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बिहार चुनाव: बीजेपी बनेगी सबसे बड़ी पार्टी? हर बार बढ़ा वोट प्रतिशत, 2015 में 24% वोट लाकर भी रही पीछे

हर बार बिहार में 200 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने वाली बसपा एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है और पार्टी ने 4.41 फीसदी वोट शेयर के साथ शुरुआत की जो घटकर 2.7 फीसदी पर पहुंच गया।

Bihar BJP-JDU allianceतस्वीर में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी। (पीटीआई फोटो)

पिछले चार बिहार विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय पार्टियों के वोट शेयर में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसमें राष्ट्रीय पार्टी भाजपा के मत प्रतिशत में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखी गई। बिहार में भाजपा एकमात्र ऐसी राष्ट्रीय पार्टी है जिसका वोट शेयर अब दोहरे अंक में पहुंच चुका है। नवंबर 2000 में बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद राज्य में फरवरी और अक्टूबर 2005, 2010, 2015 में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं।

इधर दौरान बिहार में चुनाव लड़ने वाली छह राष्ट्रीय पार्टियों (भाजपा, बसपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस और एनसीपी) का वोट शेयर फरवरी 2005 में 23.57 फीसदी से बढ़कर 2015 में 35.6 फीसदी हो गया। हालांकि इसमें एक तरफा सबसे अधिक बढ़ोतरी भाजपा के वोट शेयरों में देखी गई।

खास बात है कि एनडीए के शासनकाल में बिहार का विभाजन होने के बावजूद भाजपा के वोट शेयर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई और ये फरवरी, 2005 में 10.97 फीसदी से बढ़कर 2015 में 24.42 फीसदी पर पहुंच गया। इसका एक कारण ये भी था कि पार्टी ने 2015 में 157 सीटों पर चुनाव लड़ा जबकि इसके पहले ये आंकड़ा 102-103 सीटों पर था। हालांकि अन्य पार्टियां भी अधिक सीटों पर चुनाव लड़ती रही हैं मगर ज्यादातर के वोट शेयर में गिरावट दर्ज की गई है।

राष्ट्रीय दलों में बसपा ने 2015 में सबसे अधिक 228 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसके बाद भाजपा ने 157, सीपीआई 98, सीपीएम 43, कांग्रेस 41 और एनसीपी ने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसमें कांग्रेस के वोट शेयर में मामूली बढ़ोतरी छोड़कर बसपा, सीपीआईस सीपीएम और एनसीपी के वोट शेयरों में गिरावट देखी गई।

इधर 2005 और 2015 के बीच भाजपा ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा उनकी संख्या 102 से बढ़कर 157 हो गई और उसका वोट प्रतिशत भी 10.97 फीसदी से बढ़कर 24.42 फीसदी हो गया। इस दौरान कांगेस ने 2010 में सबसे अधिक सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सबसे कम 2015 में 41 सीटों पर चुनाव लड़ा। मगर इसका वोट शेयर फरवरी 2005 में पांच फीसदी और 2010 में 8.37 फीसदी रहा।

हर बार बिहार में 200 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने वाली बसपा एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है और पार्टी ने 4.41 फीसदी वोट शेयर के साथ शुरुआत की जो घटकर 2.7 फीसदी पर पहुंच गया। सीपीआई ने 2005 में 17 सीटों और 2015 में 98 सीटों पर चुनाव लड़ा। पार्टी का वोट शेयर इस बीच 1.36 फीसदी और 2.09 फीसदी रहा।

सीपीएम का हाल और भी बुरा रहा पार्टी ने 2015 में 43 सीटों पर चुनाव लड़ा और 2005 में दस सीटों पर। इस बीच इसका वोट शेयर 0.61 फीसदी और 0.71 फीसदी रहा। एनसीपी ने 2005 में आठ सीटों की तुलना में 2010 में 171 सीटों पर चुनाव लड़ा मगर उसे पिछले 2005 की तुलना में 1.82 फीसदी वोट कभी नहीं मिला।

क्षेत्रीय पार्टियों में तुलना करें तो अक्टूबर 2005 में 203 सीटों पर लड़ी एलजेपी को 11.10 फीसदी, 175 सीटों पर लड़ी आरजेडी को 23.45 फीसदी और 139 सीटों पर लड़ी जेडीयू को 20.46 फीसदी वोट मिले। 2015 में इनका वोट शेयर क्रमश: 4.83 फीसदी (42 सीट), 18.35 फीसदी (101 सीट) और 16.83 फीसदी (101 सीट) रहा। हालांकि राज्य की तीनों प्रमुख पार्टियों के वोट शेयर मिला ले तो अक्टूबर 2005 के चुनाव में इन्हें 57.39 फीसदी वोट मिले जो बाद में घटकर 42.58 फीसदी पर आ गए।

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