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‘ये बकवास बोल रहा, इसके खिलाफ कार्रवाई होगी’, जानें क्यों सदन में तेजस्वी पर झुंझलाए नीतीश कुमार

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर से किए गए निजी हमलों पर अपना आपा खो गए सीएम नीतीश कुमार।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र पटना | Updated: November 28, 2020 8:19 AM
Nitish Kumar, Tejashwi Yadavबिहार सीएम नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सदन में ही खरी-खरी सुनाई।

बिहार विधानसभा में शुक्रवार को अलग ही नजारा देखने को मिला। आमतौर पर शांत रहने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर गुस्सा जाहिर किया, तो वहां मौजूद अधिकतर विधायक अवाक ही रह गए। इसके बाद एक क्षण ऐसा भी आया, जब आरोप-प्रत्यारोप को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में हाथापाई जैसी नौबत दिखने लगी। हालांकि, स्पीकर द्वारा सदन की कार्यवाही स्थगित किए जाने के बाद तनाव कम हो सका।

किस बात पर उभरा विवाद?: दरअसल, सदन में तेजस्वी ने सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कई बार निजी हमले किए। तेजस्वी ने आरोप लगाते हुए कहा, “राजनीति में शुचिता की बात की जा रही है। यह नीतीश जी को शोभा नहीं देता। 1991 में हुई एक हत्या का मुकदमा चला। 2008-09 में कैसे फैसले को टाला गया, सब जानते हैं, 2020 में उसे बिना किसी इंक्वायरी और जांच के कैसे खत्म किया गया, ये सब जानते हैं। साथ ही तेजस्वी ने नीतीश के ऊपर कंटेंट चोरी के मामले में लगे 25 हजार रुपये जुर्माने का भी जिक्र करते उन्हें घेरा।

इस पर नीतीश कुमार आग बबूला हो गए। उन्होंने कहा, ‘ये बकवास बोल रहा है। अगर ऐसी बात है तो आप जांच कराइए। इसके खिलाफ कार्रवाई होगी। ये झूठ बोल रहा है। मेरे भाई समान दोस्त का बेटा है, इसलिए हम सुनते रहते हैं। हम नहीं कुछ बोलते हैं। इसके पिता को किसने बनाया था विधायक दल का नेता, इसको पता है? इसको डिप्टी सीएम किसने बनाया? इस पर आरोप आया, तो हमने कहा कि एक्सप्लेन करो। एक्सप्लेन नहीं किया तो छोड़ दिया।”

नीतीश यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “मेरे ऊपर लगे आरोप के बारे में कोर्ट का फैसला है। हमने तो नहीं कहा। सारा लोग जानते हैं। कौन नहीं जानता है? इसी तरह हाउस चलेगा? हम बर्दाश्त करते रहते हैं। कुछ नहीं बोलते हैं। क्यों नहीं एक्सप्लेन किया? आज चार्जशीटेड है। हमारे मुकदमे के बारे में विजय चौधरी जी ने साफ-साफ सबकुछ बताया। कोर्ट मुझ पर दर्ज मुकदमे को खारिज कर चुका है। फिर भी ये बोले ही जा रहा है। हमारा क्या चरित्र है, लोगों को मालूम नहीं है? मेरे बारे में कौन नहीं जानता है?”

‘अगर इसे आगे बढ़ना है, तो व्यवहार सीखना चाहिए’: ये किस-किस तरह की बात करता है, कौन एडवाइजर है, ये सब बात समझ के परे है। अरे, आगे बढ़ना है तो व्यवहार सीखना चाहिए। मर्यादाहीन बात है। सदन की परंपरा के विरुद्ध है। सदन में जिसके बारे में गलत बात बोली जाए, तो वह व्यक्ति कार्रवाई की मांग कर सकता है। लेकिन मैं तो यह सब करता नहीं। हमलोग इतने दिनों से काम कर रहे हैं। विधायक रहे, सांसद रहे, मंत्री रहे।

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