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रेल भर्ती घोटालाः लालू के खिलाफ नया केस, 16 ठिकानों पर CBI रेड, राबड़ी के पटना वाले घर पर भी पहुंचा दस्ता

सीबीआई की टीम जिस वक्त लालू की धर्मपत्नी के आवास पर पहुंची, वह उस वक्त घर पर अकेली थीं। छोटे बेटे तेजस्वी यादव लंदन में हैं, जबकि पति दिल्ली में हैं। इस बीच, राजद ने इन छापों को बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया।

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी। (आर्काइव फोटोः एएनआई)

रेल भर्ती घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव परिवार के खिलाफ शिकंजा कसा गया है। शुक्रवार (20 मई, 2022) को उनसे जड़े करीब 17 ठिकानों पर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) ने छापेमारी की। इन ठिकानों में उनकी पत्नी राबड़ी देवी का पटना वाला घर भी शामिल है, जहां सुबह-सवेरे सीबीआई का दस्ता जा पहुंचा।

बताया गया कि राबड़ी इस दौरान अकेली थीं। छोटे बेटे तेजस्वी यादव लंदन पहुंचे हुए हैं, जबकि पति दिल्ली में हैं। उन्होंने इसके बाद दो वकीलों को घर पर बुलाया।

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि सीबीआई रेलवे में नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन लेने के आरोप में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है।

अफसरों के अनुसार, जांच एजेंसी ने दिल्ली और बिहार में 16 स्थानों पर छापे मारे। यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा तथा हेमा के अलावा कई उम्मीदवारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआई ने शुक्रवार सुबह दिल्ली, पटना और गोपालगंज में 16 जगहों पर तलाशी ली।

यह कथित घोटाला तब का है जब लालू प्रसाद यादव संयुक्त प्रगतिशील सरकार में रेल मंत्री थे। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने आरोपों की प्रारंभिक जांच दर्ज की थी, जिसे प्राथमिकी में बदल दिया गया है।

जिस मामले को लेकर रेड हुई, वह थोड़ा पुराना है। दरअसल, साल 2004 से 2009 तक लालू जब रेल मंत्री थे तब रेलवे रिक्रूटमेंट घोटाला हुआ था। आरोप है कि जमीन के बदले तब लोगों को नौकरियां दी गई थीं।

कहा जा रहा है कि इसी धांधली को लेकर सीबीआई टीम दबिश देने पहुंची। हालांकि, केंद्रीय एजेंसी की ओर से इस बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। भादसं की धारा 120-बी आपराधिक षडयंत्र से जुड़ी है। ऐसा आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के 2008 से 2009 तक रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में नौकरियों के बदले में यादव परिवार को कई संपत्तियां दी गयी, जो प्रमुख स्थानों पर थीं।

यह नया मामला तब दर्ज किया गया है जब हफ्तों पहले यादव को चारा घोटाला मामले में जमानत पर रिहा किया गया। इस मामले में रांची में विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था। राष्ट्रीय जनता दल ने सीबीआई पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, ‘‘तोता है, तोतों का क्या।’’ उच्चतम न्यायालय ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के दौरान सीबीआई को राजनीतिक आकाओं का ‘‘तोता’’ कहा था।

उधर, राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस छापेमारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बदले की राजनीति की भावना से की गई है। वहीं, बीजेपी नेता सुशील मोदी ने कहा है- जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तो उन्होंने ग्रुप-डी की नौकरी देने के बदले में दर्जनों लोगों से ज़मीन लिखवा ली थी। इनका ये कहना था कि तुम हमें अपनी ज़मीन दो और हम तुम्हें ग्रुप-डी की नौकरी देंगे। ये ज़मीन सीधे अपने नाम नहीं लिखवाते थे बल्कि किसी और के नाम पर ज़मीन लिखवाकर उसे पांच छह साल बाद उनसे उस ज़मीन को खुद को उपहार में दिलवा लेते थे। यह इनके काम करने का ढंग था।

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