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‘इनके हिसाब-किताब का समय अब आ गया है, लोभ और बहकावे में फंसना मत’,नीतीश के प्रस्ताव पर मायावती ने खोला मोर्चा

मायावती ने ट्वीट करते हुए लिखा कि बिहार विधानसभा आम चुनाव के पहले वर्तमान सरकार एक बार फिर एससी/एसटी वर्ग के लोगों को अनेकों प्रलोभन/आश्वासन आदि देकर उनके वोट के जुगाड़ में है।

mayawati bihar election 2020 nitish kumar dalit vote bankबसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर बिहार की नीतीश सरकार पर निशाना साधा है। (फाइल फोटो)

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने शुक्रवार को ऐलान किया था कि राज्य में एससी/एसटी समुदाय के किसी व्यक्ति की हत्या होने पर उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। इस संबंध में सीएम ने तुरंत नियम बनाने के निर्देश दिए थे। अब नीतीश कुमार के उस ऐलान पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने निशाना साधा है। मायावती ने ट्वीट कर लिखा कि “बिहार विधानसभा आम चुनाव के पहले वर्तमान सरकार एक बार फिर एससी/एसटी वर्ग के लोगों को अनेकों प्रलोभन/आश्वासन आदि देकर उनके वोट के जुगाड़ में है, जबकि अपने पूरे शासनकाल में इन्होंने इन वर्गों की घोर अनदेखी/उपेक्षा की व कुंभकरण की नींद सोते रहे, जिसके हिसाब-किताब का अब समय।”

अपने दूसरे ट्वीट में बसपा सुप्रीमो ने लिखा कि ‘अगर बिहार की वर्तमान सरकार को इन वर्गों के हितों की इतनी ही चिंता थी तो उनकी सरकार अब तक क्यों सोई रही? जबकि इनको इस मामले में यूपी की बसपा सरकार से बहुत कुछ सीखना चाहिए था। अतः इन वर्गों से अनुरोध है कि वे श्री नीतीश सरकार के बहकावे में कतई ना आएं।’

बता दें कि शुक्रवार को अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1995 के तहत गठित राजस्तरीय सतर्कता व मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जब उन्होंने अफसरों को उक्त निर्देश दिए। सीएम ने राशन कहा कि कार्ड वितरण, बिना जमीन वाले सभी एससी-एसटी परिवारों को घर के लिए जमीन, उनका आवास निर्माण जैसे काम तेजी से होने चाहिए।

सीएम ने ये भी कहा कि राज्य में एससी/एसटी से जुड़े सभी लंबित मामले 20 सितंबर 2020 तक निपटाए जाएं। वहीं हाल ही में एनडीए में शामिल होने वाले जीतन राम मांझी ने नीतीश के ऐलान से खुश होकर इसे पूरे देश में लागू करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी निवारण एक्ट की धारा 3(2) को लागू करने के लिए नीतीश सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं और इससे दलित समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

बिहार चुनाव को देखते हुए इसे नीतीश सरकार की दलित वोटबैंक को लुभाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं जदयू के इस दांव के जवाब में ओबीसी कार्ड चल दिया है। दरअसल तेजस्वी यादव ने कहा कि ‘चूंकि चुनाव नजदीक है। नीतीश कुमार ने बिहार में मारे गए एससी/एसटी लोगों के बच्चों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है पर ओबीसी या फिर सामान्य वर्ग के जो लोग मारे गए, उनकी संतानों को नौकरी क्यों नहीं दी जा रही है? यह एससी/एसटी लोगों की हत्या को प्रोत्साहित करने जैसा है।’

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