ताज़ा खबर
 

Bihar Elections 2020: मंडल कमीशन ने किनारे किए ब्राह्मण! OBC की बनी पकड़, 1990 के बाद कभी न बन पाया ‘सवर्ण’ CM

1990 के बाद बिहार की सियासत पूरी तरह से बदल गई। मंडल कमीशन लागू होने के बाद बिहार की राजनीति में ब्राह्मण सियासत पूरी तरह से किनारे लग गई और उसके बाद एक भी स्वर्ण कभी मुख्य मंत्री नहीं बन पाया।

Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 11, 2020 11:23 AM
मंडल कमीशन लागू होने के बाद बिहार की राजनीति में ब्राह्मण सियासत पूरी तरह से किनारे लग गई।

बिहार विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां जातीय समीकरण साधने और चुनावी गोटी बिठाने में जुटी हुई हैं। अन्य राज्यों के मुक़ाबले बिहार में ब्राह्मण समुदाय की आबादी कम है। शायद यही वजह है कि 1990 के बाद से अभी तक एक भी ‘सवर्ण’ कभी मुख्य मंत्री नहीं बन पाया है। इसका एक मुख्य कारण मंडल कमीशन भी है।

1990 से पहले बिहार की राजनीति में स्वर्णों का सियासी वर्चस्व काफी अच्छा था। बिहार में मैथिल ब्राह्मण राजनीतिक रूप से काफी अहम माने जाते थे। यही वजह थी कि बिहार में 1961 से लेकर 1990 के बीच ब्राह्मण समुदाय के पांच नेता मुख्यमंत्री बने। लेकिन 1990 के बाद बिहार की सियासत पूरी तरह से बदल गई। मंडल कमीशन लागू होने के बाद बिहार की राजनीति में ब्राह्मण सियासत पूरी तरह से किनारे लग गई और उसके बाद एक भी स्वर्ण कभी मुख्य मंत्री नहीं बन पाया।

मंडल कमीशन लागू होने से राज्य में ओबीसी समुदाय की जबरदस्त पकड़ बनी और इसका पूरा फायदा लालू प्रसाद यादव को मिला। लालू के मुख्यमंत्री बनते ही राज्य में यादव, ओबीसी, मुस्लिम और दलित समुदाय ने जबरदस्त पकड़ बना ली। हालांकि लालू के बाद नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली लेकिन उन्होने भी ब्राह्मणों को अहमियत नहीं दी और बिहार की राजनीति से ब्राह्मणों का वर्चस्व धीरे-धीरे कम हो गया।

हालांकि आरजेडी मनोज झा और शिवानंद तिवारी जैसे ब्राह्मण नेताओं की मदद से स्वर्णों को लुभाने की कोशिश कर रही है। वहीं, बीजेपी के पास ब्राह्मण चेहरे के तौर पर मंगल पांडेय और अश्विनी चौबे जैसे नेता मौजूद हैं तो जेडीयू के पास ब्राह्मण नेता के तौर संजय झा हैं।

1990 के बाद कांग्रेस कभी बिहार की सत्ता में नहीं आई, लेकिन कांग्रेस की अब भी स्वर्णों में अच्छी पकड़ है। कांग्रेस के पास मदन मोहन झा ब्राह्मण चेहरा है और राज्य में पार्टी की कमान उन्हीं के पास है। वहीं हालही में पूर्व सीएम भगवत आजाद झा के बेटे और पूर्व सांसद कीर्ति झा आजाद भी कांग्रेस का हिस्सा हैं।

Next Stories
1 बंगाल: BJP की रैली में उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां, दिलीप घोष बोले- COVID-19 चला गया, हमें रैलियां करने से कोई नहीं रोक सकता
2 एशियन गेम्स में गोल्ड लाने वाली पिंकी प्रमाणिक बनीं भाजपाई, टेस्ट में पाई गई थीं ‘पुरुष’, लग चुका है रेप का आरोप
3 यूपी: कई दिनों तक पीछा किया, एक दिन घर घुस गया, नाबालिग को घसीट कर ले गया और की दरिंदगी, जान की धमकी भी दी
यह पढ़ा क्या?
X