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बिहारः भागलपुर मेडिकल कॉलेज में चार दिन पड़ा रहा शव, बिना परिजनों को बताए अस्पताल प्रशासन ने ही करा दिया दाह संस्कार

55 साल के बसंत कुमार 25 मार्च को दिल्ली से भागलपुर पहुंचा था, यहां तबियत खराब होने के बाद उसे कोरोना का संदिग्ध मानते हुए पृथक वॉर्ड में भर्ती कराया गया था।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

बिहार के जवाहरलाल नेहरू भागलपुर मेडिकल कालेज अस्पताल की लापरवाही की वजह से एक शव को लावारिस मानकर बुधवार को उसका दाह संस्कार कर दिया गया। बिहार के सोनपुर सारण के बसंत कुमार सिंह ने 28 मार्च की शाम को अस्पताल के कोरोना वार्ड में दम तोड़ दिया था। तब से उसकी लाश घर वालों के इंतजार में अस्पताल के शवगृह में पड़ी रही। मगर कोई नहीं आया। आता भी कैसे अस्पताल के रजिस्टर में उसके भर्ती होने के समय पूरा ठिकाना या मोबाइल नंबर ही दर्ज नहीं किया गया। डॉक्टरों ने लाश का पोस्टमार्टम तक नहीं किया, जिससे उसकी मौत की सही वजह नहीं पता चली।

मेडिकल कालेज अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर रामचरित्र मंडल के मुताबिक, बसंत की मौत हृदयघात की वजह से हुई है। इसलिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी नहीं है। उसके घर वालों का पता लगाने छपरा के सिविल सर्जन को पत्र लिखा गया था। नियम के अनुसार लाश लेने का दावा न होने की हालत में 72 घंटे रखना जरूरी है। इसी के तहत उसका शव रखा गया। किसी के न आने पर एक अप्रैल को अंतिम संस्कार कर दिया गया।

बसंत की मौत के बाद अस्पताल अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश में है। ऐसे में छपरा के सिविल सर्जन को पत्र लिखने की जहमत सिर्फ खानापूर्ति के लिए उठाई गई। ऐसा अस्पताल के लोग ही बोल रहे है। मरीज का पोस्टमार्टम न होने की भी वजह है। फोरेंसिक व मेडिसीन विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदीप लाल ने कर्मचारियों व डाक्टरों के लिए पोस्टमार्टम किट की मांग पत्र लिखकर की है।

बसंत कुमार (55) दिल्ली से विक्रमशिला ट्रेन पर सवार हो 25 मार्च को भागलपुर पहुंचा था। तबियत खराब होने के बाद उसे उसे जेएलएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। उसी रात उसे कोरोना संक्रमण का मरीज मानकर क्वारैंटाइन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। 27 मार्च को उसका नमूना लेकर जांच करने पटना भेजा गया। इस बीच रिपोर्ट आने के पहले ही 28 मार्च रात आठ बजे करीब उसकी मौत हो गई।

इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सूचना देने के लिए मृतक की बीएचटी मंगवाई। जिसको देखकर सभी हतप्रभ रह गए। बीएचटी पर उसका नाम और पते की जगह सोनपुर, सारण लिखा पाया। मृतक के पिता का नाम और उसके घर वाले किसी का मोबाइल नंबर भी नहीं दिया गया था।

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