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Bihar Elections 2020: सरकारी स्कूल में जातिगत भेदभाव! घर से थाली ले जाते हैं मुसहर समाज के बच्चे, बैठना पड़ता है अलग

सरकारी स्कूल में बच्चों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव का मामला सामने आया है। यहां मध्यान भोजन खाने के लिए मुसहर समाज के बच्चे अपने घर से थाली लेकर जाते हैं और उन्हें अलग बैठाया जाता है।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: October 23, 2020 1:47 PM
bihar election, Caste discrimination, government school, Mushar societyBihar Elections 2020: सरकारी स्कूल में बच्चों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव का मामला सामने आया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई)

बिहार के सरकारी स्कूल में बच्चों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव का मामला सामने आया है। यहां मध्यान भोजन खाने के लिए मुसहर समाज के बच्चे अपने घर से थाली लेकर जाते हैं। उन्हें स्कूल में अलग से बैठने को भी कहा जाता है। इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक शख्स अपने बच्चों के साथ हो रहे भेदभाव के बारे में बता रहा है।

वायरल वीडियो पत्रकार मीना कोतवाल ने शेयर किया है। कोतवाल ने लिखा “बिहार के सरकारी स्कूल में ऐसे होता दलित बच्चों के साथ जातिवाद… मुसहर समाज के बच्चे अपनी थाली घर से लेकर जाते हैं क्योंकि स्कूल की थाली किसी और को धोना पड़ सकता है! अलग बैठाया जाता है और पानी पीने में भी भेदभाव…Disappointed but relieved face #बिहार_में_ई_बा”

वीडियो में शख्स थाली दिखते हुए कहता है “ये थाली स्कूल में खाने के लिए है। हमें अलग से बैठाया जाता है।” इसपर पत्रकार ने पूछा कि अप लोगों को पानी कैसे मिलता है। एक ही बरमे से पानी मिलता है ? इस पर शख्स ने कहा “नहीं पानी नहीं मिलता। इसी थाली में पानी भी पी लेते है, खुद नल चला कर।”

पत्रकार मीना कोतवाल के इस वीडियो पर यूजर्स अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा “वाह क्या तरक्की कर रहा है बिहार जातिवाद को लेकर आखिर इस तरह का जातिवाद पुरे देश मे कही न कही होता है लेकिन सरकारे इसके लिए कोई ठोस नियम कानून नहीं बनाती…. क्योंकि सरकार खुद जातिवादी है बिहारीयो को ये सरकार बदलना चाहिए!”

एक यूजर ने लिखा “बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर ने कहा था शिक्षा वो शेरनी का दुध है जो पियेगा वो गर्जेगा अगर आज दलित समाज आदीवासी समाज अन्य पीछड़ा समाज अगर पढ़ लिख ले तो वो जरुर आगे जाएगा।” एक अन्य यूजर ने लिखा “जो दलित सांसद, विधायक बीजेपी कॉंग्रेस की तरफ से चुनकर आते हैं.. वो 5 साल तक सिर्फ अपनी पार्टी के एजेंडे पर काम करते हैं.. वो दवे कुचले वर्ग के लिए कुछ भी नहीं करते.. जातिवाद के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए आम इंसान को पहल करनी होगी.. इसका हल कोई राजनेता नहीं निकाल सकता।”

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