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बिहार चुनाव: चिराग पासवान ने बताया- शीर्ष नेतृत्व से बात कर गठबंधन की नीति के तहत उतारे हैं बीजेपी के सामने उम्मीदवार

लोजपा के बिहार चुनाव में अकेले जाने से भाजपा को फायदा मिल सकता है। वहीं जदयू को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

chirag paswan bihar election 2020 bjp ljp nitish kumarचिराग पासवान ने कहा है कि फ्रेंडली फाइट गठबंधन नीति का हिस्सा है। (फाइल फोटो)

बिहार चुनाव में लोजपा ने जब से एनडीए से गठबंधन तोड़कर अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है, तब से ही इस बात के कई राजनैतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। लोजपा नेता चिराग पासवान कह चुके हैं कि उनका भाजपा के साथ गठबंधन है और चुनाव बाद वह भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे। हालांकि लोजपा ने पांच सीटों पर भाजपा के खिलाफ भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

अब चिराग पासवान ने अपने एक बयान में कहा है कि ‘मुझे पांच जगहों पर भाजपा के सामने भी उम्मीदवार उतारने पड़े, लेकिन इसकी जानकारी मैंने शीर्ष नेतृत्व को दे दी थी और यह फ्रेंडली फाइट गठबंधन की नीति है।’ सोमवार को खगड़िया स्थित पैतृक गांव शहरबन्नी में पत्रकारों से बात करते हुए चिराग ने उक्त बात कही। चिराग पासवान का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब लोजपा के बिहार चुनाव में भाजपा की बी टीम होने की चर्चाएं हैं।

बता दें कि चिराग पासवान लगातार खुद को भाजपा के साथ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने चुनाव प्रचार में भी वह पीएम मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल कर रहे हैं। अपने एक बयान में वह खुद को पीएम मोदी का हनुमान भी बता चुके हैं। हालांकि भाजपा ने इस पर आपत्ति जतायी है और पीएम मोदी की तस्वीर के इस्तेमाल की शिकायत चुनाव आयोग से करने की बात कही है लेकिन भाजपा की इस आपत्ति के पीछे नीतीश कुमार के लोजपा के खिलाफ सख्त रुख को बड़ी वजह माना जा रहा है। गौरतलब है कि चिराग भाजपा के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं कर रहे हैं और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी चिराग के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करने से बच रहा है।

भाजपा को मिल सकता है फायदाः लोजपा के बिहार चुनाव में अकेले जाने से भाजपा को फायदा मिल सकता है। वहीं जदयू को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि लोजपा चुनाव में अच्छी संख्या में सीटें जीत जाती है तो चुनाव बाद भाजपा को नीतीश कुमार के साथ मोल-भाव करने में फायदा मिल सकता है। बता दें कि बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन में फिलहाल नीतीश के कद के चलते जदयू का दबदबा है लेकिन भाजपा की कोशिश है कि अब वह बिहार में बड़े भाई की भूमिका में आए।

वहीं लोजपा के जदयू के खिलाफ लड़ने से नीतीश कुमार को दलित वोटों का नुकसान हो सकता है। बिहार में दलित समुदाय की आबादी करीब 17 फीसदी है, जिसमें दुसाध जाति का वोट करीब 5 फीसदी है। बता दें कि दुसाध जाति लोजपा का कोर वोटबैंक मानी जाती है। पिछले चुनाव में लोजपा को भले ही 2 सीटें मिली थी लेकिन लोजपा ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा था, वहां उसे 28 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। ऐसे में यदि पिछले चुनाव के प्रदर्शन को भी लोजपा दोहराती है तो जदयू को 5 फीसदी दलित वोटों के नुकसान का अनुमान है।

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