बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार के गृह विभाग की तरफ से एक लेटर जारी किया गया है। इसमें उनके इस्तीफे की आशंका जताई गई है और Z-प्लस सिक्योरिटी देने की पेशकश की गई है। इससे जेडीयू के नेताओं में नाराज़गी है। जेडीयू नेताओं में इसलिए नाराजगी है क्योंकि नीतीश कुमार के 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेने के बाद ही इस्तीफ़ा देने की उम्मीद है।

पत्र में क्या लिखा गया?

राज्य सरकार की स्पेशल सेक्रेटरी के. सुहिता अनुपम ने 30 मार्च को बिहार के डीजीपी विनय कुमार को यह लेटर भेजा है। इसमें लिखा है, “मुझे यह कहने का निर्देश मिला है कि माननीय सीएम नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट, 2000 के तहत सिक्योरिटी मिल रही है। नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और इसलिए, राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेने से पहले उनके लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य और राज्य के सीएम पद से इस्तीफा देने की संभावना है। इसके मद्देनजर नीतीश कुमार की सिक्योरिटी में बदलाव किया गया है और अब उन्हें Z प्लस सिक्योरिटी दी जाएगी।”

नाराज हैं जेडीयू नेता

हालांकि इस लेटर से जेडीयू के नेता नाराज हैं। जेडीयू नेताओं को ज़्यादा परेशानी इस बात से हुई कि यह लेटर गृह विभाग से आया है। यह विभाग बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास है। बता दें कि सम्राट, नीतीश कुमार की जगह लेने की रेस में सबसे आगे हैं।

वहीं बीजेपी ने इस विवाद पर कोई रिएक्शन देने से परहेज किया है। जेडीयू के एक नेता ने कहा कि यह पत्र नीतीश कुमार के इस्तीफ़े के बाद जारी किया जाना चाहिए था। एक सीनियर जेडीयू नेता ने पूछा, “एक सरकारी लेटर मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े के समय का अंदाज़ा कैसे लगा सकता है?”

एक और वरिष्ठ जेडीयू नेता ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि यह लेटर पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को चोट पहुंचाने जैसा है। नेता ने कहा, “गृह विभाग का अधिकारी सीएम के इस्तीफ़े के समय का अंदाजा कैसे लगा सकता है? इतनी जल्दी क्यों? सिक्योरिटी में बदलाव एक स्टैंडर्ड प्रोसेस है और यह नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफ़ा देने के बाद किया जा सकता था।” इससे पहले बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमे वो नीतीश कुमार के इस्तीफे पर फूट-फूट कर रो रहे थे।

नीतीश कुमार ने 30 मार्च को दिया था इस्तीफा

नीतीश कुमार ने 30 मार्च को विधान परिषद के सदस्य के तौर पर इस्तीफ़ा दे दिया था। हालांकि उन्होंने 15 अप्रैल को खरमास महीने के खत्म होने तक सीएम बने रहने का फ़ैसला किया है। उसके बाद नई सरकार के आने की उम्मीद है। संविधान के तहत कोई भी व्यक्ति राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन का मेंबर हुए बिना छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकता है।

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नीतीश की राजनीतिक विरासत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि बिहार का नेतृत्व कौन करेगा। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के सूत्रों से पता चला है कि पार्टी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का समर्थन कर रही है। पढ़ें पूरी खबर