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मोदी सरकार से उलट चले नीतीश, बिहार में किसानों के लिए अलग बीमा योजना लॉन्‍च

बिहार में बीजेपी के लिए सहयोगी दल जदयू से अच्ची खबर नहीं मिल रही है। पहले लोकसभा सीटों को लेकर जदयू ने दावा ठोंका और अब किसानों के लिए केंद्र सरकार से अलग एक स्कीम लांच कर परेशानी बढ़ा दी।

Author नई दिल्ली | June 6, 2018 2:18 PM
बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार। (Photo: PTI)

बिहार में बीजेपी के लिए सहयोगी दल जदयू से अच्ची खबर नहीं मिल रही है। पहले लोकसभा सीटों को लेकर जदयू ने दावा ठोंका और अब किसानों के लिए केंद्र सरकार से अलग एक स्कीम लांच कर परेशानी बढ़ा दी। केंद्र सरकार ने फसल बीमा योजना लागू की थी मगर बिहार में नीतीश सरकार ने इसे ठुकरा दिया।इसके स्थान पर राज्य सरकार ने बिहार राज्य फसल सहायता योजना लागू करने की तैयारी की है। यह योजना प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना से भी ज्यादा किसानों को कवर करने वाली बताई जाती है, क्योंकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलता है, जो किसी सरकारी या सहकारी बैंक से लोन लिए रहते हैं। राज्य सरकार की इस योजना का बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने बचाव किया है। प्रेम कुमार गठबंधन सरकार में बीजेपी कोटे से मंत्री हैं। केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना के मुताबिक राज्य और केंद्र बीमा किश्त काकरीब 49 प्रतिशत भरते हैं। लाभार्थी किसान को दो प्रतिशत धनराशि जमा करनी होती है। केंद्र सरकार की ओर से तय धनराशि को राज्य सरकार को बीमा कंपनियों को देना पड़ता है।
बिहार के प्रमुख सचिव सहकारिता अतुल कुमार ने बताया कि 2016 के खरीफ सीजन में बिहार ने बीमा कंपनियों को 495 करोड़ का भुगतान किया, जबकि किसानों को सिर्फ 221 करोड़ रुपये मिला।केंद्र की योजना सिर्फ लोन वाले किसानों को लाभ देती है, जबकि यह योजना सभी प्रकार के किसानों के लिए है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र की योजना की तीखी आलोचना करते हुए कहाकि फसल बीमा योजना के असली लाभार्थी किसान नहीं बल्कि बीमा कंपनियां रहीं। हालांकि केंद्रीय योजना के खिलाफ यह भड़ास उन्होंने तब निकाली थी, जब वह राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन का हिस्सा थे।

पिछले साल जुलाई में नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़कर बीजेपी से हाथ मिलाया था। बहरहाल बिहार सरकार ने ऐसे वक्त में यह स्कीम लागू करने की तैयारी की है जब राज्य में एनडीए के चेहरे को लेकर बीजपी और जदयू के बीच पेंच फंसा है। नीतीश कुमार के करीबी नेताओं के हवाले से बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने बिहार को बाढ़ से बचाने के लिए 7,600 करोड़ रुपये मांगे थे मगर बदले में सिर्फ 1200 करोड़ मिले, जिससे राज्य सरकार असहज है।पिछले साल बाढ़ में पांच सौ से ज्यादा लोग मारे गए थे। राज्य सरकार का मानना है कि बीजेपी की केंद्र सरकार बिहार को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं दिख रही है।

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