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बिहार कांग्रेस के मुस्लिम विधायक ने संस्कृत में ली शपथ, जानें कौन हैं शकील अहमद खान

सत्र के पहले दिन अधिकतर विधायकों ने हिंदी में शपथ ली तो कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्रीय भाषा मैथिली में शपथ ली, वहीं दो विधायकों ने इंग्लिश में शपथ ली तो कदमा विधानसभा सीट से जीत कर विधायक बने शकील अहमद खान ने संस्कृत में शपथ लेकर सबको चौंका दिया।

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शकील अहमद कदमा विधानसभा सीट से जीत कर विधायक बने हैं। फोटो सोर्स – सोशल मीडिया

बिहार विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार यानी कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है। आज सत्र के पहले दिन नए विधायकों को शपथ ग्रहण कराया गया। राज्यपाल फागु चौहान का पत्र पढ़कर जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) को प्रोटेम स्पीकर घोषित किया गया। इसके बाद नव निर्विचित विधायकों ने शपथ ग्रहण शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन अधिकतर विधायकों ने हिंदी में शपथ ली तो कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्रीय भाषा मैथिली में शपथ ली, वहीं दो विधायकों ने इंग्लिश में शपथ ली तो कदमा विधानसभा सीट से जीत कर विधायक बने शकील अहमद खान ने संस्कृत में शपथ लेकर सबको चौंका दिया।

शपथ के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि ‘संस्कृत भाषा हिंदुस्तान की क्लासिक भाषा है और अगर जाहिलों को समझ में नहीं आता तो मैं क्या करुं। मैं अपने मातृभाषा ऊर्दू का भी शैदायी हूं, लेकिन मैंने क्लासिक भाषा में शपथ लेने की सोची इसमें कोई हायतौबा मचाने की कोई जरूरत नहीं है।’ जेएनयू के छात्र रह चुके शकील अहमद खां ने शपथ के बाद यह भी कहा कि ‘मैं संस्कृत में शपथ लेकर कुछ अलग करना चाहता था…मैं चाहता था कि कुछ ऐसा करूं जिससे यह पता चले कि भारत अनेकता में एकता को दर्शाता है। मैं बीजेपी और एआईएमआईएम को यह मैसेज देना चाहता था कि हमारी संस्कृति बेहद सुंदर है और संस्कृत सभी भाषाओं की मां है।’

55 साल के शकील अहमद खान ने राजनीति के साथ-साथ वो कृषि तथा अन्य कार्यों में भी रुचि रखते हैं। जिस सीट से शकील अहमद खान ने जीत हासिल की है वो सीट कटिहार जिले में पड़ती है। शकील अहमद साल 2015 में भी कांग्रेस के उम्मीदवार थे औऱ उन्होंने इस सीट से जीत हासिल की थी। इस बार उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार चन्द्र भूषण ठाकुर को 32402 वोटों से हराया है।

साल 2019 में जब शकील अहमद खान, नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए थे तब उनके कांग्रेस छोड़ने की चर्चा भी गरम हो गई थी। बताया जाता है कि शकील अहमद खान का जन्म कटिहार के ही काबर कोठी गांव में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई गांव में करने के बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद उन्होंने जेएनयू से MA, M.Phil और PhD की डिग्री हासिल की।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शकील अहमद खान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र नेता के रुप में की थी। शकील अहमद जेएनयू छात्र संगठन के अध्यक्ष रह चुके हैं। साल 1999 में कांग्रेस ज्वायन करने के बाद वो AICC के सचिव पद पर भी रहे।

बहरहाल आपको बता दें कि बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र 23 नवंबर से लेकर 27 नवंबर तक बुलाया गया है। जिसमें पहले 2 दिन विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से चुनकर आए विधायकों को शपथ दिलाई गई। वही 26 नवंबर को राज्यपाल फागू चौहान विधान सभा और विधान परिषद के सदस्यों को संबोधित करेंगे।

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