बिहार सरकार के हज़ारों यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर और स्टाफ की सैलरी और पेंशन खराब वित्तीय स्थिति की वजह से रोकने की खबरें आ रही हैं। इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी बकाया पेमेंट चुकाने के लिए एक सख़्त ऑर्डर जारी किया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि सैलरी और पेंशन को किसी के मौलिक अधिकार का हिस्सा माना जाना चाहिए।
सम्राट चौधरी विपक्षी पार्टी आरजेडी और कांग्रेस के उन आरोपों का जवाब दे रहे थे कि राज्य ने विधानसभा चुनाव से पहले खुलेआम मुफ़्त योजनाओं के ज़रिए अपना खजाना खाली कर दिया था। सम्राट चौधरी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व सीएम नीतीश कुमार के मिले-जुले गवर्नेंस मॉडल के तहत बिहार आगे भी तरक्की करता रहेगा।
बिहार मोदी-नीतीश मॉडल को फ़ॉलो करता है- सम्राट
नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक चुने गए प्रधानमंत्री बनने के मौके पर शुक्रवार को एक कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा, “बिहार मोदी-नीतीश मॉडल को फ़ॉलो करता है। हम इस नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट लाने के लिए कमिटेड हैं। प्रपोज़्ड 11 नई टाउनशिप हमें बहुत सारा इन्वेस्टमेंट दिलाएंगी।”
पेंशन और सैलरी क्लियर हो चुके है- सीएम सम्राट
पेंडिंग बिलों के बारे में पूछे जाने पर सीएम सम्राट चौधरी ने बताया, “हमें अभी 1,500 करोड़ रुपये से ज़्यादा के पेंडिंग बिल मिले हैं। यूटिलिटी सर्टिफिकेट न होने की वजह से पेंशन और सैलरी रुकी हुई थी। हालांकि, हमने किसी भी हालत में पेंशन और सैलरी न रोकने के आदेश के साथ बिल क्लियर कर दिए हैं।”
13 राज्य यूनिवर्सिटी के हज़ारों टीचर, नॉन-टीचिंग कर्मचारियों और यूनिवर्सिटी पेंशनर्स को मार्च, अप्रैल और मई के लिए अपने पेमेंट मिलने में बहुत देरी हुई थी। इसके अलावा 1 करोड़ से ज़्यादा सोशल सिक्योरिटी पेंशन बेनिफिशियरी (जिनमें बुज़ुर्ग, विधवा और विकलांग लोग शामिल हैं) को अपने रेगुलर वेलफेयर स्टाइपेंड मिलने में दो महीने की देरी हुई थी। राज्य के वित्त विभाग ने अब मार्च से मई तक यूनिवर्सिटी की सैलरी और पेंशन बैकलॉग को कवर करने के लिए 998.84 करोड़ रुपये जारी किए हैं। वेलफेयर पेंशन पाने वालों के लिए बैकलॉग क्लियर करने के लिए बड़े पैमाने पर पेमेंट शुरू कर दिया गया है।
‘राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक’
सम्राट चौधरी ने यह भी साफ किया कि राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक बनी हुई है। उन्होंने कहा, “3.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के सालाना बजट में से हमारा इंटरनल रेवेन्यू सिर्फ़ लगभग 60,000 करोड़ रुपये है। GST की वजह से हमें केंद्र से टैक्स का एक बड़ा हिस्सा मिलता है। लोन की बात करें तो, हमने इस साल लगभग 72,000 करोड़ रुपये उधार लिए हैं। हर राज्य अपनी वेलफेयर स्कीम के लिए लोन लेता है। इसमें कुछ भी अजीब नहीं है।”
सम्राट चौधरी से पूछा गया कि क्या फंड की कमी राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना (MMRY) पर 18,100 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च करने की वजह से हुई। इसके तहत 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले और बाद में 1.81 करोड़ जीविका वर्कर में से हर एक को 10,000 रुपये का ग्रांट दिया गया था। हालांकि सम्राट चौधरी ने इस कनेक्शन को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “MMRY हमारी वेलफेयर स्कीम में से सिर्फ़ एक है। हम 1.8 करोड़ कंज्यूमर को 125 MW मुफ़्त बिजली भी दे रहे हैं। इसे सरकारी खजाने पर दबाव से जोड़ने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वेलफेयर स्कीम एक वेलफेयर स्टेट का ज़रूरी हिस्सा हैं।”
तेजस्वी ने साधा निशाना
हालांकि विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने इसका जवाब देते हुए कहा कि राज्य की देनदारी 3.7 लाख करोड़ रुपये है और मौजूदा वित्त वर्ष के आखिर तक यह 4 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकती है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया, “रेगुलर पेंशन देने के लिए सरकार का कंटिंजेंसी और डिजास्टर फंड का टेम्पररी इस्तेमाल एक गिरते हुए इकोनॉमिक फ्रेमवर्क को दिखाता है, जहां रेगुलर सैलरी अब उधार के पैसे पर निर्भर है।”
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