का निर्देश दिया। इस दौरान अधिकारियों ने सिपाहियों को गोली चलाने का आदेश दे दिया। कई राउंड गोलियां चलीं। स्वतंत्रता सेनानियों को वार्ड से निकालकर बुरी तरह पीटा गया। इस दौरान एक वर्ड बाद था। पुलिस ने उस वर्ड को भी खोलने का आदेश दिया। वार्ड की चाबी वहां तैनात सिपाही भोला दास के पास थी। लेकिन भोला दास ने यह कहते हुए वर्ड नहीं खोला कि चाबी कहीं खो गई है।

भोला दास को अंग्रेजों ने वर्ड नहीं खोलने पर धमकी दी, पर भोला दास टस से मस नहीं हुए। उस वार्ड में क्रांतिकारी पंडित विनोदानंद झा, रामराज जजबाड़े सहित दर्जनों प्रसिद्ध क्रांतिकारी बंद थे। बाद में रामराज जजबाड़े देवघर से सांसद भी बने। अंग्रेजों को इस पूरे हंगामे के पीछे उन्हीं का हाथ होने का शक था। इस कारण वो उन सबको मार देना चाहते थे, पर वार्ड के नहीं खुलने से ऐसा हो नहीं सका। बाद में जब देश आजाद हुआ तो भोला दास के इस कार्य की सर्वत्र चर्चा हुई। उनके राष्ट्रीय प्रेम व भावना की कद्र करते हुए उन्हें कांग्रेस नेताओं ने अमरपुर विधानसभा अनुसूचित जाति सीट से टिकट दिया और वह चुनाव जीत कर विधायक बन गये।

आज़ादी के बाद 1951-52 में प्रथम विधानसभा चुनाव हुए। उन्हें अमरपुर से अनुसूचित जाति वर्ग से विधायक बनाया गया। इस दौरान उन्हें कुल 18101 मत मिले और उनके विरुद्ध खड़े सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार रामबर दास को 10818 मत प्राप्त हुए थे।

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