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‘अपनी-अपनी जाति के अपराधियों को हीरो मत बनाएं, ये शर्म की बात’, बिहार डीजीपी की दो टूक- विकास दुबे बिहार आया तो खैर नहीं

बिहार डीजीपी ने कहा कि अपराधी किसी भी जाति, मजहब, धर्म का हो... अपराधी सिर्फ अपराधी होता है। लोग अपराधी को हीरो बना रहे हैं। जनता को अपराध की संस्कृति के खिलाफ लड़ना होगा।

Vikas Dubey criminalsबिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे। (ANI)

यूपी में कानपुर के बिकेरु गांव में आठ पुलिसर्किमयों की हत्या के आरोपी और हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पकड़ने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। इस बीच पुलिसकर्मियों के हत्यारे को कथित तौर पर हीरो बनाए जाने पर बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने सख्त टिप्पणी की है। दरअसल बुधवार (8 जुलाई, 2020) को एएनआई के रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि अगर विकास दुबे बिहार आया तो क्या करेंगे? इस पर डीजीपी पांडे ने तंज कसते हुए कहा, ‘आरती लगाएंगे, उसकी पूजा करेंगे।’

उन्होंने कहा कि पूरे देश की पुलिस एक है। यूपी और बिहार की पुलिस अलग-अलग नहीं है। दुबे यूपी में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करके बिहार में घुस आएगा। और वो यहां से सुरक्षित भी निकल जाएगा? ये कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा, ‘कितनी शर्म और अफसोस की बात है कि ऐसे पेशेवर हत्यारे को ब्राह्मणों का शेर कहा गया है। ये शर्म की बात है और यही अपराध की संस्कृति है जिसकी हम बात करते रहे हैं। अपनी-अपनी जात के पेशेवर लुटेरों को, बलात्कारियों को, डकैतों को, अपहरण करने वालों को, हत्या करने वाले को लोग हीरो बना रहे हैं। अगर कोई इस तरह से अपनी जात के अपराधियों को हीरो बनाएगा, माला पहनाएगा, उसकी पूजा करेगा, उसके जिंदाबादा के नारे लगाएगा, उसे शेर करेगा… इससे अपराध की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।’

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डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि ऐसे लोग प्रशासन को कमजोर कर रहे हैं। सरकार को कमजोर कर रहे हैं। ये लोग पुलिस को कमजोर कर रहे हैं। विकास दुबे शेर नहीं है। ऐसे तो नपुसंक भी किसी को गोली मार सकता है। उन्होंने कहा कि जो आठ पुलिसकर्मी उसे गिरफ्तार करने गए थे, क्यों वो चूहे थे? मारने वाला नपुंसक शेर हो गया? तो आए बिहार में, शेर का शिकार कैसे होता है उसे बता दिया जाएगा। शेर वो होता है जो वतन के लिए शहीद होता है। जो समाज के लिए जीता है और समाज के लिए मरता है, वो शेर होता है।

बिहार डीजीपी ने कहा कि अपराधी किसी भी जाति, मजहब, धर्म का हो… अपराधी सिर्फ अपराधी होता है। लोग अपराधी को हीरो बना रहे हैं। जनता को अपराध की संस्कृति के खिलाफ लड़ना होगा। अपराध की संस्कृति सिर्फ पुलिस खत्म नहीं कर सकती है। इसलिए अपराध किसी भी जात, धर्म, दल का हो, जनता उसे हीरो ना बनाए। उसे सम्मान मत दीजिए, उसे शेर मत बनाइए। अपराधियों के पास आत्मबल नहीं होता है।

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