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Bihar Elections 2020: जिस गांव से PM ने की थी Garib Kalyan Rojgar Abhiyan की शुरुआत, वहां योजना का एक भी लाभार्थी नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, योजना के शुभारंभ के दौरान जिन लोगों को काम मिला भी था, उन्होंने भी सिर्फ एक माह तक ही काम किया क्योंकि फिर वहां बाढ़ आ गई और प्रवासी मजदूर भी अन्य राज्य वापस लौट गए।

garib kalyan rojgar scheme narendra modi nitish kumar bihar election 2020पीएम मोदी ने खगड़िया के तेलीहार गांव में गरीब कल्याण रोजगार योजना की शुरुआत की थी। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

कोरोना वायरस के चलते लागू हुए लॉकडाउन में लाखों-करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए थे और बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों का बड़े बड़े शहरों से अपने गृह राज्य पलायन हुआ था। लोगों को उनके घर के आसपास ही रोजगार मुहैया कराने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार ने ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ नामक योजना की शुरुआत की थी।

इस अभियान के तहत सरकार ने 6 राज्यों के 116 जिलों में प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने की बात कही थी। इसके लिए सरकार ने 50 हजार करोड़ रुपए का बजट तय किया था। लेकिन अब द वायर की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के खगड़िया जिले के जिस गांव तेलीहार में गरीब कल्याण रोजगार अभियान योजना की शुरुआत की थी, उस गांव में ही इस योजना का एक भी लाभार्थी नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, योजना के शुभारंभ के दौरान जिन लोगों को काम मिला भी था, उन्होंने भी सिर्फ एक माह तक ही काम किया क्योंकि फिर वहां बाढ़ आ गई और प्रवासी मजदूर भी अन्य राज्य वापस लौट गए।

गांव के मुखिया का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान, 467 मजदूर वापस लौटे थे। इनमें से 120 को मनरेगा के तहत काम मिला लेकिन जब यहां बाढ़ आ गई तो काम रुक गया और मजदूर भी अपने काम पर अन्य राज्य वापस लौट गए। मुखिया का ये भी कहना है कि गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत उन्हें ऐसे कोई दिशा-निर्देश भी नहीं मिले हैं कि मजदूरों को इस योजना का लाभ कैसे दिया जाए?

बता दें कि गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत 6 राज्यों के 116 जिलों के प्रवासी श्रमिकों को काम दिया जाना है। इन 6 राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, ओडिशा और झारखंड शामिल हैं, जहां कोरोना के चलते लागू हुए लॉकडाउन में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस लौटे थे। इस योजना के तहत श्रमिकों को 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाना है।

योजना के तहत बिहार के 32 जिले, उत्तर प्रदेश के 31 जिले, मध्य प्रदेश के 24 जिले, राजस्थान के 22 जिले, ओडिशा के 4 और झारखंड के 3 जिले शामिल हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत 17 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। जिनमें से बिहार सरकार ने अब तक सिर्फ 10 हजार करोड़ रुपए ही खर्च किए हैं। 7 हजार करोड़ रुपए अभी भी बचे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि करीब 5.5 हजार करोड़ रुपए के काम बाढ़ और केन्द्र द्वारा फंड जारी करने में हुई कथित देरी के चलते खर्च नहीं हो पाए।

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